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जयपुर ईस्ट पुलिस ने जवाहर सर्किल थाना क्षेत्र में घर में घुसकर परिवार को बंधक बनाकर नकदी और ज्वेलरी लूटने वाली गैंग का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों को उत्तर प्रदेश-नेपाल बॉर्डर क्षेत्र से दबोचा है। वारदात में इस
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डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया कि तकनीकी सबूतों और लगातार निगरानी के बाद लूट की वारदात में सहयोग करने और रेकी करने वाले तीन आरोपियों को बहराइच, उत्तर प्रदेश-नेपाल बॉर्डर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सतवीर सिंह (28) निवासी गांव टेंडवा, बसंतापुर, थाना देहात कोतवाली, बहराइच, उत्तर प्रदेश, मनबहादुर (20) निवासी निबिया, तहसील नानपारा, थाना रुपईडीहा, जिला बहराइच, उत्तर प्रदेश और प्रदीप कुमार यादव (24) निवासी गांव तिगड़ा, थाना रुपईडीहा, जिला बहराइच, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
गैंग के सदस्य वारदात से करीब 15 से 20 दिन पहले संभावित घर की रेकी करते थे। घरेलू काम की तलाश या अन्य बहाने से मकान में प्रवेश कर परिवार और घर की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाती थी। इसके बाद मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया जाता था।
300 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले
जवाहर सर्किल थाना क्षेत्र निवासी आशीष गुप्ता ने 29 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया था कि सुबह करीब 4 बजे तीन बदमाश घर में घुसे और उनके बेटे राघव गुप्ता को बंधक बनाकर करीब 5 लाख रुपये नकद, दो घड़ियां और सोने-हीरे की अंगूठियां, ब्रेसलेट, पेंडल, सोने की गिन्नियां तथा चांदी के सिक्के सहित अन्य सामान लूटकर फरार हो गए थे।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चार टीमें गठित की। टीमों ने घटना स्थल और आरोपियों के आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों और आरोपियों की आवाजाही की जानकारी जुटाई गई।
पुलिस टीमों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुरादाबाद, बहराइच, रुपईडीहा और नेपाल बॉर्डर सहित कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। करीब 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची।
नेपाल बॉर्डर से स्थानीय लोगों को बनाते थे मददगार
जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्य नेपाल-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर स्थानीय लोगों से संपर्क कर उन्हें लालच देकर लूट की वारदातों में शामिल करते थे। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में जाकर वारदातों को अंजाम दिया जाता था।
गैंग के सदस्य अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे और जिन स्थानों पर ठहरते थे, वहां भी फर्जी नाम-पते दर्ज करवाते थे।
5 से 7 लोग मिलकर देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार गैंग की वारदात में सामान्यतः 5 से 7 लोग शामिल होते थे। इनमें रेकी करने वाले, वारदात को अंजाम देने वाले और सहयोग करने वाले सदस्य अलग-अलग भूमिका निभाते थे। वारदात के तुरंत बाद आरोपी अलग-अलग साधनों से मौके से फरार हो जाते थे।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटे गए माल की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
