नई दिल्ली3 मिनट पहले
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दशकों तक भारत की प्रभावशाली महिलाओं की सूची में बिजनेस घरानों की वारिस, प्रमोटर परिवारों और कॉर्पोरेट जगत की दिग्गज हस्तियों का दबदबा रहा। लेकिन अब प्रभाव और सफलता कारोबारी घरानों की विरासत तक सीमित नहीं है।
आंत्रप्रेन्योर, स्टार्टअप फाउंडर, पेशेवर सीईओ से लेकर ओलिंपिक पदक विजेता, पत्रकार, लेखिका, डिजिटल क्रिएटर और एक्टिविस्ट भी इसमें शामिल हैं।
2026 की कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट में इस साल 12 कैटेगिरी में 117 महिलाएं शामिल की गई हैं। साल 2025 में इस लिस्ट में नौ कैटेगरीज में 97 महिलाएं शामिल थीं। मौजूदा लिस्ट में शामिल महिलाएं कुल 39 लाख करोड़ रुपए की वेल्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं।

एथलीट्स, पत्रकार, लेखिका भी
लिस्ट में किरण शॉ, रोशनी नाडार, फाल्गुनी नायर, निसाबा गोदरेज, प्रिया नायर जैसे बिजनेस लीडर; पीवी सिंधु, मनु भाकर, मैरी कॉम, मीराबाई चानू जैसी एथलीटों के साथ पत्रकार फेय डिसूजा, बरखा दत्त और पालकी शर्मा, लेखिका सुधा मूर्ति, ट्विंकल खन्ना और उद्यमी अनन्या बिड़ला भी हैं।
बड़ी बात यह है कि 84% यानी 98 महिलाएं सेल्फ-मेड हैं, जबकि 19 महिलाएं पारिवारिक विरासत के सहारे यहां पहुंची हैं। सूची में सबसे कम उम्र की 19 वर्षीय पैरा-आर्चर शीतल देवी से लेकर सबसे बुजुर्ग 86 वर्षीय आंत्रप्रेन्योर रजनी बेक्टर भी शामिल हैं।

प्रभाव सिर्फ बैलेंस शीट से नहीं
इस लिस्ट में प्रभाव को बैलेंस शीट से ही नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा, सार्वजनिक भागीदारी, इनोवेशन और सामाजिक प्रभाव से भी मापा गया है। यही वजह है कि 20 ओलिंपिक और पैरालिंपिक पदक विजेता इसमें सबसे बड़ी कैटेगरी बनाते हैं। इनमें से भी 60% पैरा-एथलीट्स हैं।
खुद अपनी मेहनत से सफलता हासिल की
हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा- इन महिलाओं में से 98 ने खुद अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है, जो खानदानी रईस महिलाओं से पांच गुना से भी अधिक है।
यह अनुपात हमें बताता है कि भारत में नेतृत्व अब विरासत में मिलने के बजाय अर्जित किया जा रहा है।

