दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी ऑपरेशन गंगा की, जब दो कश्मीरी लड़के भारतीय विमान को हाईजैक करके पाकिस्तान ले गए और फिर उसमें आग लगा दी…
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बात 30 जनवरी 1971 की है। जगह थी श्रीनगर और घड़ी की सुइयां सुबह के 11 बजा रही थीं। पहाड़ों से बर्फीली हवाएं आ रही थीं, लेकिन इस कड़कड़ाती ठंड में भी श्रीनगर एयरपोर्ट के बाहर खड़े दो लड़कों के चेहरे पर पसीना था।
ये दोनों थे- हाशिम कुरैशी और अशरफ कुरैशी। रिश्ते में चचेरे भाई। बदन पर महंगे ओवरकोट और बाल ऐसे करीने से संवरे हुए, मानो किसी बड़े रईस खानदान के हों।
दोनों एक खास फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। उस फ्लाइट के पायलट प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी थे, जो उन दिनों इंडियन एयरलाइंस में नौकरी करते थे।
तब श्रीनगर एयरपोर्ट आज जैसा नहीं था। छोटा सा हवाई अड्डा था, भीड़ नाम मात्र की। दिनभर में इक्का-दुक्का विमान ही वहां से उड़ान भरते थे।
हाशिम और अशरफ भारी कदमों से काउंटर की तरफ बढ़े। वहां बैठे स्टाफ से हल्की-फुल्की बातचीत की। इसी दौरान स्टाफ से पूछ लिया- ‘भाई, अभी जो फ्लाइट जाने वाली है, उसे राजीव गांधी ही उड़ा रहे हैं ना?’
स्टाफ ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘नहीं, आज उनका शेड्यूल बदल गया है।’
इतना सुनते ही हाशिम ने झटके से अशरफ की तरफ देखा। अशरफ के चेहरे का रंग पीला पड़ गया था। हाशिम ने उसके कान में फुसफुसाया- ‘अब सोचने का टाइम नहीं है। राजीव गांधी नहीं तो… कोई और उड़ाएगा, पर हम यहां से वापस नहीं जाएंगे। जो भी फ्लाइट खड़ी है, उसी में बैठ जाते हैं।’
इंडियन एयरलाइंस के उस पुराने ‘गंगा’ विमान (फॉकर एफ-27) में सिर्फ दो ही सीटें बची थीं, वो भी बिल्कुल आखिरी कतार में। हाशिम ने फटाफट टिकट कटवाई और दोनों भाई रनवे की तरफ बढ़ चले।
उस विमान को श्रीनगर से जम्मू के लिए उड़ान भरनी थी। महज आधे घंटे का सफर था और आसमान भी बिल्कुल साफ। यात्री धीरे-धीरे विमान में चढ़ना शुरू कर चुके थे।
हाशिम और अशरफ रनवे पर ठिठक गए। दोनों कुछ देर तक थमकर विमान को देखते रहे। असल में वे पहली बार किसी हवाई जहाज को सामने से देख रहे थे।

इंडियन एयरलाइंस का फोकर एफ-27 फ्रेंडशिप विमान ‘गंगा’।
विमान में कुल 28 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स सवार थे। ठीक 11 बजकर 30 मिनट पर ‘गंगा’ ने रनवे पर रफ्तार पकड़ी और श्रीनगर की बर्फीली वादियों से होते हुए आसमान की तरफ रुख कर लिया।
केबिन के अंदर इंजन की गड़गड़ाहट गूंज रही थी। आखिरी कतार में बैठे हाशिम और अशरफ ने आंखें मूंद रखी थीं और बुदबुदाते हुए कुरान की आयतें पढ़ रहे थे।
दोनों की उम्र इतनी कम थी कि उनके चेहरे पर मूंछों की लकीर भी ठीक से उभरी नहीं थी। हाथों में इतना पसीना आ रहा था कि वे बार-बार उसे अपने पायजामे से पोंछ रहे थे।
