‘पानी आया, और सब ले गया, अब और क्या बोलूं।’
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नेपाल के त्रिशूली में रहने वाले सुजन की इस एक लाइन में तबाही, बर्बादी और बेबसी की पूरी कहानी है। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ से तबाह होने वाली बस्तियों में नुवाकोट जिले का त्रिशूली भी शामिल था।
30 हजार आबादी वाले इस कस्बे में जहां कभी बाजार था, वहां अब सिर्फ पत्थर और कीचड़ है। सड़कें गायब हैं, घर-दुकानें, स्कूल, हॉस्पिटल, वन विभाग का ऑफिस, बैंक सब मलबे में दबे हैं। पूरा शहर उजड़ गया। बचे लोग आर्मी के बेस में रह रहे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक शुरू नहीं हुआ। कितनी मौतें हुईं, पता नहीं। लापता लोगों के परिवार हाथ में तस्वीरें लिए पूछ रहे हैं- इन्हें कहीं देखा है।
तबाही दिखाने वाले ज्यादातर वायरल वीडियो त्रिशूली के ही हैं। भास्कर रिपोर्टर आशीष राय यहां पहुंचे और चश्मदीदों से बात की। उन जगहों पर गए, जहां के वीडियो वायरल हुए हैं। जैसे सैलाब के बीच खड़ा ये मकान…

अब घर खाली है, इसमें रहने वाले लोगों को बचा लिया गया

बाढ़ में बहा पुल

पुल वाली जगह सिर्फ पानी और मलबा

अब त्रिशूली का हाल 28 अगस्त, शुक्रवार, दोपहर करीब 2 बजे।
काठमांडू से करीब 70 किलोमीटर और तीन घंटे के सफर के बाद हम त्रिशूली पहुंचे। सबसे पहले नदी का शोर सुनाई दिया। पानी अब भी बहुत तेज बह रहा है। त्रिशूली आसपास के गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोगों के लिए सबसे अहम बाजार था। यह काठमांडू होते हुए कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते पर पड़ता है।

ये कैलाश मानसरोवर जाने वाला रास्ता है। आगे जिस जगह पानी दिख रहा है, वहां सड़क थी। बाढ़ में पूरा रास्ता बह गया।
इस तबाही को समझने के लिए सिर्फ मलबे को देखना काफी नहीं है। इसके लिए उन 20 से 30 मिनटों में लौटना होगा, जब त्रिशूली के लोगों को बताया गया कि बाढ़ आने वाली है, भाग जाओ। सायरन बज रहा था। पुलिस लोगों को ऊंचाई की तरफ जाने के लिए कह रही थी।
कुछ लोग भाग निकले, लेकिन कुछ रुके रहे। किसी ने जरूरी सामान समेटा, किसी ने कागज उठाए, किसी ने पैसे बचाने की कोशिश की। कई को भरोसा था कि पानी पहले की तरह बढ़ेगा और निकल जाएगा। फिर कुछ ही मिनटों में पानी और मलबा बस्ती तक पहुंच गया।

चश्मदीद 1: सुजन
‘पुलिस ने कहा था बाढ़ आ रही है, भाग जाओ, जो भागे, बच गए’
त्रिशूली बाजार में दुकान चलाने वाले सुजन बताते हैं, ‘कस्बे के बगल से त्रिशूली नदी बहती है। नदी में पहले भी बाढ़ आती रही है। उस दिन 9-9:30 बजे अचानक बाढ़ आई। उससे पहले ही पुलिस लोगों को हटने के लिए कह रही थी।’
सुजन के मुताबिक, चेतावनी मिलने के बाद लोगों के पास करीब 30 मिनट थे। वे कहते हैं, ‘जो भागा, वह बच गया। कुछ लोग बैठे रहे कि थोड़ा पानी आएगा और चला जाएगा।’
सुजन बताते हैं कि दो-तीन पुलिसवाले पुल के पास लोगों को हटा रहे थे, वे भी गाड़ी के साथ बह गए। अब तो लग नहीं रहा कोई बचा होगा।
चश्मदीद 2: ब्रजेश
‘मकान मालिक ने कहा- बाढ़ आ रही है, मैंने मजाक समझा’
ब्रजेश कुमार की उस दिन छुट्टी थी। वे कमरे में सोए थे। तभी मकान मालिक आया और बोला जल्दी निकलो, बाढ़ आ रही है। ब्रजेश बताते हैं, ‘मुझे नहीं लगा था कि इतना तूफान आएगा। मैंने मजाक में उड़ा दिया। फिर शोर सुनकर बाहर निकला तो देखा कि पुलिसवाले भी जाने के लिए कह रहे हैं। मैं 30 मीटर ही आगे बढ़ा था, पीछे देखा मकान-दुकान सब बह गए।’
चश्मदीद 3: सनोज
‘एक घंटे पहले फोन आ गया था, वक्त पर पहाड़ी की तरफ भाग गए’
सनोज चौधरी हादसे के वक्त गोदाम में लोडिंग का काम कर रहे थे। तभी त्रिशूली से ऊपर तरफ बसे रसुवागढ़ी से फोन आया कि बहुत तेज बाढ़ आ रही है। सनोज बताते हैं कि हमें एक घंटा पहले पता चल गया था। हमारे कस्टमर ऊपर की तरफ हैं, उन्होंने फोन पर बता दिया था कि भयंकर बाढ़ आ रही है। आधे घंटे बाद पानी आ गया। उससे पहले ही हम भागकर पहाड़ पर चढ़ गए।
चश्मदीद 4: तमांग
‘नदी में पहले भी पानी आया था, इस बार इतना ज्यादा होगा, सोचा नहीं था’
त्रिशूली में रहने वाले तमांग बताते हैं, ‘आपने टीवी में देखा होगा न, पानी ऐसे ऊपर तक उड़ता हुआ आया, बिल्कुल वैसा ही था। हम लोग भागे। नदी के किनारे रोड पर आ गए। पानी सब ले गया। कितने लोग दबे होंगे, गिनती नहीं कर सकते।’
‘यहां कैंपस में कुछ लड़के रहते थे। छुट्टी के बाद उन्हें घर जाने के लिए कहा था। वे पुल पर बैठकर वीडियो शूट करने लगे। सब बह गए। कोई नहीं भाग पाया। पहले भी 6-7 बार यहां नदी में पानी आया है। सभी को लगा कि पहले जैसा ही होगा। इस बार 10 गुना ज्यादा पानी आया।’

