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- No Matter How Rich A Father Is, There Is No Substitute For A Mother’s Love.
चंडीगढ़4 घंटे पहले
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चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया कि पिता की आर्थिक मजबूती या बड़ा निवेश, मां की ममता और भावनात्मक देखभाल का विकल्प नहीं हो सकता। खंडपीठ ने 4 साल के बच्चे की कस्टडी मां को सौंपने के सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता की अपील खारिज कर दी।
पिता ने तर्क दिया था कि कस्टडी विवाद को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए मां को सिविल कोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट ने पिता की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि माता-पिता के अधिकारों से ऊपर बच्चे का हित है। पिता कितना भी अमीर क्यों न हो, वह मां की जैविक और भावनात्मक देखभाल की जगह नहीं ले सकता।

