Headlines

FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation


1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे।

इस तिमाही यानी जुलाई-सितेबर में कंपनियां सीधे तौर पर रेट बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का सहारा ले रही हैं। यानी सामान की कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा यानी वजन कम कर दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।

भारत में प्रमुख FMCG कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी, नेस्ले, डाबर, ब्रिटानिया आदि इन प्रोडक्ट्स में सक्रिय हैं। FMCG वे रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान हैं जो जल्दी बिकते और खर्च हो जाते हैं।

ब्रिटानिया: ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा

देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी ब्रिटानिया चालू तिमाही में ‘श्रिंकफ्लेशन’ के जरिए कीमतों में 1.5 से 2% की और बढ़ोतरी कर सकती है। यह कटौती मुख्य रूप से कंपनी के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैक्स में देखने को मिलेगी।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने बताया कि चीनी और पाम ऑयल जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ काफी हद तक श्रिंकफ्लेशन पर निर्भर थी। चालू तिमाही में भी इस ट्रेंड को जारी रखना पड़ेगा। हालांकि, मार्केट में डिमांड का माहौल अभी भी काफी मजबूत दिख रहा है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड: 2 से 5% तक बढ़ सकती है महंगाई

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी अपने अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2 से 5% प्र

गोदरेज कंज्यूमर: क्रूड के स्थिर होने का इंतजार

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5% दाम बढ़ाए थे। कंपनी का कहना है कि वह चालू तिमाही में फिलहाल तुरंत बड़े प्राइस हाइक से बच रही है और कमोडिटी मार्केट के स्थिर होने का इंतजार कर रही है।

कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति ने बताया कि गोदरेज के कई इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर क्रूड इसी रेंज में रहता है तो हमें किसी बड़े प्राइस हाइक की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम FY27 के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को आसानी से हासिल कर लेंगे।

डाबर इंडिया: वॉल्यूम पर दिख सकता है असर

डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती लागत आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है। कंपनियों के पास इस लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

टाटा कंज्यूमर और नेस्ले: वेस्ट एशिया संकट और एल-नीनो पर नजर

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के एमडी सुनील डी’सूजा ने बताया कि लागत का असर काफी डायनेमिक है। अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी आगे कीमतों में बदलाव करेगी।

वहीं नेस्ले इंडिया ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में सचेत किया है कि शॉर्ट-टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन थोड़ा सुस्त हो सकता है। कंपनी ने कहा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष और मानसून पर एल-नीनो का संभावित असर फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय है।

आगे क्या: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बेहतर डिलीवरी से मार्जिन बचाने की कोशिश

कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी सेक्टर को भरोसा है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत बनी रहेगी। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को घटाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपने मार्जिन को बरकरार रख सकें।

क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’?

अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं।

इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *