तरवाड़ी में अनिरुद्धाचार्य की कथा के दौरान प्रश्नोत्तरी में अपनी बातें रखती युवती।
करनाल में आयोजित अनिरुद्धाचार्य की कथा के दौरान प्रश्नोत्तरी में एक युवती ने इंटरकास्ट लव मैरिज और परिवार की नाराजगी को लेकर आचार्य से कई सवाल पूछे। युवती ने बताया कि ब्राह्मण परिवार से होने के कारण उसकी मां ने अनुसूचित जाति के युवक से उसके रिश्ते का
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बाद में युवती ने युवक से शादी कर ली। इस पर अनिरुद्धाचार्य ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा- प्रेम तो कुत्ते-गधे से हो जाता है। लेकिन हमें प्रेम करने से पहले आधार कार्ड देखना चाहिए। ये तो चमड़ी का प्यार है।
हालांकि, उन्होंने सलाह दी कि अब जब शादी कर ही ली है तो पति के साथ जीवन निभाओ और परिवार से संबंध सुधार लो। दोनों के सवाल-जवाब की ये वीडियो अब काफी वायरल हो रही है।

अनिरुद्धाचार्य से बातचीत करती हुई युवती।
युवती और अनिरुद्धाचार्य के बीच क्या बात हुई, पढ़िए…
युवती बोली- मां ने कमरे में बंद किया, मोबाइल भी छीना
करनाल के तरावड़ी में आयोजित कथा के दौरान नीलोखेड़ी की रहने वली युवती ने अनिरुद्धाचार्य से इंटरकास्ट मैरिज पर कई सवाल किए। उसने बताया कि परिवार में उसकी मां और भाई हैं। वह चार साल से एक प्राइवेट नौकरी कर रही थी जहां उसे एक युवक से प्यार हो गया, जो दूसरी जाति से है। उसने मां से उसी से शादी कराने की बात कही, लेकिन मां तैयार नहीं हुईं।
युवती के अनुसार एक दिन मां उसे ऑफिस से घर ले आईं, कमरे में बंद कर दिया, फोन ले लिया और करीब एक महीने तक बाहर व नौकरी पर नहीं जाने दिया। युवती ने कहा कि वह ब्राह्मण है, जबकि युवक एससी जाति से है और जाति के कारण मां ने शादी से इनकार किया।
अनिरुद्धाचार्य बोले- धर्म की दृष्टि से विवाह गलत
युवती की बात सुनकर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उसकी मां धर्म को समझती हैं, इसलिए उसे रोक रही थीं। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि धर्म में अलग-अलग वर्णों के विवाह को लेकर व्यवस्थाएं बताई गई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और आधुनिक समाज की दृष्टि से युवती के फैसले को अलग तरीके से देखा जा सकता है।

कथा में मौजूद अन्य श्रद्धालु।
युवती बोलीं- शादी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था
युवती ने जवाब देते हुए कहा कि उसने अपनी मां को मनाने की पूरी कोशिश की थी। उसने मां से कहा था कि वह लड़के को देखें, उससे मिलें और उसे जानें। अगर लड़का उन्हें पसंद आए, तो ही वह उससे शादी करेगी, लेकिन युवती के अनुसार उसकी मां ने न तो युवक को देखा और न ही उसे जानने की कोशिश की।
युवती ने कहा कि लगातार मानसिक रूप से परेशान किए जाने और घर में बंद रखे जाने के बाद उसने उस युवक से शादी करने का फैसला लिया। अब उसके घर वाले चाहते हैं कि वह पति को छोड़कर वापस घर आ जाए।
इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि अब पति को छोड़ना है या उसके साथ रहना है, इसका फैसला युवती और उसके परिवार को करना है। उन्होंने युवती से कहा कि उसने शादी कर ली है, तो अब उसे निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मां स्वीकार नहीं कर रही हैं, तो पति के साथ रहकर सास-ससुर के साथ खुश रहने का प्रयास करना चाहिए।
मैं चाहती हूं परिवार हमें स्वीकार कर ले
युवती ने कहा कि वह अपने परिवार से रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती। उसकी इच्छा केवल इतनी है कि उसके परिवार वाले उसे और उसके पति को स्वीकार कर लें। इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि अगर युवती शादी का फैसला लेने से पहले उनसे पूछती, तो वह उसे बताते कि उनके अनुसार यह सही है या गलत।
उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे फैसला लेने से बाद में पछताना पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘पानी पियो छानकर और विवाह करो जानकर’ वाली बात कही और सत्संग करने तथा धर्म के रास्ते पर चलने की सलाह दी।
उन्होंने युवती की मां का पक्ष लेते हुए कहा कि मां ने उसे पढ़ाया-लिखाया, नौकरी करने की आजादी दी और उसके सपनों को पूरा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि युवती के इस फैसले से उसकी मां का दिल टूट गया।