तभी केबिन में एयरहोस्टेस की आवाज गूंजी- ‘देवियों और सज्जनों, हमारा विमान इस वक्त अपनी तय ऊंचाई पर उड़ रहा है। अगले 20 मिनटों में हम जम्मू हवाई अड्डे पर उतर जाएंगे। कृपया अपना सीट बेल्ट बांधे रखें।’
हाशिम और अशरफ ने एक-दूसरे को देखा। दोनों के होठों से धीमे से निकला- ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह…’ फिर एक दूसरे को आंखों से इशारा किया।
दोनों झट से अपनी-अपनी सीट बेल्ट खोली और तनकर खड़े हो गए। हाशिम ने फुर्ती से अपने ओवरकोट के भीतर हाथ डाला और एक चमचमाती हुई पिस्तौल निकाल ली। उसी वक्त अशरफ ने हैंड ग्रेनेड निकाल लिया।
हाशिम तेजी से विमान के गलियारे के बीचोबीच आया और जोर से चिल्लाया- ‘हाईजैक… हाईजैक। कोई अपनी जगह से हिलेगा नहीं। यह जहाज हमारे कब्जे में है।’
यात्रियों को लगा कि ये लड़के मजाक कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही उनकी नजर अशरफ की उंगली पर पड़ी, जो ग्रेनेड की पिन पर कसी हुई थी, केबिन में चीख-पुकार मच गई।
अशरफ ने गरजते हुए कहा- ‘खामोश! अगर किसी ने भी सीट बेल्ट खोलने की जुर्रत की, तो इस बम से जहाज को हवा में ही उड़ा दूंगा।’

पिस्तौल लेकर यात्रियों को धमकी देते हुए हाशिम और उसका भाई अशरफ। AI इमेज
अब हाशिम तेजी से आगे बढ़ा और कॉकपिट के दरवाजे पर एक जोरदार लात मारी। दरवाजा झटके से खुल गया। अंदर कैप्टन और को-पायलट बड़े इत्मीनान से सामने लगे इंस्ट्रूमेंट पैनल को देख रहे थे। हाशिम ने पीछे से जाकर पिस्तौल कैप्टन की कनपटी पर सटा दी।
‘जहाज का रुख बदलो।’ हाशिम ने गुस्से से कांपते हुए कहा।
कैप्टन ने बिना घबराए, ठंडे मिजाज से पूछा- ‘कहां ले जाना है?’ ‘इसे रावलपिंडी ले चलो… अभी के अभी।’ हाशिम ने हुक्म सुनाया।
कैप्टन ने सामने लगे फ्यूल गेज को देखा, जिसकी सुई तेजी से नीचे की तरफ गिर रही थी। उसने हाशिम की तरफ मुड़कर कहा- ‘भाई, इसमें इतना फ्यूल नहीं बचा है कि हम रावलपिंडी तक जा सके। पाकिस्तानी सरहद में घुसने से पहले ही यह क्रैश हो जाएगा। कोई भी जिंदा नहीं बचेगा।’
हाशिम बौखलाकर चीखा- ‘मुझे ना सुनने की आदत नहीं है।’
उसने पिस्तौल के ट्रिगर पर अपनी उंगली थोड़ी और कस दी- ‘मोड़ो इसे। मैं जैसा कह रहा हूं, वैसा करो, रावलपिंडी की तरफ मोड़ो।’
कैप्टन ने जवाब दिया- ‘हमारे पास सिर्फ 7 मिनट का फ्यूल और बचा है। अगर चंद मिनटों में यह प्लेन लैंड नहीं किया, तो हम सब खत्म हो जाएंगे। अब फैसला तुम्हारे हाथ में है।’
‘तो फिर मेरे सिर पर ही उतार दो इसे। यहीं सबसे पास है।’ हाशिम गुस्से में चिल्लाया।
कैप्टन ने दिमाग दौड़ाया और कहा- ‘तुम कहो, तो हम लाहौर उतर सकते हैं। यहां से नजदीक पड़ेगा।’
हाशिम पसीने से तरबतर हो चुका था। उसने गहरी सांस ली और बोला- ‘ठीक है… लाहौर ही ले चलो, लेकिन याद रखना, अगर कोई भी चालाकी की, तो पहली गोली तुम्हारे ही भेजे के पार होगी।’
कैप्टन ने उसकी तरफ देखा, पर कुछ कहा नहीं। प्लेन का रुख मोड़ दिया।
हाशिम घबराहट में बार-बार खिड़की से बाहर झांक रहा था। जैसे ही नीचे उसे किसी बड़े शहर सा दिखा, वह चौंक गया और पायलट को डांटते हुए कहा- ‘ये कहां ले जा रहे हो?’
