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झज्जर ADJ कोर्ट ने दी राहत, साढ़े सात लाख रुपए के विवादित बिल रद्द करने का फैसला बरकरार।
झज्जर में मछली पालन के लिए लिए गए बिजली कनेक्शन पर कमर्शियल दरों से लाखों रुपए के बिल जारी करने के मामले में झज्जर की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) अदालत ने उपभोक्ता रोहित को राहत दी है। अदालत ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) की अपील खारिज क
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लोड बढ़वाया तो कमर्शियल श्रेणी में डाल दिया
बहादुरगढ़ के गांव लाडरावन निवासी रोहित ने वर्ष 2016 में मछली पालन के लिए 19 कनाल 10 मरला जमीन पांच साल के लिए लीज पर ली थी। इसके बाद उन्होंने 19.6 किलोवाट का बिजली कनेक्शन कृषि श्रेणी में लिया। जिला मत्स्य अधिकारी की सिफारिश पर निगम ने यह कनेक्शन जारी किया था।
अगस्त 2017 में रोहित ने काम बढ़ाने के लिए बिजली का स्वीकृत लोड 19.6 किलोवाट से बढ़ाकर 49.9 किलोवाट करवाया। इसके बाद निगम ने कनेक्शन को गैर-घरेलू यानी कमर्शियल श्रेणी में मानते हुए 12 फरवरी 2019 को तीन लाख 36 हजार 455 रुपए और 12 जुलाई 2019 को चार लाख 17 हजार 143 रुपए के बिल जारी कर दिए।
पहले भी सुधारा गया था बिल
रोहित के अनुसार, शुरुआत में निगम ने एक लाख 27 हजार 681 रुपए का कमर्शियल बिल जारी किया था। आपत्ति जताने पर इसे संशोधित कर 13 हजार 820 रुपए कर दिया गया, जिसका उन्होंने भुगतान कर दिया था। बाद में लोड बढ़ने पर दोबारा कमर्शियल दरों से बिल जारी किए गए। रोहित ने इन बिलों को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस दिया और फिर अदालत का रुख किया।
निगम ने आवेदन का दिया हवाला
निगम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि लोड बढ़ाने के लिए जमा किए गए आवेदन में बिजली कनेक्शन की श्रेणी ‘नॉन-डोमेस्टिक’ दर्ज थी। इसी आधार पर कमर्शियल दरों से बिल जारी करने को उचित बताया गया।
वहीं, रोहित की ओर से दलील दी गई कि बिजली का इस्तेमाल मछली पालन के लिए किया जा रहा था। मत्स्य पालन कृषि से जुड़ी गतिविधि है और केवल बिजली का लोड बढ़ने से गतिविधि का वास्तविक उद्देश्य नहीं बदल जाता।
बिजली के इस्तेमाल पर रहा अदालत का जोर
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। मामले में निगम ऐसा ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो कि बिजली का इस्तेमाल मछली पालन के अलावा किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया जा रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगम के लाइनमैन की गवाही में भी मौके पर मछली पालन होने की बात सामने आई।
ADJ सुखप्रीत सिंह की अदालत ने सिविल अपील संख्या CA-133-2026 खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस तरह रोहित के पक्ष में पहले दिए गए फैसले को अपीलीय अदालत से भी राहत मिली।
