‘सिया गोयल ने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को लोहगढ़ किले से धक्का देकर मार डाला। क्योंकि वो केतन से शादी नहीं करना चाहती थी।’ पुणे पुलिस की ये थ्योरी पूरे देश को याद हो चुकी है। लेकिन ये बात कहने में जितनी आसान है, कोर्ट में
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तो क्या केतन अग्रवाल की हत्या मामले में सिया बच जाएगी, पुलिस कैसे साबित करेगी सिया ने ही धक्का दिया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: पुलिस ने सिया को किस आधार पर केतन की हत्या का आरोपी बनाया है?
जवाब: पुलिस के मुताबिक, 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे लोहगढ़ किले की चोटी पर मौजूद सिया चीखी। गार्ड्स पहुंचे, तो सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है।’ सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’
केतन अग्रवाल के माता-पिता ने लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के ऑफिसर्स से कहा कि उन्हें केतन की मौत में किसी गलत इरादे का शक नहीं है। पुलिस भी इसे एक्सीडेंट मान रही थी।
लेकिन इसके बाद जांच में 5 ऐसी बातें सामने आईं, जिसके आधार पर सिया और चेतन को हत्या का आरोपी बनाया गया…
1. केतन के घर वालों को सिया पर शक हुआ
- 20 जून को केतन का अंतिम संस्कार हुआ। 21 जून को सिया केतन के घर पहुंची। केतन की बहन ने पूछा- ‘केतन कैसे गिरा?’ इस पर सिया के हावभाव अचानक बदल गए। वो ठीक से जवाब नहीं दे पा रही थी।
- केतन की बहन को शक हुआ और उसने पिता विशाल अग्रवाल से कहा- भाई अच्छा ट्रेकर है, उसकी मौत एक्सीडेंट नहीं हो सकती।
- इसके बाद विशाल दोबारा पुणे पुलिस से मिले और सिया पर शक जताया। विशाल के मुताबिक, केतन को सिया के साथ 31 मई को पहली बार लोहगढ़ जाने के बाद ही शक हो गया था कि सिया का किसी से अफेयर है। वो बार-बार किसी ‘दोस्त चेतन’ का जिक्र करती थी।

सिया और केतन की सगाई 19 फरवरी 2026 को हुई थी। नवंबर में दोनों की शादी होने वाली थी।
2. सिया ने पुलिस के सामने अपने बयान बदले
- सिया ने पहले पुलिस से कहा कि केतन पहाड़ी के किनारे पर फोटो खिंचवाते समय तेज हवा के चलते फिसल गया, लेकिन पुलिस को केतन के फोन से किले की कोई फोटो नहीं मिली।
- सिया ने बाद में कहा कि वो लोग किले पर चढ़ाई के बाद आराम करने के लिए रुके थे। उसको प्यास लगी, तो केतन उसे पानी की बोतल दे रहा था। इस दौरान बैलेंस बिगड़ने से वो खाई में गिर गया।
- पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने कहा, ‘इस मामले में शक इसीलिए हुआ, क्योंकि लोहगढ़ में ऐसा कोई एक्सीडेंट पहले कभी नहीं हुआ, ये जगह काफी सुरक्षित मानी जाती है।’
3. किले के CCTV फुटेज में गर्मी में हुडी पहने दिखा शख्स
- पुलिस ने लोहगढ़ किले के CCTV फुटेज निकाले। इनमें 18 जून को केतन और सिया के आसपास एक शख्स कई बार दिखा। गर्मी का मौसम और किले की चढ़ाई के दौरान वो हुडी पहने था।
- पुलिस के मुताबिक, वो अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। सिया को इशारे कर रहा था। संदीप गिल ने कहा, ‘वो हुडी के ऊपर हेडफोन लगाए था, अगर म्यूजिक भी सुन रहा हो, तो ये असामान्य था।’

चेतन की इसी फोटो के आधार पर पुलिस को उस पर शक हुआ था।
4. हत्या वाले दिन चेतन का इंटरनेट पूरे दिन बंद