पायलट ने पंजाबी में कहा- ‘मुंडया, गुस्सा ना कर। मैं तैनूं धोखा नहीं दित्ता। असीं लाहौर ही जा रहे आं।’

गंगा विमान के पायलट की कनपट्टी पर पिस्तौल ताने हुए हाशिम। AI इमेज
विमान आगे बढ़ता रहा। कुछ ही पलों के बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, यानी एटीसी को वायरलेस पर कोड वर्ड में मैसेज भेजा- ‘लाहौर, लाहौर…’
दूसरी तरफ से कड़कती हुई आवाज आई- ‘यह लाहौर नहीं है, अमृतसर है।’
यह सुनते ही हाशिम बौखला गया। उसने पायलट के गाल पर एक करारा थप्पड़ जड़ दिया। झटके से उसका माउथपीस भी छीन लिया।
अब पायलट ने विमान का रुख पाकिस्तानी सरहद की तरफ मोड़ दिया। जैसे ही ‘गंगा’ ने अपना रास्ता बदला, अमृतसर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम में सायरन बज उठा। रडार की स्क्रीन पर दिख रहा था कि विमान तय रास्ते से भटक चुका है।
अमृतसर एटीसी के अफसर ने रेडियो सेट हाथ में लिया और कहा- ‘गंगा, आप अपना रूट क्यों बदल रहे हैं? आप इंटरनेशनल बॉर्डर की तरफ बढ़ रहे हैं। फौरन जवाब दें।’
कैप्टन ने हाशिम की तरफ देखा और फिर रेडियो सेट का बटन दबाकर कहा- ‘अमृतसर एटीसी, हमारे कॉकपिट में दो हथियारबंद लड़के घुस आए हैं। विमान हाईजैक हो चुका है। ये हमें जबरन लाहौर ले जा रहे हैं।’
इस मैसेज के बाद अमृतसर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। सुरक्षा मुख्यालयों में फोन घनघनाने लगे। प्रधानमंत्री कार्यालय को तुरंत जानकारी दी गई।
कुछ ही मिनटों में विमान लाहौर के आसमान में चक्कर काटने लगा। कैप्टन की आवाज लाहौर एटीसी के रेडियो सेट पर गूंजी- ‘दिस इज एन इंडियन एयरप्लेन, फ्लाइट नेम एफ-27 गंगा। वी हैव बीन हाईजैक्ड। हमें फौरन इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत दें। फ्यूल खत्म हो चुका है, विमान क्रैश हो जाएगा।’
यह सुनते ही लाहौर एटीसी के अफसरों के हाथ-पैर फूल गए। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते उन दिनों खराब थे। पाकिस्तान, भारत के उत्तर-पूर्व में अलगाववादियों को भड़का रहा था। दूसरी तरफ भारत विद्रोह की आग में सुलग रहे पूर्वी पाकिस्तान से भागकर आ रहे शरणार्थियों से चिंतित था।
ऐसे माहौल में एक हिंदुस्तानी विमान का हाईजैक होकर पाकिस्तान में उतरना…एटीसी अफसर हैरान रह गए।

लाहौर एटीसी दफ्तर में परेशान पाकिस्तानी अधिकारी। AI इमेज
लाहौर एटीसी ने ‘गंगा’ को संदेश भेजा- ‘हम आपको यहां उतरने की इजाजत नहीं दे सकते। आपसे गुजारिश है कि फौरन हिंदुस्तानी सरहद में वापस लौट जाएं।’
कैप्टन ने बेबसी से जवाब दिया- ‘हमारे पास वापस मुड़ने का कोई रास्ता नहीं है। इंजन किसी भी पल बंद हो सकते हैं। अगर आपने रनवे नहीं खोला, तो यह विमान आपकी घनी आबादी वाले इलाके पर जा गिरेगा।’
अब लाहौर एटीसी के कंट्रोल रूम में खलबली मच गई। एटीसी अफसर ने हड़बड़ाकर अपने साथी से कहा- ‘या खुदा… यह तो सीधे शहर के ऊपर क्रैश होगा। इस्लामाबाद हॉटलाइन कनेक्ट करो। प्रेसिडेंट हाउस को फोन लगाओ, जल्दी।’
अफसर ने कांपते हाथों से हॉटलाइन का नंबर घुमाया।
उधर इस्लामाबाद के प्रेसिडेंट हाउस में पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल याह्या खान गहरी सोच में डूबे थे। मेज पर नक्शे फैले थे और पूर्वी पाकिस्तान में सुलग रही बगावत की खुफिया रिपोर्टें पड़ी थीं।
