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Jodhpur Roadways Sleeper Bus Seized


जोधपुर महानगर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जजों ने रोडवेज डिपो पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही एक रोडवेज स्लीपर बस पकड़ी गई, जिसमें सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

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जांच में सामने आया कि दिल्ली जाने वाली इस स्लीपर बस में न तो पीछे की तरफ कोई आपातकालीन द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) था और न ही छत पर निकास द्वार (रूफ हैच) बना हुआ था। आरटीओ और डीटीओ की टीम ने मौके पर ही बस को सीज कर दिया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव-न्यायाधीश राकेश रामावत ने कहा- सरकार खुद नियमों की पालना के लिए फोर्स कर रही है, लेकिन खुद नियमों की पालना नहीं कर रही है।

दरअसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर अध्यक्ष दिनेश त्यागी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला अध्यक्ष पूरण कुमार शर्मा के निर्देशन में शनिवार को ये अभियान चलाया जा रहा है।

अब देखिए, कार्रवाई से जुड़ी PHOTOS…

यह बस दिल्ली से जोधपुर रूट पर संचालित होती थी, जिसमें सुरक्षा के लिए इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं दिया गया था।

यह बस दिल्ली से जोधपुर रूट पर संचालित होती थी, जिसमें सुरक्षा के लिए इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं दिया गया था।

जजों ने रोडवेज डिपो पर औचक निरीक्षण किया।

जजों ने रोडवेज डिपो पर औचक निरीक्षण किया।

बस में छत पर निकास द्वार (रूफ हैच) भी नहीं बना हुआ था।

बस में छत पर निकास द्वार (रूफ हैच) भी नहीं बना हुआ था।

दिल्ली जाने वाली स्लीपर बस में न इमरजेंसी एग्जिट मिला, न हैच

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर के सचिव जस्टिस राकेश रामावत ने कहा- स्लीपर और लग्जरी बसों पर नियमों की पालना करने के लिए रालसा की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत आज हमने रोडवेज बस स्टैंड पर चेक किया।

यहां जोधपुर से दिल्ली जाने वाली बस की जांच की गई। जांच के दौरान पाया गया कि बस के पीछे इमरजेंसी एग्जिट नहीं था और हैच भी नहीं था। जस्टिस रामावत ने कहा कि सरकार खुद नियमों की पालना के लिए फोर्स कर रही है, लेकिन खुद नियमों की पालना नहीं कर रही है।

सरकारी बसों में भी मिलीं गंभीर अनियमितताएं

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला के सचिव जस्टिस डॉ. मनीष हरजाई ने कहा- समझने की बात यह है कि कानून की व्यवस्था, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट उपक्रम, जब तक कोई विशेष प्रावधान न हो, सबके लिए एकरूपता से लागू होनी चाहिए।

आज निरीक्षण के दौरान यह ध्यान में आया कि रोडवेज द्वारा संचालित की जाने वाली बसों में अनियमितता है। जब आमजन या आम ऑपरेटर से सरकार की अपेक्षा नियमों की पालना करने की है, तो ऐसी स्थिति में सरकार को भी चाहिए कि वह स्वयं इसकी पालना करे।

कानून की पालना सरकार का दायित्व

जस्टिस डॉ. मनीष हरजाई ने बताया- कानून की पालना सरकार का न केवल दायित्व है, बल्कि प्रत्येक आमजन, जिसके लिए कानून बनाए गए हैं और जिसका वह लाभ उठाता है, उसे भी चाहिए कि वह इसकी अनुपालना में सहयोग करे। ऐसी स्थिति में प्रत्येक यात्री जब बस में यात्रा करने बैठता है, तो वह यह जरूर चेक करे कि क्या उस बस में इमरजेंसी विंडो, इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी हैच और अग्निशमन यंत्र है या नहीं। यात्रियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, इसकी कंप्लेंट करनी चाहिए और यदि किसी बस में सुरक्षा के इंतजाम न हों, तो उसमें यात्रा करने से परहेज करना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया कि जिन यात्रियों को ऐसी किसी कार्रवाई की वजह से असुविधा होती है।चाहे वह किसी प्राइवेट बस ऑपरेटर के कारण हो या सरकारी बस के कारण वे मुआवजे व राहत के लिए स्थाई लोक अदालत में अपनी याचिका पेश कर सकते हैं।

वहां की प्रक्रिया बेहद सरल है और किसी जटिल कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करना पड़ता, क्योंकि स्थाई लोक अदालत अपनी प्रक्रिया स्वयं निर्धारित करती है। इस कार्य में जो भी यथा योग्य सहयोग होगा, उसे करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ऐसे यात्रियों की मदद के लिए हमेशा तत्पर है।

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