- 18 जून के दिन चेतन के फोन की लोकेशन पुणे में उसके ऑफिस की मिली, लेकिन फोन रिकॉर्ड में पुलिस को एक अजीब चीज मिली। 18 जून को चेतन के फोन पर कॉल्स तो आ रहे थे, लेकिन सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक उसका मोबाइल डेटा ऑफ था। फोन सिर्फ कॉल्स रिसीव करने के लिए इस्तेमाल हुआ।
- एक पुलिस ऑफिसर के मुताबिक, ‘हमने उस दिन चेतन को कॉल करने वालों से पूछा कि किसने कॉल उठाई थी। तो उन्होंने कहा कि दुकान का वर्कर था।’
- पुलिस पूछताछ के लिए चेतन के ऑफिस पहुंची, तो ऑफिस के एक कमर्चारी ने बताया कि चेतन 18 जून को उसका फोन लेकर गया था। कर्मचारी के फोन की लोकेशन 18 जून को लोहगढ़ किले की ही निकली।
- पुलिस के मुताबिक, चेतन अपनी बाइक से किले तक पहुंचा। हुडी पहन कर ऊपर चढ़ा, ताकि केतन उसे पहचान न पाए। उसके बाद उसने केतन को धक्का दिया या फिर धक्का देने में मदद की। फिर नीचे लौट आया। किले पर चढ़ने और उतरने में उसे सिर्फ 48 मिनट लगे। वह चोटी पर 8 से 10 मिनट रहा। इतना समय हत्या को अंजाम देने के लिए पर्याप्त है।
4. सिया की चेतन के नंबर पर 2000 से ज्यादा कॉल्स
- पुलिस ने सिया के कॉल-रिकॉर्ड खंगाले। इनमें एक मोबाइल नंबर पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कॉल में करीब 338 घंटे की बातचीत की थी। यानी दोनों रोजाना करीब 11 कॉल्स में 2 घंटे बात करते थे। ये नंबर चेतन चौधरी का था।

पुणे के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 22 जून को सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
सवाल-2: क्या सिया को दोषी साबित करने के लिए ये 5 आधार काफी नहीं, और क्या जरूरी?
जवाब: हत्या के मामले में आरोपी को 2 तरीके से दोषी साबित किया जा सकता है…
1. हत्या का कोई पुख्ता सबूत मौजूद हो
भारतीय कानून में हत्या का आरोप साबित करने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी होती हैं- हत्या का मोटिव, यानी इरादा, हत्या में इस्तेमाल हथियार, आरोपी का मौके पर मौजूद होना और हत्या का चश्मदीद गवाह।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘मान लीजिए किसी की हत्या हो और मौके पर ही आरोपी और हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार बरामद हो जाएं, जिसकी पोर्टमार्टम रिपोर्ट से भी पुष्टि हो जाए, तो हत्या का मामला चलेगा। अभियोजन पक्ष या पुलिस घटना के CCTV फुटेज, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वारदात के गवाह या किसी दूसरे सबूत के जरिए यह साबित करेंगे कि आरोपी ने ही हत्या की है। इसके बाद कोर्ट आरोपी को दोषी करार दे देगा।’
केतन के मामले में पुलिस का मानना है कि उसे चेतन या सिया ने खाई में धक्का दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। विराग गुप्ता के मुताबिक, कोर्ट सिया और केतन को तभी दोषी मानेगा, जब सबूतों से ये साबित हो जाए कि केतन न ही खुद फिसला, न उसका संतुलन बिगड़ा, बल्कि उसे जानबूझकर चेतन या सिया ने या दोनों ने मिलकर धक्का दिया था।
हालांकि अभी तक पुलिस के पास इसका कोई सबूत नहीं है। एक पुलिस ऑफिसर ने कहा है, ‘केतन की हत्या के समय किले पर 208 लोग मौजूद थे। हमें उम्मीद है कि किसी न किसी ने कोई आपत्तिजनक फोटोग्राफिक सबूत कैद किया होगा।’
