नाबालिग से रेप के आरोपी की फर्जी जमानत। वो भी ऐसे आदमी के नाम से जिसकी एक साल पहले मौत हो चुकी थी।
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जयपुर में फर्जी जमानत का बड़ा रैकेट चल रहा है। रेप हो, चोरी…या फिर कोई और केस 3 से 5 हजार रुपए में फर्जी जमानत। झूठी गवाही की फीस 5 से 8 हजार रुपए।
कोर्ट में पार्किंग और चाय की थड़ियों पर ये फर्जी जमानती और झूठे गवाह मिल जाएंगे ग्राहक तलाशते हुए…फर्जी डॉक्यूमेंट्स के साथ।
हाल ही में फर्जी जमानत के कई केस सामने आए थे। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर ने पीड़ित बनकर जयपुर सेशन कोर्ट परिसर में इन्वेस्टिगेट किया तो ये सच सामने आया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

दलाल बोला- जमानत करा दूंगा, 8 हजार लगेंगे
भास्कर टीम 22 जुलाई को दोपहर में सेशन कोर्ट पहुंची। टीम के पास जमानत कराने वाले कुछ दलालों के कॉन्टैक्ट नंबर थे। सबसे पहले 8824****02 नंबर पर सत्यनारायण नाम के आदमी को कॉल किया।
रिपोर्टर ने बताया- ‘मैं जोधपुर से आया हूं। कोर्ट के बाहर चायवाले ने नंबर दिया। स्कॉर्पियो चोरी के मामले में बेटा 12 दिन से जेल में बंद है। जमानत करानी है।’
सत्यनारायण ने कहा- वह बाहर है और फोन काट दिया। कुछ देर बाद दोबारा कॉल किया और बोला-एक-दो लोगों को बोल कर जमानत करा देगा।
कुछ देर के बाद एक महिला ने फोन कर केस डिटेल मांगी। इसके बाद सत्यनारायण ने फोन किया और सुबह आने के लिए कहा। बोला- कल सारा काम करा दूंगा। आठ हजार रुपए लगेंगे।
(इस दौरान रिपोर्टर ने दो-तीन दूसरे दलालों को भी कॉल किया। कुछ ने बाहर होने की बात कहीं तो कुछ ने जमानत देने से मना कर दिया।)

चायवाले पप्पू ने एक जमानती को फोन करके बुलाया। इस काम के 100 रुपए लिए।
चाय वाला बोला- मैंने भी बहुत जमानत दी है, अब नहीं देता
भास्कर टीम सेशन कोर्ट में गेट नंबर एक पर चाय की दुकान पर पहुंची। चाय वाले पप्पू को बताया- ‘बेटा स्कॉर्पियो चोरी में पकड़ा गया। जमानत करानी है।’
चाय वाला बोला- ‘कल सुबह 10 बजे आ जाना। बहुत मिल जाएंगे। रुपए नकद लाना। कोई ऑनलाइन नहीं लेगा। मैंने भी पहले बहुत जमानत दे रखी है। अब नहीं देता हूं।’
इसके बाद चाय वाले ने एक युवक को कॉल कर बुलाया। चाय वाले ने जमानती बताने के लिए रिपोर्टर से 100 रुपए लिए।

चायवाले के कॉल करने पर सोनू वहां आया। जमानत के 3 हजार रुपए बताए।
थोड़ी देर बाद युवक आ गया। सोनू नाम के युवक ने जमानत के 3 हजार बताए। 1 हजार एडवांस मांगे। युवक भास्कर टीम को अंदर पार्किंग के पास ले आया। वहां एक व्यक्ति बैठा था।
उसके पास पहले से रिपोर्टर की डिटेल थी। उसने पार्किंग में खड़े भरतलाल से डॉक्यूमेंट और फोटो ली। रिपोर्टर से बोला- फॉर्म वकील से भरा लेना। कल सुबह कोर्ट में पेश होकर बोल देंगे।
कोर्ट से निकलने के बाद उसका फोन आया। बोला- वकील से बात हो गई है। पेपर में परेशानी हो तो बता देना। दूसरे दे देंगे। रिपोर्टर ने कहा- ऐसा दो, जिसका अंदर रिकॉर्ड नहीं हो। वो बोला- पहले वकील से पूछ लो, चल जाएगा या नहीं? हमने बहाना बनाकर सुबह आने के लिए बोला।

