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NEET UG 2026 Controversy | MP High Court Indore Student Petition



NEET-UG 2026 के परिणाम में 241 अंकों के भारी अंतर का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। झाबुआ के छात्र लोकेन्द्र सिंह खड़िया ने इंदौर बेंच में रिट याचिका दायर कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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छात्र का दावा है कि आधिकारिक OMR शीट और उत्तर कुंजी के आधार पर उसके 305 अंक बनते हैं, जबकि घोषित परिणाम में उसे मात्र 64 अंक दिए गए हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव पी. धनोडकर ने पक्ष रखा।

OMR शीट में दिखी दो अलग-अलग तस्वीरें

याचिका के अनुसार लोकेन्द्र सिंह ने 12वीं पास करने के बाद लगभग दो वर्षों तक इंदौर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की। पहली परीक्षा निरस्त होने के बाद उसने 21 जून 2026 को आयोजित रि-एक्जाम में हिस्सा लिया।

छात्र का आरोप है कि 14 जुलाई को एनटीए द्वारा OMR शीट उपलब्ध कराए जाने पर पहली बार लॉगिन करने पर फिजिक्स और केमेस्ट्री के सभी उत्तर रिक्त दिखाई दिए। हालांकि कुछ समय बाद दोबारा लॉगिन करने पर दूसरी OMR शीट उपलब्ध हुई, जिसमें उसके सभी उत्तर दर्ज थे। याचिका में इसे एनटीए की ऑनलाइन प्रणाली में गंभीर तकनीकी त्रुटि बताया गया है।

उत्तर कुंजी से मिलान पर बने 305 अंक

याचिकाकर्ता के मुताबिक दूसरी OMR शीट का आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान करने पर फिजिक्स में 104, केमेस्ट्री में 125 और बायलॉजी में 76 अंक प्राप्त होते हैं। इस तरह कुल अंक 305 बनते हैं।

इसके बावजूद 16 जुलाई को घोषित अंतिम परिणाम में उसे केवल 64 अंक दिए गए। छात्र ने आरोप लगाया है कि OMR डेटा प्रोसेसिंग, मूल्यांकन प्रणाली या परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर तकनीकी गड़बड़ी हुई है।

शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान

याचिका में कहा गया है कि परिणाम जारी होने के बाद छात्र ने ई-मेल के माध्यम से एनटीए को शिकायत भेजी, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते वह एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीवीएससी और बीएससी नर्सिंग सहित विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया से वंचित होने की स्थिति में पहुंच गया है।

हाईकोर्ट से स्वतंत्र जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से मांग की है कि एनटीए को ओएमआर शीट, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंक गणना का स्वतंत्र सत्यापन करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर परिणाम में आवश्यक संशोधन किया जाए।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं है, बल्कि एनटीए के रिकॉर्ड में मौजूद कथित विसंगति को दूर करने का अनुरोध है।

एनटीए की वैधानिक स्थिति को भी दी चुनौती

इस मामले में केवल अंक विवाद ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कानूनी स्वरूप पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि एनटीए संसद द्वारा स्थापित कोई वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत एक सोसायटी है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए एनटीए के अधिकारों और उसकी संवैधानिक वैधता की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। इस कारण मामला अब केवल एक छात्र के परिणाम विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परीक्षा संचालन प्रणाली और एनटीए की वैधानिक स्थिति पर भी महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर रहा है।



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