4 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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“आज पेट ठीक नहीं लग रहा।”
“कुछ भी खाता हूं तो गैस बन जाती है।”
हमने अपने आसपास के कई लोगों को अक्सर ऐसा कहते हुए सुना होगा। कई बार इसकी वजह बिगड़ती गट हेल्थ होती है। हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें ‘गट माइक्रोबायोम’ कहते हैं।
ये सूक्ष्मजीव भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को शरीर तक पहुंचाने, इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने और शरीर के कई जरूरी कामों में अहम भूमिका निभाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हमारी लगभग 70% इम्यूनिटी का संबंध आंतों से है।
हमारी रोज की थाली का गट हेल्थ पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह आंतों में रहने वाले इन सूक्ष्मजीवों को भी प्रभावित करता है। कुछ फूड्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाते हैं। वहीं कुछ फूड्स इनका संतुलन बिगाड़ सकते हैं। इससे पाचन संबंधी कई समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पेट के लिए 10 बेस्ट और वर्स्ट फूड की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- पेट को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?
- कौन-सी आदतें गट हेल्थ को खराब करती हैं?
एक्सपर्ट- डॉ. हर्ष कपूर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, मेट्रो इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेप्टोलॉजी, नोएडा
सवाल- पेट की सेहत (गट हेल्थ) दुरुस्त रहने का क्या मतलब है?
जवाब- इसका मतलब डाइजेस्टिव सिस्टम के सही तरीके से काम करने और आंतों में मौजूद गट माइक्रोबायोम के संतुलन से है। इसके संतुलन से-
- भोजन का पाचन बेहतर होता है।
- शरीर पोषक तत्वों को सही ढंग से अवशोषित कर पाता है।
- इम्यूनिटी मजबूत बनी रहती है।

सवाल- कैसे पता चलता है कि पेट की सेहत खराब हो रही है?
जवाब- जब आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है तो खाना पचाने और शरीर में पोषक तत्वों को पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ग्राफिक में खराब गट हेल्थ के शुरुआती संकेत देखिए-

सवाल- लंबे समय तक लगातार पेट खराब रहे तो इससे क्या नुकसान होता है?
जवाब- लंबे समय तक पेट खराब रहने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे कमजोरी बढ़ सकती है और इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है। ग्राफिक में सभी नुकसान देखिए-

सवाल- पेट दुरुस्त रखने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब- आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को वैराइटी पसंद होती है। इसलिए रोज अलग-अलग तरह के फल-सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर रिच फूड खाने चाहिए। छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें लंबे समय में गट हेल्थ को मजबूत बनाती हैं।

सवाल- कौन-से फूड्स पेट में गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं?
जवाब- दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड्स अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि फल-सब्जियां, दालें और साबुत अनाज उन्हें पोषण देते हैं। इसलिए गट हेल्थ बेहतर रखने के लिए रोज अलग-अलग तरह की पौष्टिक चीजें खाना जरूरी है। ग्राफिक में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने वाले फूड्स की लिस्ट देखिए-

सवाल- कौन-से फूड्स गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं?
जवाब- कुछ फूड्स गुड और बैड बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। खासकर ऐसे फूड्स, जिनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, एक्स्ट्रा शुगर, अनहेल्दी फैट और आर्टिफिशियल एडिटिव्स ज्यादा होते हैं। इन फूड्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- चीनी गुड बैक्टीरिया को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
जवाब- डाइट में चीनी की मात्रा ज्यादा होने से आंतों में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है। इससे कुछ बैड बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जबकि गुड बैक्टीरिया की संख्या घट सकती है।
समय के साथ यह बदलाव गट बैरियर को कमजोर करता है और शरीर में सूजन बढ़ा सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक ज्यादा चीनी खाने से गट हेल्थ खराब होती है।
सवाल- क्या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से पेट के गुड बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारने के लिए बनाई जाती हैं। लेकिन वे हमेशा गुड और बैड बैक्टीरिया में फर्क नहीं कर पातीं।
- बार-बार या बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने पर गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया की संख्या और वैराइटी दोनों कम हो सकती है।
- इसलिए एंटीबायोटिक्स हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
सवाल- क्या पेट के बैक्टीरिया हमारी भूख और क्रेविंग्स को कंट्रोल कर सकते हैं?
जवाब- हां, गट माइक्रोबायोम भूख और फूड चॉइस को प्रभावित कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिए-
- आंतों में मौजूद बैक्टीरिया ऐसे केमिकल और सिग्नल बनाते हैं, जो गट और ब्रेन के बीच कम्युनिकेशन में भूमिका निभाते हैं।
- ये सिग्नल सटाइटी (पेट भरने का एहसास), भूख और कुछ खास चीजें खाने की इच्छा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि क्रेविंग्स सिर्फ गट बैक्टीरिया से तय नहीं होतीं।
- इसमें आदतें, नींद, हार्मोन और आसपास का माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सवाल- क्या स्ट्रेस भी गट हेल्थ को प्रभावित करता है?
जवाब- हां, स्ट्रेस और गट हेल्थ का दो-तरफा रिलेशन है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- हमारा ब्रेन और आंतें लगातार एक-दूसरे को सिग्नल भेजते हैं। इसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ कहा जाता है।
- जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं।
- ये हार्मोन आंतों के सामान्य कामकाज और वहां मौजूद सूक्ष्मजीवों के वातावरण को प्रभावित करते हैं।
- यही वजह है कि मानसिक तनाव का असर अक्सर पेट पर भी दिखाई देता है।
सवाल- फूड के अलावा कौन-सी आदतें गट हेल्थ को खराब करती हैं?
जवाब- हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी गट माइक्रोबायोम के संतुलन को प्रभावित करती हैं। खासकर-
- खराब नींद
- लगातार स्ट्रेस
- फिजिकल इनएक्टिविटी
यही वजह है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है।
सवाल- पेट को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?
जवाब- आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया एक नियमित दिनचर्या पसंद करते हैं। इसलिए खाने, सोने और एक्सरसाइज का समय जितना रेगुलर होगा, गट उतना बेहतर काम करेगा। ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें-

सवाल- कब गट से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
जवाब- गैस, कब्ज या पेट खराब होने जैसी समस्याएं कभी-कभी होना सामान्य है। लेकिन अगर ये शिकायतें लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार लौटकर आएं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा-
- स्टूल में ब्लड दिखाई दे।
- वजन तेजी से घटे।
- पेट में लगातार दर्द रहे।
- बार-बार उल्टी हो।
- निगलने में परेशानी हो।
- लगातार ब्लोटिंग या पेट फूलने की समस्या हो।
- डेली रूटी प्रभावित होने लगे।
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
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