सोनू ने भरतलाल से डॉक्यूमेंट और फोटो लिए।
डॉक्यूमेंट देकर बोला : आदमी होशियार है, कोर्ट में अपने आप बोल देगा
हम वापस तीन नंबर गेट पर आ गए। तभी सत्यनारायण का कॉल आया- ‘सुबह जमानत दिलाने आ जाऊंगा और किसी से बात मत करना।’ इसके बाद शाम तक उसके कई कॉल आए।
23 जुलाई की सुबह ही उसने कॉल कर दिया। रिपोर्टर सुबह 11 बजे कोर्ट पहुंचा। तब तक 5 कॉल कर चुका था। रिपोर्टर ने गेट पर पहुंचकर सत्यनारायण को कॉल किया। वह पांच मिनट में आ गया। फोटो और डॉक्यूमेंट दिखाए।
रिपोर्टर ने कहा- ‘ज्यादा मांग रहे हो। पुलिस ने झूठा फंसाया है। हमें तो बस जमानत करानी है।’
सत्यनारायण बोला- ‘डीजे कोर्ट एक लाख वसूल करती है। कोई अपनी प्रॉपर्टी नहीं फंसाएगा। मेरा रोज का काम है। ये आदमी पहले से होशियार है। कोर्ट में अपने आप बोल देगा। समझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।’
सत्यनारायण ने बताया कि उसे कोर्ट में 20 साल हो गए। बेटे की डेथ हो गई है। उसने वकील का नाम पूछा तो रिपोर्टर ने ऐसे ही अनिल नाम बोल दिया।
सत्यनारायण ने करीब 30 मिनट बाद वकील को लेकर जानकारी मांगी। रिपोर्टर ने ये कहकर टाल दिया कि अभी वकील दूसरे केस में गए हैं। उसने 8 से 10 कॉल किए।
आखिर में रिपोर्टर ने कहा कि तुम्हारा वाला जमानती ज्यादा पैसे मांग रहा है। दूसरे दलाल से 3 हजार रुपए में डील हो गई और जमानत भी हो गई है। नाराज होकर उसने फोन काट दिया।
बैंक में गिरवी रखी प्रॉपर्टी के सौंपे पेपर : दलाल सत्यनारायण ने अब्दुल मुगनी के नाम का आधार कार्ड, जमाबंदी की फोटो कॉपी दी थी। रिपोर्टर ने इन दस्तावेजों को चेक कराया तो पता चला कि जमीन की जमाबंदी पर पंजाब नेशनल बैंक से लोन ले रखा है। नियमानुसार जमानत में ये पेपर इस्तेमाल नहीं कर सकते, क्योंकि लोन क्लीयर नहीं होने तक इन पर बैंक का अधिकार होता है।

सत्यनारायण ने जो जमाबंदी थी, वो पेपर जमानत में इस्तेमाल नहीं कर सकते, क्योंकि लोन के कारण इन पर बैंक का अधिकार होता है।
कलेक्ट्रेट पार्क:रेप केस में फर्जी गवाह, जो बोलोगे, बयान दे देंगे
दो दिन सेशन कोर्ट में घूमने के कारण कई लोगों को शक हो चुका था। ऐसे में भास्कर टीम कलेक्ट्रेट पहुंची। वहां भगवान बैरवा को 8690****59 नंबर पर कॉल किया और कलेक्ट्रेट के पार्क में बात करने के लिए बुलाया।
उसने पूछा कि मोबाइल नंबर किसने दिए। रिपोर्टर ने चाय वाले का नाम लिया तो 5 मिनट में पार्क में आ गया। रिपोर्टर ने उसे रेप केस में गवाही देने की बात कहीं।
वो राजी हो गया। बोला- एक के 3000 रुपए लगेंगे। जमानत–गवाह के अलग-अलग लगेंगे। उसने अपना आधार कार्ड निकाल कर दिखा दिया। बोला- रुपए दे दो, अभी डॉक्यूमेंट दे दूंगा।
हमने कहा- जमानत हो चुकी है। वो नहीं माना। बोला- तुम्हारे वकील से बात कराओ। नया है क्या वो? मैं इतने सालों से काम कर रहा हूं। पहले जमानत होगी फिर ट्रायल शुरू होगा। हमने कहा जमानत हो गई है। एक महिला की झूठी गवाही देने की बात कहीं तो मान गया।
भगवान बैरवा ने बिना रुपए के डॉक्यूमेंट नहीं दिए। बोला- ‘सुबह आ जाना, मैं भी कोर्ट आकर जो बोलोगे बयान दे दूंगा।’ इसके बाद दो बार उसने कॉल कर गवाही देने की बात कही।