तभी हॉटलाइन फोन की घंटी बजी। एक अफसर ने लपककर फोन उठाया और याह्या खान की तरफ बढ़ा दिया।
दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘जनाब, कश्मीरी मुजाहिदों ने एक हिंदुस्तानी जहाज को अगवा कर लिया है। वह हमारे आसमान में मंडरा रहा है और उसका फ्यूल खत्म होने वाला है। कैप्टन का कहना है कि अगर लैंडिंग नहीं हुई, तो प्लेन लाहौर शहर के ऊपर ही तबाह हो जाएगा।’
याह्या खान के चेहरे के तेवर बदल गए। उन्होंने फौरन हुक्म सुनाया- ‘जहाज को उतरने की इजाजत दो। रनवे खाली कराओ! और हां… उन कश्मीरी भाइयों की खातिरदारी और खैरमकदम का पूरा बंदोबस्त होना चाहिए।’
ऐसा कहा जाता है कि याह्या खान मन ही मन सोच रहे थे- ‘हिंदुस्तान को पूरी दुनिया के सामने जलील करने और कश्मीर के मुद्दे को दोबारा हवा देने का यही मौका है।’
आखिरकार विमान को लाहौर एयरपोर्ट पर उतरने की इजाजत मिल गई। दोपहर के ठीक 1 बजकर 30 मिनट पर ‘गंगा’ रनवे पर उतरा। वहां का नजारा किसी फिल्मी सेट जैसा था। पुलिस ने विमान को चारों तरफ से घेर लिया। कैमरे ताने मीडिया वाले खड़े थे।

लाहौर एयरपोर्ट के रनवे पर पाकिस्तानी अफसर, पुलिस और मीडिया। AI इमेज
हाशिम ने कॉकपिट की खिड़की खोली और आधा बाहर लटकते हुए हवा में पिस्तौल लहराई। फिर नीचे खड़े अफसरों की तरफ देखकर चिल्लाया- ‘क्या यह वाकई लाहौर है?’
वहां खड़े लाहौर के एसपी अब्दुल वकील खान ने कहा- ‘जी हां, यह लाहौर ही है।’
‘मैं कैसे मान लूं कि आप सच बोल रहे हो?’ हाशिम को अब भी शक था।
एसपी और वहां मौजूद पुलिस वाले अपने-अपने सर्विस कार्ड दिखाने लगे। इस पर हाशिम जोर से हंसा और बोला- ‘अरे, मुझे क्या पागल समझा है? यह सब तो नकली भी बन सकता है।’
एसपी वकील खान ने मुस्कुराते हुए पूछा- ‘फिर कैसे यकीन मानोगे भाई कि यह लाहौर है? तुम ही बताओ।’
हाशिम ने अपना दिमाग दौड़ाया और कड़ककर बोला- ‘चलो, सब के सब कलमा पढ़कर सुनाओ।’
एसपी और पुलिस वालों ने एक सुर में कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। तब जाकर हाशिम को यकीन हो गया कि वह वाकई लाहौर आ चुका है।
उसने एक बार फिर हवा में पिस्तौल लहराई और पूरी ताकत से चिल्लाया- ‘हम कश्मीरी मुजाहिद्दीन हैं, कान खोलकर सुन ले दुनिया… जब तक हिंदुस्तानी हुकूमत अपनी जेलों में बंद हमारे 36 कश्मीरी कमांडो को रिहा नहीं करती, तब तक यह जहाज और इसमें बैठे लोग हमारे कब्जे में रहेंगे।’
उधर, दिल्ली में दोपहर बाद ऑल इंडिया रेडियो पर जैसे ही इस हाईजैकिंग की खबर फ्लैश हुई, देश में हड़कंप मच गया। लोग गुस्से में थे, लेकिन प्रधानमंत्री दफ्तर और भारत की खुफिया एजेंसी RAW के गलियारों में शांति थी।
अब तक दोपहर के 3 बज चुके थे। प्रधानमंत्री दफ्तर के एक बंद कमरे में हाई-प्रोफाइल मीटिंग शुरू हो चुकी थी। एक तरफ PM इंदिरा गांधी बैठी थीं और उनके सामने थे RAW के प्रमुख आरएन काव।
तभी कमरे का दरवाजा खुला। एक अफसर अंदर दाखिल हुआ। उसने RAW चीफ की तरफ रुख किया और कहा- ‘सर, हाईजैकर्स ने मांग की है कि भारत अपनी जेलों से उनके 36 साथियों को फौरन रिहा करे, वर्ना वे विमान को उड़ा देंगे।’