पुलिस ने कोर्ट से चेतन और सिया के लाई-डिटेक्टर टेस्ट की परमिशन मांगते हुए कहा था कि उसके पास घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और न ही कोई ऐसा सबूत है, जिससे साबित हो सके कि केतन को धक्का देकर किसने मारा। पुलिस ने ये अर्जी वापस भी ले ली है।
2. हत्या की परिस्थिति से जुड़े सबूत मौजूद हों
हत्या का वीडियो न हो, तो भी हत्या साबित की जा सकती है और आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है। अदालतें परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर भी हत्या के मामलों में सजा सुनाती हैं।
परिस्थितिजन्य सबूतों का मतलब है कि किसी व्यक्ति की हत्या के पीछे की वजह या मोटिव, हत्या के समय आरोपियों की लोकेशन, हत्या के तरीके से जुड़े सबूत सभी आपस में अच्छे से जुड़े हों। किसी भी तरह कोई एक भी कड़ी ऐसी न हो, जिससे ये गुंजाइश बने कि आरोपी बेकसूर भी हो सकता है।
विराग गुप्ता कहते हैं कि केतन की हत्या के समय का कोई मटेरियल एविडेंस नहीं मिल पाता, तो पुलिस ने केतन की हत्या के पीछे जो कहानी, सुराग और हत्या का जो मोटिव बताया है, अभियोजन पक्ष को उसे कोर्ट में सबूतों के साथ साबित करना होगा।
पुलिस को इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के फोन रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, केतन की मौत की लोकेशन से जुड़े सबूत जुटाने होंगे। इन सबके आधार पर यह साबित करना होगा कि सिया और चेतन के पास केतन को मारने की पर्याप्त वजह थी और उन दोनों ने ही केतन की हत्या की है।
पुलिस का एक दावा ये भी है कि उसके पास चेतन और सिया के कबूलनामे हैं, जिनमें उन्होंने केतन की हत्या की बात स्वीकार की है। हालांकि पुलिस को दिए बयान में कोई आरोपी अपना जुर्म कबूल ले, तो भी CRPC या BNS कानून के तहत इसकी कोर्ट में कोई अहमियत नहीं होती।
सवाल-3: तो क्या हत्या के आरोप से बच भी सकते हैं सिया-चेतन?
जवाब: अक्सर परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर हत्या के मामले में आरोपी बरी भी हो जाते हैं। आपने कई फैसलों में कोर्ट की ये टिप्पणी सुनी होगी- सबूतों की कमी के चलते आरोप साबित नहीं किया जा सका।
दरअसल, इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के बनाए हुए नियम हैं। 1952 में एक फैसले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को आगाह किया था कि किसी शक को सबूत न समझा जाए। फिर 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने एक और मामले में 5 सिद्धांत बताए…
- हर परिस्थिति, यानी हत्या के प्लान से लेकर अंजाम देने तक, जो भी स्थितियां बताई गईं, वो पूरी तरह साबित होनी चाहिए।
- हर स्थिति केवल अपराध की तरफ इशारा करती हो, यानी ऐसा न हो कि पुलिस कोई स्थिति बताए, लेकिन उसका अपराध से लेना-देना न हो। मिसाल के लिए- ये साबित न होना कि चेतन, केतन की हत्या के इरादे से ही किले पर गया था।
- हर स्थिति अपनी प्रकृति में निर्णायक हो, यानी किसी भी कड़ी से घटना को लेकर कोई निष्कर्ष निकलता हो।
- हर परिस्थिति उचित वैकल्पिक सिद्धांत को खारिज करती हो। मिसाल के लिए कोई भी परिस्थिति ऐसी न हो कि जिससे केतन की मौत के पीछे कोई और वैकल्पिक वजह समझ में आ जाए।
- हर परिस्थिति एक ऐसी श्रृंखला या चेन ऑफ इवेंट बनाए, जिससे आरोपियों के निर्दोध होने की कोई संभावना बाकी न रहे।