दलाल बिना मिले पार्क से लौटा, बोला गवाही में रिस्क
पार्क में ही हमने एक दलाल नंदकिशोर को कॉल किया। रेप केस में गवाही देने की बात कही तो तुरंत मान गया। वह पार्क में अपने एक साथी के साथ आया। दूर से ही हम पर नजर रखने लगा।
हमने उसे कॉल किया- ‘रेप केस में झूठी गवाही देनी है। आप बोल देना- लड़की ने झूठे आरोप लगाए हैं, उस समय आप वहीं थे।’
नंदकिशोर बोला- ‘गवाही में रिस्क ज्यादा होती है। पैसे भी ज्यादा लगेंगे।’ हमने रुपयों की चिंता नहीं करने की बात कहीं। पहले उसने कहा कि वह मिलने आ रहा है, लेकिन बाद में उसे शक हो गया और बिना मिले चुपचाप चला गया। उसने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया।

3 केस से समझिए, कितना बड़ा है फर्जी जमानती और झूठे गवाहों का रैकेट
केस 1 : नाबालिग से रेप के आरोपी की मृतक के नाम से कराई फर्जी जमानत
जयपुर में नाबालिग से रेप के मामले में आरोपी अमित कुमार के फर्जी दस्तावेजों से ऐसे आदमी के नाम से जमानत करा दी गई, जो मर चुका था। जमानत के बाद आरोपी फरार हो गया। आरोपी अमित पेशी पर नहीं आया तो कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
एएसआई दिनेश मीना ने बताया कि आरोपी के नहीं आने पर कोर्ट ने जमानत देने वाले मोती सिंह के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि मोती सिंह की तो लंबी बीमारी से एक साल पहले मौत चुकी है। परिवार ने डेथ सर्टिफिकेट भी दिखाया।
पुलिस ने जांच की तो पता चला कि नंदसिंह नाम के व्यक्ति ने ही मोती सिंह बनकर कोर्ट में रेप के आरोपी अमित की फर्जी जमानत दी थी। उसके नाम का आधार कार्ड और प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी लगाए थे।
नंदसिंह ने बताया कि पहले वह ऑटो चलाता था। ऑटो का एक्सीडेंट होने पर परिचित मुनव्वर के कहने पर फर्जी जमानत देने लगा। 4 साल से वह फर्जी जमानतें दे रहा था।
केस 2 : फर्जी दस्तावेज बनाकर दिलाते जमानत
एडवोकेट जयप्रकाश ने जयपुर सदर थाने में फर्जी दस्तावेज बना कर जमानत देने का मामला दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि वे एक फोटो स्टेट की दुकान पर गए। वहां रामगोपाल नाम के व्यक्ति के पास सुभाष के नाम से हैसियत प्रमाण पत्र था। जिसमें उनके पुश्तैनी मकान का पता था।
पुलिस को रामगोपाल के पास कई लोगों के नाम से फर्जी दस्तावेज मिले थे। उससे भरतसिंह के बारे में पता लगा। भरत और राजेंद्र दोनों फर्जी दस्तावेज बना कर जमानत दिलाने का काम करते थे।
केस 3 : 40 से ज्यादा फर्जी जमानत देने वालों के आए थे नाम सामने
एडवोकेट मिनार्क जैन ने दो एफआईआर जयपुर सदर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने सेशन कोर्ट में फर्जी जमानत गिरोह एक्टिव होने के सबूत दिए थे। 40 से ज्यादा फर्जी जमानत देने वालों के नाम-मोबाइल नंबर पुलिस को सौंपे।





सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जमानत को लेकर सख्त नियम लागू हों
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में NDPS के एक मामले में विदेशी नागरिक की जमानत रद्द कर दी है। क्योंकि जमानत देने वाले फर्जी पाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संगीन अपराधों में फंसे विदेशी नागरिकों को छुड़ाने के लिए फर्जी जमानतदारों का एक गिरोह एक्टिव है। जमानत की प्रक्रिया और सत्यापन तंत्र की पूरी जांच होनी चाहिए। इसे डिजिटल पहचान प्रणाली से जोड़ना चाहिए। जमानत को लेकर सख्ती से नियमों का पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई फर्जी कागजात पर जमानत न ले सके।

ग्राफिक्स : भाविक जैन
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