नई दिल्ली14 मिनट पहले
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ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और एनर्जी शॉक के जोखिम को बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल के महंगे होने से भारत की ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के रिटेल फ्यूल मार्जिन पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे डीजल पर कंपनियों को प्रति लीटर 20.4 रुपए का घाटा हो रहा है।
हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन में भारी उछाल के कारण कंपनियों का ओवरऑल मुनाफा फिलहाल संभला हुआ है।
1. ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, एक हफ्ते में 16% उछला
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.69 डॉलर (3.05%) बढ़कर 90.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 11 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। बीते एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 16% की तेजी आई है, जो अप्रैल के बाद किसी एक हफ्ते की सबसे बड़ी बढ़त है।
अभी ब्रेंट क्रूड 88.43 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं इंडियन क्रूड बास्केट 81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
2. एक्सपर्ट्स बोले- भारत पर एनर्जी शॉक और रुपए का खतरा
जीओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि मार्केट के सामने अभी नियर-टर्म में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर के पार जाना है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भारत में एनर्जी शॉक का खतरा फिर उभरेगा।
इसका सीधा नकारात्मक असर रुपए की चाल और FPI फ्लो पर पड़ सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक स्तर पर ‘महंगाई की चिंताएं’ फिर से उभर आई हैं।
3. अमेरिका में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें: रेट हाइक की संभावना 52%
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, क्लीवलैंड फेड अध्यक्ष के बयान के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2026 की मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है।
- फेड रेट हाइक की संभावना: सितंबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 16 जुलाई 2026 के 47% से बढ़कर अब 52.4% हो गई है।
- US इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन: अमेरिका में मई 2026 के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में महीने-दर-महीने आधार पर 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज हुई है।
- करेंसी मार्केट पर असर: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रिटिश पाउंड में सबसे ज्यादा गिरावट आई। वहीं रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं की तर्ज पर कमजोर हुआ है।
4. अमेरिकी शेयर बाजारों में हलचल, 2000 अंक के उछाल पर ब्रेक
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील ने बताया कि अमेरिकी बाजारों में इस हफ्ते भारी अस्थिरता देखने को मिली है। देवर्ष वकील के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष में नए हमलों, टेक सेक्टर में रोटेशन और महंगाई के आंकड़ों ने प्रमुख इंडेक्स को नीचे खींच दिया, जिससे मिड-समर की बढ़त का सिलसिला टूट गया।
वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच नए हमले हुए हैं। ईरान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सीजफायर पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिससे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्गों में सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ गया है।
5. तेल कंपनियों का पेट्रोल मार्जिन गिरा, डीजल पर प्रति लीटर ₹20 का घाटा
इक्किरिटी सिक्योरिटीज की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में उछाल से भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों- BPCL, HPCL, IOCL का फ्यूल रिटेलिंग मार्जिन काफी कम हो गया है।
- पेट्रोल मार्जिन: पेट्रोल का मार्केटिंग मार्जिन हफ्ते-दर-हफ्ते 42.1% गिरकर 4.5 रुपए प्रति लीटर रह गया है।
- डीजल मार्जिन: डीजल का मार्जिन भी गिरा है। पिछले हफ्ते -15.4 रुपए प्रति लीटर की तुलना में अब कंपनियों को प्रति लीटर -20.4 रुपए का घाटा हो रहा।
6. रिफाइनिंग स्प्रेड में उछाल: डीजल क्रैक 99% बढ़कर सपोर्ट दे रहा
रिटेल मार्जिन में नुकसान के बावजूद तेल कंपनियों के रिफाइनिंग कारोबार में जोरदार सुधार आया है, जिससे कंपनियों की कुल इंटीग्रेटेड प्रॉफिटेबिलिटी बची हुई है।
- गैसोलीन (पेट्रोल) क्रैक स्प्रेड: 15.8% बढ़कर 27.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो 1 साल के औसत से 69% ज्यादा है।
- गैसऑयल (डीजल) क्रैक स्प्रेड: 12.5% बढ़कर 65.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो 1 साल के औसत से 99% ज्यादा है।
- रूसी एक्सपोर्ट बैन: रूस द्वारा डीजल निर्यात पर लगाए प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के तनाव से ग्लोबल मार्केट में रिफाइंड प्रोडक्ट्स की तंग सप्लाई बनी हुई है।
7. 1-2 तिमाही तक रिफाइनर्स को मिल सकती है राहत
- इक्किरिटी सिक्योरिटीज के अनुसार, भले ही रिटेल फ्यूल मार्जिन कमजोर हुआ हो, लेकिन रिफाइनिंग और मार्केटिंग के 1:1 के संयुक्त मार्जिन अभी भी ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर हैं।
- पेट्रोल का इंटीग्रेटेड मार्जिन 4.3% घटकर 21.0 रुपए/लीटर और डीजल का 2.5% घटकर 19.1 रुपए/लीटर पर आ गया है। हालांकि, यह 3 महीने के औसत से क्रमश: 58.7% और 34.6% अधिक है।
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 1 से 2 तिमाहियों तक मजबूत डीजल क्रैक कंपनियों की कमाई को सपोर्ट देंगे। रिफाइनरी का इस्तेमाल बढ़ने और इन्वेंट्री रीबिल्ड होने के बाद ये असाधारण मार्जिन सामान्य हो जाएंगे।
क्या होते हैं ‘क्रैक स्प्रेड्स’ और ‘इंटीग्रेटेड मार्जिन’?
क्रैक स्प्रेड: कच्चे तेल की कीमत और उससे बनने वाले रिफाइंड प्रोडक्ट्स (जैसे पेट्रोल, डीजल, एटीएफ) के बाजार मूल्य के बीच का अंतर ही ‘क्रैक स्प्रेड’ कहलाता है। यह रिफाइनिंग कंपनियों के मुनाफे को दर्शाता है।
इंटीग्रेटेड मार्जिन: जब किसी तेल कंपनी के रिफाइनिंग मार्जिन (कच्चा तेल प्रोसेस करने का मुनाफा) और मार्केटिंग मार्जिन (पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल बेचने का फायदा/नुकसान) दोनों को 1:1 के अनुपात में मिलाकर देखा जाता है, तो उसे इंटीग्रेटेड मार्जिन कहते हैं।
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