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NALSAR Law University Controversy; Manan Mishra Vs CJI Surya Kant – BCI


हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स ने चीफ जस्टिस को दीक्षांत समारोह में बुलाने का विरोध किया। नाराज होकर बार काउंसिल अध्यक्ष मनन मिश्रा ने पूरे बैच का ही एनरोलमेंट रोक दिया।

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दबाव की वजह से कुछ ही घंटों में बैन वापस लेना पड़ा। अब खुद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कोर्ट में लताड़ लगाते हुए कहा- ‘वो कौन होते हैं मेरे और स्टूडेंट्स के बीच दखल देने वाले?’

आखिर कौन हैं मनन मिश्रा, क्या है पूरा विवाद और CJP इसे अपनी दूसरी बड़ी जीत क्यों मान रही है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: कौन हैं मनन मिश्रा? जवाब: मनन मिश्र सीनियर वकील और 2024 में बिहार से बीजेपी के मनोनीत राज्यसभा सांसद हैं। वो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के भी अध्यक्ष हैं। ये संस्था देश में वकीलों और वकालत के पेशे से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी रेगुलेटरी बॉडी है।

मनन मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। छपरा के राजेंद्र कॉलेज से B.Sc (ऑनर्स) करने के बाद पटना लॉ कॉलेज से LLB की। 1982 तक गोपालगंज सिविल कोर्ट में वकालत के बाद पटना हाई कोर्ट चले गए।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट बन गए। 2010 में कांग्रेस के टिकट पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

BCI के अध्यक्ष का चुनाव दो साल के लिए होता है। 2014 में मनन पहली बार अध्यक्ष बने थे। तब से इस पद पर काबिज हैं।

2025 में मनन को लगातार सातवीं बार BCI चेयरमैन चुना गया है।

2025 में मनन को लगातार सातवीं बार BCI चेयरमैन चुना गया है।

सवाल-2: मनन ने NALSAR स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट पर बैन क्यों लगाया? जवाब: NALSAR यूनिवर्सिटी में करीब 1400 स्टूडेंट्स हैं। परंपरा है कि हर साल चीफ जस्टिस यहां से लॉ पास करने वाले स्टूडेंट्स के दीक्षांत समारोह में बतौर चीफ गेस्ट भाषण देते हैं। आम तौर पर कार्यक्रम हर साल अगस्त-सितंबर के महीने में होता है।

  • 23 जुलाई को यूनिवर्सिटी से LLB और LLM पास करने वाले कॉलेज के 70 स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को एप्लीकेशन देकर जस्टिस सूर्यकांत को बतौर चीफ गेस्ट बुलाने का विरोध किया। ये स्टूडेंट्स जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान जस्टिस सूर्यकांत के बयानों से नाराज थे।
  • जल्द ही विरोध करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 380 तक पहुंच गई। दीक्षांत समारोह की तैयारियां भी शुरू नहीं हुईं, तो स्टूडेंट्स ने कहा कि अगर प्रशासन इस पर कोई फैसला नहीं लेता, तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगे।
  • 12 अगस्त को कुलपति प्रोफेसर श्रीकृष्णा देवा राव के ऑफिस ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत को बतौर चीफ गेस्ट कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है।
  • अगले ही दिन BCI अध्यक्ष मनन मिश्र ने NALSAR यूनिवर्सिटी के कुलपति और सभी राज्यों की बार काउंसिल के नाम निर्देश की एक चिट्ठी जारी की। इसमें कहा गया, ‘NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी से 2026 में लॉ करने वाले स्टूडेंट्स को किसी भी राज्य के बार काउंसिल में बतौर एडवोकेट एनरोल नहीं किया जाएगा।’
  • दरअसल, वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स को अपने संबंधित बार काउंसिल में भी रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। इसके बाद ही वकालत की प्रैक्टिस की जा सकती है।

मनन मिश्र ने NALSAR के कुलपति को 3 दिन के भीतर उन स्टूडेंट्स के नाम की लिस्ट और पहचान वगैरह की पूरी रिपोर्ट देने को कहा, जिन्होंने CJI के खिलाफ अभियान का प्लान तैयार किया, बैठकें कीं और उनका विरोध या दीक्षांत समारोह का बॉयकाट करने की बात कही। इसमें शामिल बाहरी लोगों की डिटेल्स देने को भी कहा गया।

BCI का कहना था कि वह इस मामले की जांच करेगा। स्टूडेंट्स को एनरोल करने से जांच प्रभावित हो सकती थी, इसलिए 19 अगस्त को आखिरी फैसले तक एनरोलमेंट पर रोक का निर्देश दिया गया।

मनन मिश्र ने कहा, ‘कोई लॉ स्टूडेंट, जो CJI के प्रति कोई आदर या सम्मान नहीं रखता, उससे एक जिम्मेदार या समझदार वकील, टीचर या जज बनने की उम्मीद नहीं कर सकते। ऐसे लोग हमेशा कानून के पेशे पर बोझ रहेंगे।’

सवाल-3: आखिर CJI का विरोध क्यों कर रहे हैं NALSAR के छात्र? जवाब: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के बाद ये विवाद शुरू हुआ…

  • 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के ‘एक्शन’ के खिलाफ 22 जुलाई को एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की याचिका दाखिल की।
  • वकील ने कहा, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है और पुलिस बर्बर कार्रवाई कर रही है। इस पर मुख्य CJI सूर्यकांत ने वकील को बीच में ही रोककर कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत करो।’
  • इस पर वकील ने कहा कि उनके पास ऐसे वीडियोज हैं, जिनमें पुलिसवाले निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर हमला करते हुए दिख रहे हैं। उन्होंने वीडियोज कोर्ट में पेश करने की अनुमति मांगी।
  • इस पर CJI ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।’
NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली प्रोटेस्ट के समर्थन में प्रदर्शन करते NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के स्टूडेंट्स।

NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली प्रोटेस्ट के समर्थन में प्रदर्शन करते NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के स्टूडेंट्स।

CJI के इन्हीं बयानों के बाद नाराज NALSAR स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को उन्हें बतौर चीफ गेस्ट न बुलाने की मांग रखी थी।

70 स्टूडेंट्स ने अपने पहले लेटर में कहा, ‘CJI की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की क्रूर कार्रवाई पर तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं दी। दीक्षांत समारोह में यूनिवर्सिटी के मूल्य उसके फैसलों में साफ तौर पर दिखने चाहिए। ये मूल्य हैं- संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों का निपटारा। ऐसे व्यक्ति से अपनी डिग्री लेना, जिन्होंने पुलिस की बर्बरता के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज कर दिया हो, हमें NALSAR में सिखाए गए मूल्यों से मेल नहीं खाता।’

2028, 2029 बैच के स्टूडेंट्स ने भी कहा कि वे इससे सहमत हैं और दीक्षांत समारोह में CJI के आने का ‘कड़ा विरोध’ करते हैं।

सवाल-4: लेकिन बार काउंसिल को सिर्फ 2 घंटे में फैसला वापस क्यों लेना पड़ा? जवाब: BCI के फैसले का दो-तरफा विरोध हुआ…

NALSAR और राज्य BCI मेंबर्स का विरोध

  • गुवाहाटी हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मृणाल चौधरी ने कहा कि ये फैसला BCI के अधिकार के दायरे से बाहर है और मनमाना है। ये निर्देश BCI ने किस अधिकार के तहत दिया, ये साफ नहीं है। स्टूडेंट्स को बिना उनकी बात सुने ही दोषी ठहराना नियम के खिलाफ है।
  • 13 अगस्त को NALSAR के कुलपति श्रीकृष्णा देवा राव ने भी कहा कि BCI की मांग पर कार्रवाई से पहले यूनिवर्सिटी ये जांच करेगी कि क्या उसे जांच की मांग करने का वैधानिक अधिकार है। उसके बाद जवाब दिया जाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी की धमकी

  • CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने शाम 7:34 बजे X पर लिखा, ‘क्या होगा अगर कानून से जुड़े सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं?’ फिर 8:29 पर लिखा, ‘राज्यसभा सीट का कर्ज अदा कर रहे हैं।’
  • CJP प्रवक्ता सौरव दास ने भी एक पोस्ट में कहा, ‘अगर मनन मिश्रा फौरन फैसला वापस नहीं लेते, तो सभी लॉ स्टूडेंट्स, एडवोकेट, सीनियर वकील और बाकी कॉकरोचेज काउंसिल के ऑफिस, मिश्रा के घर और अपने-अपने राज्यों में प्रोटेस्ट करेंगे।’
  • इसके बाद लगभग 8:45 बजे मनन मिश्रा का रुख बदला, उन्होंने एक पोस्ट में कहा, ‘BCI ने NALSAR के मामले में अपने निर्देशों में सुधार किया है। NALSAR 2026 बैच के स्टूडेंट्स अब अपनी पसंद के स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट के लिए पात्र होंगे। तथ्यात्मक जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। किसी भी छात्र को बिना किसी गलती के नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।’
  • इसके बाद सौरव दास ने कहा, ‘नई पोस्ट में जांच का आदेश अभी भी लागू है। BCI अपना फैसला पूरी तरह वापस ले, वरना BCI ऑफिस और मिश्रा के घर के बाहर प्रोटेस्ट होगा।’
  • रात 9:50 पर दीपके ने तीसरा पोस्ट लिखा, ‘क्या मनन मिश्रा इस्तीफा दो का समय आ गया?’
अभिजीत दीपके ने करीब दो घंटे में मनन मिश्र के खिलाफ प्रोटेस्ट की धमकी वाले 3 पोस्ट किए।

अभिजीत दीपके ने करीब दो घंटे में मनन मिश्र के खिलाफ प्रोटेस्ट की धमकी वाले 3 पोस्ट किए।

इसके बाद रात 12:37 बजे मनन मिश्रा ने X पोस्ट पर फैसला पूरी तरह वापस लेने का ऐलान किया। उन्होंने लिखा, ‘सीनियर एडवोकेट, बार मेंबर्स, लॉ स्टूडेंट्स और जनहितैषी नागरिकों के रिएक्शन पर सोचने के बाद और इससे संतुष्ट होने के बाद कि NALSAR 2026 बैच का किसी भी गड़बड़ी या आंदोलन में कोई हाथ नहीं था, BCI ने कार्रवाई पूरी तरह रोकने का फैसला लिया है। आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।’

सवाल-5: क्या ये कॉकरोच जनता पार्टी की दूसरी बड़ी जीत है? जवाब: CJP इसे अपनी जीत की तरह दिखा रही है। मनन मिश्रा के फैसला वापस लेने के थोड़ी बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने उनकी पोस्ट पर रिएक्शन दिया, ‘CJP ने रात भर जागने को मजबूर कर दिया। बेइज्जती हुई वो अलग।’

14 अगस्त की सुबह मनन ने भी मीडिया से कहा, ‘मैं अभिजीत दीपके और सौरव दास को मैसेज देना चाहता हूं कि भारत के युवाओं के अधिकारों की रक्षा करने का हमारा और उनका उद्देश्य एक जैसा है।’

साफ है कि CJP की दोबारा आंदोलन और मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की धमकी के चलते दबाव बना। हालांकि जानकार मानते हैं कि इस मामले को सीधे तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी बनाम BCI की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

दरअसल, BCI, राज्यों के बार काउंसिल और लॉ यूनिवर्सिटीज की अपनी एक अलग कानूनी व्यवस्था है। 1961 के एडवोकेट्स एक्ट की धारा 7 के तहत BCI को राज्यों के बार काउंसिल, यूनिवर्सिटीज पर कंट्रोल का अधिकार है। BCI उन यूनिवर्सिटीज को मान्यता देता है, जो स्टूडेंट्स को बतौर वकील एनरोल करने के लिए जरूरी लॉ की डिग्री देते हैं।

हालांकि BCI के इस अधिकार का जिक्र नहीं है कि वह कैंपस में किसी एक्टिविटी पर छात्रों का बार में एनरोलमेंट बैन कर सकता है। नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी के डायरेक्टर रहे प्रोफेसर जी. मोहन गोपाल के मुताबिक, यूनिवर्सिटी इस मामले को अपने स्तर पर हल कर सकती थी, इसमें BCI का दखल ही गलत था। ——

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