RAW प्रमुख ने प्रधानमंत्री की तरफ देखा। फिर पलटकर अफसर से कहा- ‘भारत किसी भी कीमत पर ब्लैकमेल नहीं होगा। जाइए बता दीजिए- हम किसी आतंकी को रिहा नहीं करेंगे।’

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और RAW चीफ रहे आरएन काव। AI इमेज
उस वक्त पाकिस्तान के कद्दावर नेता जुल्फिकार अली भुट्टो पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में थे। वे ढाका में शेख मुजीब-उर-रहमान के साथ बैठकर सत्ता के बंटवारे की गुत्थी सुलझाने में लगे थे। जैसे ही उन्हें हिंदुस्तानी विमान के हाईजैक होने की खबर मिली, वे बातचीत छोड़कर कमरे से बाहर निकल गए।
इधर, लाहौर एयरपोर्ट पर हुजूम उमड़ पड़ा था। पाकिस्तानी हुकूमत को लगा कि दुनिया की नजरों में खुद को रहमदिल दिखाने का इससे बेहतरीन मौका नहीं हो सकता। पाकिस्तानी अफसरों ने हाशिम से कहा- ‘भाई, कम से कम औरतों और बच्चों को तो छोड़ दो।’
हाशिम चिल्लाते हुए कहा- ‘हरगिज नहीं। पहले मेरी मुलाकात हमारे लीडर मकबूल भट्ट से करवाओ।’
कश्मीर में जन्मा मकबूल भट्ट अलगाववादी नेता था। वह पाकिस्तान में बैठकर ‘नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ के जरिए कश्मीर में उग्रवाद भड़काने में जुटा था।
अफसरों ने हाशिम से कहा- ‘मकबूल भट्ट इस वक्त लाहौर में नहीं हैं। आप उनके करीबी साथी डॉ. फारूक हैदर से बात कर सकते हैं।’
हाशिम ने थोड़ा सोचते हुए कहा- ‘ठीक है, कराओ उनसे मेरी बात।’
एक अफसर ने फोन लगाकर रिसीवर हाशिम की तरफ बढ़ा दिया। हाशिम ने कहा- ‘मैं ‘फिरोज’ बोल रहा हूं। हम ‘परिंदे’ लेकर आ चुके हैं। आप फौरन लाहौर आ जाइए।’
दरअसल, इस खुफिया मिशन में हाशिम का कोड नेम ‘फिरोज’ रखा गया था और जिस विमान को उन्होंने अगवा किया था, उस ऑपरेशन का कोड नेम था- ‘परिंदा’।
दूसरी तरफ से डॉ. फारूक हैदर ने हाशिम से क्या कहा पता नहीं, पर एक घंटे बाद उसने सभी यात्रियों को विमान से उतरने की इजाजत दे दी।

भारत का गंगा विमान जिसे 1971 में कश्मीरी लड़कों ने हाईजैक किया था।
शाम करीब 5 बजे सभी यात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित नीचे उतारा गया। उन्हें लाहौर के एक पांच सितारा होटल में ठहराया गया। वहां उनके सामने शाही पकवान परोसे गए। ताकि दुनिया को दिखाया जा सके कि पाकिस्तान कितना बड़ा मेहमाननवाज है।
हालांकि, हाईजैकर्स ने विमान नहीं छोड़ा। वे लगातार वहीं डटे रहे। दो दिन गुजर चुके थे। उनकी मांगों को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच शह-मात का खेल चलता रहा। भारत ने साफ कर दिया था कि वो आतंकियों को रिहा नहीं करेगा।
1 फरवरी 1971 की सुबह, जुल्फिकार अली भुट्टो एक खास विमान से लाहौर हवाई अड्डे पर उतरे। एयरपोर्ट के बाहर हजारों की तादाद में लोग जुटे थे। नारे गूंज रहे थे- ‘कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, हाशिम कुरैशी जिंदाबाद, अशरफ जिंदाबाद।’
लाहौर के बाजारों और सड़कों पर ईद जैसा माहौल था। मिठाइयां बांटी जा रही थीं, ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूम रहे थे। पाकिस्तानी जनता के लिए वे दोनों लड़के रातों-रात ‘नेशनल हीरो’ बन चुके थे।
