कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी
भारत-मैक्सिको के बीच उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देते हुए नालंदा विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नालंदा विश्वविद्यालय और मैक्सिको के प्रतिष्ठित ‘यूनिवर्सिदाद ऑटोनोमा डी ग्यु
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इस वर्चुअल हस्ताक्षर समारोह में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास की उप मिशन प्रमुख (डीसीएम) दीप्ति गंजी और UAGro की रेक्टर डॉ. लैटिसिया जिमेनेज जमोरा मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। इसके साथ ही दोनों ही प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ संकाय सदस्य, शोधार्थी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस विशेष अवसर के साक्षी बने।

डिजिटल माध्यम से हुआ समझौता ज्ञापन
शिक्षा और शोध से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल दो विश्वविद्यालयों का जुड़ाव नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, नवाचार, गहन शोध और ज्ञान के परस्पर आदान-प्रदान के माध्यम से भारत और मैक्सिको के कूटनीतिक व सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने का सशक्त माध्यम बनेगा। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच जमीनी स्तर पर समझ और संवाद बेहतर होगा।

कई गणमान्य रहे मौजूद।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए खुलेंगे नए द्वार
इस समझौते के तहत दोनों संस्थानों के बीच छात्रों और फैकल्टी के आवागमन को गति मिलेगी, जिससे वे एक-दूसरे के परिसरों में जाकर अध्ययन और अध्यापन कर सकेंगे। इसके अलावा दोनों विश्वविद्यालय मिलकर संयुक्त शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे और अकादमिक सम्मेलनों व कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे।
साथ ही शोध पत्रिकाओं, प्रकाशनों और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारियों का आदान-प्रदान भी निरंतर किया जाएगा। नालंदा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को संभव बनाने और दोनों संस्थानों के बीच सेतु की भूमिका निभाने के लिए मैक्सिको सिटी स्थित भारतीय दूतावास के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