त्रिशूली में बाढ़ का पानी बसाहट के बीच से बहकर निकला। इससे घरों के निचले हिस्से मिट्टी से भर गए।
अब तक जिन लोगों से बात हुई, सभी ने कहा कि पुलिस ने सायरन बजाकर भागने के लिए कहा था। करीब 60 साल की दीपा तक ये चेतावनी नहीं पहुंची। वे बताती हैं कि पानी आया तो मैं भागकर घर पहुंचीं। मुझे बेटे को बचाना था। मैंने कोई सायरन नहीं सुना। अगर पहले ही चेतावनी मिल जाती तो शायद ज्यादा लोग निकल सकते थे।

मोबाइल नेटवर्क ठप, सेना के हेलीकॉप्टर से फ्यूल की सप्लाई
कम्युनिकेशन टूटने और गांवों तक पहुंच न होने से कई परिवार अब भी अपनों की खोज में हैं। हम जिस जगह खड़े थे, वहां थोड़ी दूर नेपाली आर्मी और सुरक्षाबलों का बेस है। मलबे से मिल रहे शवों को यहां एक जगह रखा गया है।
नेपाल टेलीकॉम के अधिकारी नवराज राय माझी काठमांडू से टीम के साथ आए हैं। वे बताते हैं कि बाढ़ के बाद बिजली चली गई और टावर बंद हो गए। सेना के हेलीकॉप्टर काठमांडू से फ्यूल और जनरेटर लेकर आए हैं। इससे मोबाइल नेटवर्क बहाल करने का काम शुरू किया गया।
लगातार बारिश, बंद रास्ते और पहाड़ियां रेस्क्यू में सबसे बड़ी रुकावट हैं। हेलिकॉप्टर जहां उतर सकते हैं, वहां राहत तेजी से पहुंचती है। जहां उतरने की जगह नहीं, वहां पहाड़ पर पहुंचकर नीचे आने-जाने में घंटों लग जाते हैं।

त्रिशूली से पहले रास्ते में जगह-जगह मलबा में फंसी गाड़ियां दिखने लगती हैं। रास्ता साफ कर दिया गया है, लेकिन आसपास अब भी मलबा है।
इन्हीं परेशानियों के बीच अशोक कुमार चौरसिया भी मिले। यूपी के बलिया के रहने वाले हैं, लेकिन त्रिशूली में 20 साल से कपड़े की दुकान चला रहे थे। परिवार में बीवी, दो बच्चे, भाई-भाभी और भतीजा था। भाभी और 18 साल का भतीजा बह गए। अशोक कहते हैं कि सब ठीक चल रहा था। पैसे कमा रहे थे। उस दिन पानी की स्पीड इतनी थी कि सोचने का भी मौका नहीं मिला। 6 दुकानें थीं, सब खत्म हो गया।
नेपाल में शनिवार तक इस आपदा से 675 लोगों की मौत हो चुकी है। तिब्बत में 7 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय शामिल हैं। 400 भारतीय अब भी तिब्बत में फंसे हुए हैं।

…………………………………… नेपाल त्रासदी से जुड़े अपडेट यहां पढ़ें… 1. तबाही लाने वाले ग्लेशियर टूटने का VIDEO, 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था

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2. भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें, खतरे में 6 प्रदेश

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