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N Raghuraman Column | Bengaluru Parents Advice On Teen Two-Wheeler Demand


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15 मिनट पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

शुक्रवार को जब मैं बेंगलुरु में उस 7 किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजर रहा था, जहां बायोकॉन पार्क, माइक्रो लैब्स लिमिटेड, एपोटेक्स रिसर्च, एचसीएल टेक्नोलॉजीज का सेज परिसर, कार्ल जेइस इंडिया, सैनसेरा इंजीनियरिंग और टोयोटा इंडस्ट्रीज इंजन इंडिया जैसी सैकड़ों बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थित हैं, तभी मेरे चचेरे भाई का फोन आया।

उन्होंने कहा, भाई, अरविंद (उनका बेटा, जो अभी 17 साल का हुआ है) कॉलेज जाने के लिए टू-व्हीलर मांग रहा है। मैंने उनसे पूछा कि तुम्हें इसमें ऐसी क्या चिंताजनक बात लग रही है, जो इस पर मेरी राय लेना चाहते हो?

उन्होंने कहा कि वह अभी तक ऊपर की मंजिल से नीचे तक कपड़ों की टोकरी तक बिना गिराए नहीं ला पाता, लेकिन टू-व्हीलर मांग रहा है। शायद उसके दोस्तों के पास टू-व्हीलर्स हैं, इसलिए उस पर पीयर-प्रेशर है। मैंने कहा कि मैं थोड़ी देर में फोन करता हूं और डिसकनेक्ट कर दिया।

उस महज 20 मिनट की ड्राइव पर मुझे एक घंटा लग गया। मेरे आगे चल रहे दोपहिया वाहनों को सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों और गड्ढों से बचने की तमाम कोशिशों के बावजूद लगातार दचके लग रहे थे।

इस बोम्मासंद्रा-जिगनी लिंक रोड पर गड्ढों और उखड़ी सड़क से जूझते बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालकों को देखकर मेरे मन में ऐसे सबक उभरने लगे, जिन्हें मैं अरविंद के पैरेंट्स से साझा कर सकता था। इनमें से कुछ सीखें मुझे पिता ने दी थीं, कुछ मैंने स्वयं वाहन चलाते हुए सीखी हैं और कुछ साथी बाइकर्स से मिली हैं :

अपनी पहचान का मोह छोड़ें : सड़क पर उतरते ही बाइकर्स को लगता है कि उन्हें एक खास तरह का व्यक्तित्व, पहनावा, अंदाज, सोच, बोलने और व्यवहार करने का तरीका अपनाना चाहिए। लेकिन जब मैं अपनी खरीदी बाइक पर पहली बार बैठा था तो मेरे पिता ने मुझे नसीहत देते हुए कहा था, एक बाइकर के रूप में तुम्हें ऐसी किसी चीज की जरूरत नहीं है। उन्होंने सहज अंदाज में कहा, तुम्हें कैसा होना चाहिए, इस विचार को छोड़ दो। तभी तुम उस व्यक्ति के लिए जगह बना पाओगे, जो तुम बन सकते हो या जो तुम पहले से हो।

पकड़ थोड़ी ढीली रखें : उनका दूसरा सबक था, अगर तुम तनकर रहोगे तो जीवन भी तनाव से भरा रहेगा। इग्निशन स्विच ऑन करते समय अपने कंधों को ढीला छोड़ो। इससे हैंडल पर पकड़ सहज रहेगी और तुम सहज होकर आगे बढ़ पाओगे।

सड़क पर गड्ढे और खराब हिस्से भी आएंगे, इसलिए कई बार अचानक दिशा बदलनी पड़ सकती है। जितनी कसकर हैंडल पकड़ोगे, उतनी ही मुश्किल होगी। बाद में मुझे एहसास हुआ कि यह हिदायत सिर्फ टू-व्हीलर चलाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जीवन के भी कई पहलुओं पर लागू होती है।

हर बाइकर का खयाल रखें : बाइक चलाना शुरू करने से पहले मुझे बाइकर-वेव के बारे में पता नहीं था। ये वो संकेत है, जिसमें दो बाइकर एक-दूसरे की ओर दो उंगलियां उठाकर अभिवादन करते हैं। लेकिन जब मुझे इसका अर्थ समझ में आया, तब तो मुझे इससे प्यार हो गया। दरअसल, यह केवल एक ग्रीटिंग भर नहीं, बल्कि सुरक्षित रहने का यूनिवर्सल संदेश भी है। यह छोटा-सा इशारा बार-बार सेफ-ड्राइविंग की याद दिलाता है।

सड़क पर प्रतिस्पर्धा न करें : कुछ लोग तेज रफ्तार से बाइक को पांचवें गियर में डालकर अगले ट्रैफिक सिग्नल के रेड होने से पहले ही वहां पहुंच जाना चाहते हैं। लेकिन मैंने यह सीखा है कि हर बाइक सवार की मंजिल एक जैसी नहीं होती।

वाहन चलाते समय भी करें एक्सरसाइज : मुझे कई अनुभवी ड्राइवरों ने बताया है कि वे ट्रैफिक सिग्नल पर हरी बत्ती का इंतजार करते समय श्वास संबंधी अभ्यास करते हैं। वे सिग्नल पर बचे सेकंड्स के अनुसार इसे समायोजित करते हैं। लेकिन कार सवारों की तुलना में बाइकर्स अकसर इतनी जल्दबाजी में रहते हैं कि ऐसी बुनियादी बातों को भूल जाते हैं।

याद रखिए, यह हमारे शरीर के लिए अच्छा है और दिमाग को शांत रखता है- फिर चाहे आप बाइक पर हों या नहीं। साथ ही, इससे आसपास के माहौल को बेहतर तरीके से देखने की क्षमता भी विकसित होती है, जो सुरक्षित ड्राइविंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

फंडा यह है कि यदि आपका बच्चा टू-व्हीलर की मांग करता है, तो उसकी बात पर विचार जरूर कीजिए, लेकिन हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने की सीख देने के साथ-साथ उसे ये सिद्धांत भी सिखाइए।

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