युवती के सवालों का जवाब देते अनिरुद्धाचार्य।
युवती बोली- प्रेम विवाह गुनाह थोड़ी, आचार्य बोले-पहले आधार कार्ड देखो
युवती ने सवाल किया कि किसी से प्रेम करना गुनाह थोड़े ही है। इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेम करने से पहले व्यक्ति को उसके परिवार, संस्कार और आगे के जीवन के बारे में विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल-जवाब के दौरान यहां तक कहा कि किसी से भी प्रेम कर लेने के पहले आधार कार्ड देख लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो लोगों के बीच का संबंध नहीं है, बल्कि उससे आगे परिवार और आने वाली पीढ़ी भी जुड़ी होती है। उन्होंने युवती से प्रेम की परिभाषा पूछी।
आचार्य बोले- मां के प्यार को क्यों नहीं देखा
युवती ने जवाब दिया कि उसने उस युवक से निस्वार्थ प्रेम किया था। इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि युवती को अपनी मां का निस्वार्थ प्रेम भी देखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जिस मां ने उसे जन्म दिया, उसका पालन-पोषण किया, पढ़ाया-लिखाया और उसके सपने पूरे करने के लिए उसे आगे बढ़ाया, उसके प्यार को युवती क्यों नहीं समझ पाई।
उन्होंने युवती के प्रेम को लेकर कहा कि जिसे वह प्यार समझ रही है, वह उनके अनुसार प्यार नहीं, बल्कि वासना या हवस है। उन्होंने कहा कि बाहरी सुंदरता और आकर्षण के कारण किसी को प्रेम समझ लेना सही नहीं है। उनके अनुसार धर्म जीवन में बड़ी चीज है और व्यक्ति को धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए।
अनिरुद्धाचार्य बोले- आपकी मां अपने पति को छोड़कर नहीं भागी
अनिरुद्धाचार्य ने युवती से कहा- तुम्हारी मां ने भी विवाह किया और अपने पति के साथ जीवन बिताया। उन्होंने युवती से पूछा कि क्या आपकी मां अपने पति से प्यार करती हैं। युवती ने हां में जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आपकी मां अपने पति को छोड़कर नहीं भागीं, बल्कि परिवार के साथ रहीं।
उन्होंने युवती को समझाते हुए कहा कि जब उसकी मां और पिता जिस रास्ते पर चले, तो वह उस रास्ते पर क्यों नहीं चली। साथ ही उन्होंने युवती को एक बार फिर अपनी मां से बात करने की सलाह दी।
संविधान और धर्म के दो रास्तों की बात कही
अंत में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संविधान व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने की आजादी देता है, जबकि धर्म में विवाह को लेकर अलग मर्यादाएं बताई गई हैं। उन्होंने युवती से कहा कि वह अपने फैसले का रास्ता खुद चुन सकती है, लेकिन आगे जीवन के बड़े निर्णय जिम्मेदारी और सोच-विचार के साथ लेने चाहिए।
11 सिंतबर तक अनिरुद्धाचार्य की कथा चलेगी
बता दें कि यह अनिरुद्धाचार्य की यह कथा 11 सिंतबर तक तरवाड़ी में चलेगी। तरवाड़ी के शिव शक्ति इंटर ग्लोब एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी रमेश गुप्ता एवं अमन गुप्ता की ओर से इसका आयोजन किया जा रहा है।
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