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JPC Meeting on FCRA Amendment Bill


नई दिल्ली23 मिनट पहले

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बजट सत्र के दौरान FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा का नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद इंडिया गठबंधन ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया था। - Dainik Bhaskar

बजट सत्र के दौरान FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा का नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद इंडिया गठबंधन ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया था।

विदेशी चंदे की निगरानी से जुड़े FCRA संशोधन बिल पर बनी जेपीसी की पहली बैठक शुक्रवार को दिल्ली में हुई। फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (FCRA), 2026 मानसून सत्र में पेश किया गया था।

BJP सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा में रिपोर्ट देनी है।

विपक्ष का आरोप है कि बिल ईसाई NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों की वैध फंडिंग रोककर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है। सरकार ने आरोप खारिज करते हुए कहा है कि बिल धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है।

FCRA बिल- लोकसभा में पेश होने से JPC तक

यह बिल इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की लगातार मांग के बाद इसे 12 अगस्त को JPC को भेजा गया।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बिल के कुछ प्रावधान बेहद आपत्तिजनक हैं। समिति अब बिल के सभी प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी।

लोकसभा में बिल पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि कानून का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने कहा था कि इससे विदेश से मिले फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

संसदीय समिति में भाजपा के 14 मेंबर

बीजेपी के भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक और अरविंद धर्मपुरी समिति के सदस्य हैं।

कांग्रेस के लोकसभा सदस्य एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडीस, मुहम्मद हमदुल्ला सईद और काली चरण मुंडा हैं।

राज्यसभा से पैनल के अन्य सदस्यों में ज़िया उर रहमान (SP), कल्याण बनर्जी (TMC), ए राजा (DMK), लावू श्री कृष्ण देवरायालू (TDP), नरेश गणपत म्हस्के (शिव सेना), कौशलेंद्र कुमार (JD-U), सुप्रिया सुले (NCP-SP) और ई टी मोहम्मद बशीर (IUML) शामिल हैं।

राज्यसभा से बीजेपी के सी सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, अलका गुर्जर और सत पॉल शर्मा पैनल के सदस्य हैं।

राज्यसभा से पैनल के अन्य सदस्यों में प्रफुल्ल पटेल (NCP), संजय कुमार झा (JD-U), क्रिस्टोफर माणिकम (कांग्रेस), मेनका गुरुस्वामी (TMC) और पी विल्सन (DMK) शामिल हैं।

FCRA बिल में क्या, 3 पॉइंट में समझें…

1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है।

2. विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है।

3. रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी। यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है।

जेपीसी (JPC) का काम; जांच-पड़ताल करना, समाधान निकालना

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) एक अस्थायी समिति है, जिसका गठन संसद किसी विशेष बिल की गहन जांच करने या सार्वजनिक महत्व के जटिल मुद्दों (जैसे वित्तीय अनियमितताओं) की पड़ताल के लिए करती है। इसे तब बनाया जाता है जब संसद में सामान्य बहस से समाधान न निकल पा रहा हो।

जेपीसी में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसद होते हैं। अध्यक्षता लोकसभा सदस्य होता है जिसे स्पीकर नियुक्त करते हैं।

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