भारी सुरक्षा घेरे के बीच, भुट्टो रनवे पर खड़े ‘गंगा’ विमान के नजदीक पहुंचे। हाशिम भी फुर्ती से नीचे उतर आया। भुट्टो ने बाहें फैलाईं और आगे बढ़कर हाशिम को गले से लगा लिया। कैमरों की फ्लैश लाइटें चमक उठीं और जल्द ही दोनों की यह तस्वीर पूरी दुनिया में फैल गई।
भुट्टो ने हाशिम की पीठ थपथपाई और बोले- ‘शाबाश मेरे भाइयों… आप दोनों तो शेर हो, शेर! दिल छोटा मत करना और बिल्कुल मत घबराना। हमारी पूरी हुकूमत आपके पीछे ढाल बनकर खड़ी है।’
हाशिम का चेहरा खिल उठा। उसने हवा में मुक्का ताना और पूरी ताकत से चिल्लाया- ‘पाकिस्तान जिंदाबाद, कश्मीर जिंदाबाद।’

हाईजैकर्स हाशिम से हाथ मिलाते हुए जुल्फिकार अली भुट्टो। इस घटना के 6 महीने बाद भुट्टो राष्ट्रपति बने थे।
इसी गहमा-गहमी के बीच, दो पाकिस्तानी अफसर चमचमाती क्रॉकरी और लजीज पकवानों से सजी एक ट्रॉली लेकर विमान के भीतर दाखिल हुए। उन्होंने बड़े ही अदब से हाशिम से कहा- ‘जनाब, आपके लिए लाहौर के सबसे नामी शेफ से यह खाना तैयार करवाया गया है। अगर कोई और खिदमत की जरूरत हो, तो हुक्म फरमाइएगा।’
हाशिम ने रईसी अंदाज में हवा में हाथ उठाया और खाना एक तरफ रखने का इशारा कर दिया। अफसर चुपचाप ट्रॉली टिकाकर नीचे उतर गए।
उसी रोज यानी 1 फरवरी की शाम सभी यात्री बसों में बैठकर हुसैनीवाला बॉर्डर पहुंचे। वहां से पाकिस्तान ने उन्हें भारत के हवाले कर दिया।
भारतीय यात्री तो सुरक्षित वतन लौट आए, लेकिन ‘गंगा’ अब भी लाहौर के रनवे पर खड़ा था।
अगले दिन यानी 2 फरवरी 1971 की शाम। पाकिस्तानी हुकूमत और उन दोनों लड़कों को लग रहा था कि उन्होंने बहुत बड़ी जंग जीत ली है।
हाशिम और अशरफ सीना तानकर विमान से नीचे उतरे। सामने पाकिस्तानी टीवी चैनल के कैमरे ऑन थे। तभी दोनों भाइयों ने पेट्रोल की बड़ी-बड़ी केन उठाईं और ‘गंगा’ विमान के भीतर पेट्रोल छिड़कना शुरू कर दिया। अब हाशिम ने जेब से माचिस निकाली और तीली सुलगाकर विमान की तरफ फेंक दिया।
विमान जल उठा। कुछ देर बाद जोरदार धमाका हुआ। देखते ही देखते लाहौर का आसमान धुएं के गुबार से पट गया। रनवे पर खड़े पाकिस्तानी अफसर और वहां मौजूद लोग तालियां बजा रहे थे। जोर-जोर से नारे लगा रहे थे।
इधर नई दिल्ली में, सरकार की निगाहें पल-पल की खबरों पर टिकी थीं। जैसे ही लाहौर के रनवे पर ‘गंगा’ की राख ठंडी हुई, RAW प्रमुख काव ने प्रधानमंत्री को फोन किया- ‘मैडम, लाहौर से खबर आ गई है। उन लड़कों ने ‘गंगा’ को आग के हवाले कर दिया है। हमारा विमान पूरी तरह जल चुका है।’
फोन के दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘काव साहब, मुबारक हो। अब हमारा असली मिशन शुरू होता है।’
भारत के विमान जलने पर पीएम इंदिरा गांधी और RAW चीफ खुश क्यों थे…? पूरी कहानी कल यानी रविवार को पढ़िए और देखिए ऑपरेशन गंगा पार्ट-2…

भारत का विमान गंगा जिसे हाईजैकर्स ने लाहौर एयरपोर्ट पर पेट्रोल डालकर जला दिया था। तस्वीर 3 फरवरी 1971 की है।
नोट : कहानी को किस्सेनुमा बनाने के लिए कुछ सीन रूपांतरित किए गए हैं।
रेफरेंस :
1. Mission R&AW : By R.K. Yadav 2. The Kaoboys of R&AW : By B. Raman 3. The War that Made R&AW : By Anusha Nandakumar and Sandeep Saket 4. India, Pakistan and the Secret Jihad : By Praveen Swami