पुणे पुलिस ने 28 जून को सिया को वडगांव मावल अदालत में पेश किया था। इस दौरान सिया करीब 30,000 रुपए का लग्जीरियस टॉप पहने दिखी थी।
सिया के वकील तनवीर अहमद मीर कहते हैं कि अभियोजन पक्ष केवल ये दिखाकर केस नहीं जीत सकता कि कई चीजें संदिग्ध लग रही हैं। घटना की हर परिस्थिति खुद में साबित हो, और फिर वो अगली कड़ी से भी जुड़ती हो, ये भी साबित हो कि केतन की मौत की दूसरी कोई संभव वजह नहीं है। अगर एक भी कड़ी टूटती है, तो आरोपियों को संदेह का फायदा मिलेगा।
केतन के मामले में पुलिस को हर दावा, सबूत में बदलना होगा। साबित करना होगा कि सिया शादी से नाखुश थी और यही हत्या का मोटिव था। चेतन के साथ उसका रिश्ता, कैफे में हुई दोनों की मुलाकात और दोनों के प्लान को रिहर्सल से साबित करना होगा। सिर्फ ये साबित करना काफी नहीं होगा कि दोनों का व्यवहार संदिग्ध है, बल्कि ये फोन, चैट रिकॉर्ड, CCTV फुटेज से ये साबित करना होगा कि वो हत्या की साजिश कर रहे थे।
मीर कहते हैं कि इसके अलावा सबसे जरूरी ये साबित करना होगा कि केतन गिरा कैसे? उस पॉइंट की ढलान, कहां पर गिरा, केतन के जूते, गिरने की दिशा, उनकी चोटें, फिसलने की संभावना, ये सभी चीजें मायने रखेंगी।
कई संभावनाएं हो सकती हैं- केतन खद फिसले, या कोई बहस हुई, उस दौरान गिर गए, किसी एक ने धक्का दिया, या दोनों ने उकसाया, या हाथापाई में ऐसा हुआ। पुलिस को बाकी सभी संभावनाओं को खारिज करके ये साबित करना होगा कि केतन को धक्का दिया गया।
सवाल-4: क्या पहले भी कोर्ट ने ऐसे फैसले दिए हैं?
जवाब: हां, आरुषि-हेमराज हत्याकांड इसकी लैंडमार्क मिसाल है। 13 साल की आरुषि तलवार और तलवार दंपति के नौकर हेमराज की 2008 में नोएडा में हत्या कर दी गई थी। आरुषि की लाश उसके बेडरूम में, जबकि हेमराज की लाश छत पर मिली थी।

अपने माता-पिता के साथ आरुषी तलवार की तस्वीर।
केतन के मामले की तरह ही ये दोहरा हत्याकांड नेशनल लेवल पर सनसनी बन चुका था। आरुषि के माता-पिता- राजेश और नूपुर तलवार के बारे में कहा जा रहा था कि दोनों ने ऑनर-किलिंग की है। 2013 में CBI कोर्ट ने दोनों को दोषी भी करार दे दिया, लेकिन 4 साल बाद इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। सिया के वकील मीर ने ही उनका भी केस लड़ा था।
इस मामले में भी हाई कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को लेकर 5 सिद्धांतों के आधार पर निचली अदालत का फैसला पलट दिया था।
अभियोजन पक्ष ये साबित करने में नाकाम रहा था कि घटना की रात तलवार के घर में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता था। मीर ने कोर्ट में ये कल्पना दी कि राजेश तलवार का कंपाउंडर, कृष्णा थडाराई को भी पहले संदिग्ध माना गया था। हो सकता है कि उसने हत्याएं की हों। तलवार दंपति को बचाने के लिए मीर को ये साबित करने की जरूरत नहीं थी कि कृष्णा ने असल में हत्याएं की थीं। बस उन्हें अपनी कल्पना को इतना भरोसेमंद बनाना था कि तलवार के दोषी होने पर संदेह पैदा हो जाए।
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पुणे शहर से 64 किमी दूर लोहगढ़ किला। 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे किले की चोटी से एक चीख गूंजी। गार्ड्स पहुंचे, तो वहां मौजूद 20 साल की सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है। सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पूरी खबर पढ़िए…
