44 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ दोगुना, तीन गुना या चार गुना हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जल्दबाजी में बिना प्लानिंग के निवेश शुरू कर देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि उन्हें अलग-अलग जगहों से अलग-अलग सलाह मिलती है।
कोई SIP को बेहतर बताता है, तो कोई शेयर बाजार में पैसा लगाने या गोल्ड में निवेश करने की सलाह देता है। ऐसे में सही फैसला लेना आसान नहीं होता। हालांकि निवेश के कुछ ऐसे नियम हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अच्छा रिटर्न पा सकते हैं।
इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में निवेश के 7 आसान नियमों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- हर महीने कितना निवेश करना चाहिए?
- पैसा कितने समय में दोगुना, तीन और चार गुना हो सकता है?
- उम्र के हिसाब से कितना रिस्क लेना सही है?
एक्सपर्ट- कुशाग्र मोहन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, को-फाउंडर, निक्सेपा कैपिटल, लखनऊ
सवाल- क्या निवेश का कोई नियम होता है? एक्सपर्ट इस पर क्या कहते हैं?
जवाब- फाइनेंशियल एक्सपर्ट कुशाग्र मोहन के मुताबिक, निवेश को आसान बनाने के लिए 7 ‘रूल ऑफ थंब’ हैं। इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि-
- आय का कितना हिस्सा बचाना चाहिए?
- कितना निवेश करना चाहिए?
- कितना रिस्क लेना चाहिए?
- भविष्य की जरूरतों के लिए कैसे योजना बनानी चाहिए?
ये नियम निवेश की शुरुआत करने वालों के लिए एक आसान गाइड हैं।
ध्यान रहे, हर निवेशक की इनकम, उम्र, फाइनेंशियल गोल और रिस्क लेने की क्षमता अलग होती है। इसलिए निवेश का कोई एक नियम हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता है।
सवाल- निवेश के 7 पॉपुलर नियम क्या हैं?
जवाब- निवेश के 7 नियम अलग-अलग पहलुओं पर आधारित हैं। कुछ नियम निवेश की संभावित ग्रोथ का अनुमान लगाने में मदद करते हैं। जबकि कुछ सेविंग्स, बजट, रिस्क और इमरजेंसी फंड की योजना बनाने पर फोकस करते हैं। ग्राफिक में निवेश के 7 नियम देखिए-

अब निवेश के इन सातों नियमों को विस्तार से समझिए-
रूल ऑफ 72
- यह नियम बताता है कि निवेश लगभग कितने समय में दोगुना हो सकता है।
- इसके लिए 72 को निवेश पर मिलने वाले सालाना रिटर्न (%) से डिवाइड किया जाता है।
- जो संख्या आती है, उतने साल में पैसा दोगुना होने का अनुमान लगाया जाता है।
इसको ऐसे समझिए-
- मान लीजिए आपने ₹50,000 निवेश किए।
- इस निवेश पर 12% सालाना रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
- 72÷12= 6
- यानी आपका ₹50,000 करीब 6 साल में दोगुना (₹1 लाख) हो सकता है।
फायदा
- अलग-अलग निवेश विकल्पों की तुलना करना आसान हो जाता है।
- निवेश का लक्ष्य तय करने में मदद मिलती है।
रूल ऑफ 72 की सीमाएं
- यह सिर्फ अनुमान है, गारंटी नहीं।
- हर साल रिटर्न एक जैसा नहीं मिलता।
- टैक्स और महंगाई का असर इसमें शामिल नहीं होता है।
रूल ऑफ 114
- यह नियम बताता है कि आपका निवेश लगभग कितने समय में तीन गुना हो सकता है।
- इसके लिए 114 को सालाना रिटर्न (%) से डिवाइड किया जाता है।
- जो संख्या आती है, उतने साल में पैसा तीन गुना होने का अनुमान लगाया जाता है।
इसको ऐसे समझिए-
- मान लीजिए आपने ₹50,000 निवेश किए।
- निवेश पर 12% सालाना रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
- 114÷12= 9.5
- यानी ₹50,000 करीब 9.5 साल में ₹1.5 लाख हो सकते हैं।
ध्यान रखें- यह भी ‘रूल ऑफ 72’ की तरह सिर्फ अनुमान है। इसके फायदे और सीमाएं भी लगभग वही हैं।
रूल ऑफ 144
- यह नियम बताता है कि निवेश लगभग कितने समय में चार गुना हो सकता है।
- इसके लिए 144 को सालाना रिटर्न (%) से भाग दिया जाता है।
- जो संख्या आती है, उतने साल में पैसा चार गुना होने का अनुमान लगाया जाता है।
उदाहरण
- मान लीजिए आपने ₹50,000 निवेश किए।
- निवेश पर 12% सालाना रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
- 144÷12= 12
- यानी ₹50,000 करीब 12 साल में ₹2 लाख हो सकते हैं।
ध्यान रखें- यह नियम भी अनुमान पर आधारित है। वास्तविक रिटर्न बाजार और निवेश के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है।
50-30-20 रूल
यह नियम कमाई को तीन हिस्सों में बांटने की सलाह देता है।
- 50% जरूरी खर्चों के लिए।
- 30% अपनी पसंद और लाइफस्टाइल पर खर्च के लिए।
- 20% बचत और निवेश के लिए।
उदाहरण
अगर आपकी मंथली इनकम ₹50,000 है तो-
₹25,000 जरूरी खर्च
₹15,000 अन्य खर्च
₹10,000 बचत और निवेश
फायदा
- खर्च और बचत का बैलेंस बना रहता है।
- जरूरत और शौक के खर्च अलग-अलग होते हैं।
- हर महीने निवेश के लिए पैसा बचाना आसान होता है।
- बजट बिगड़ने की संभावना कम होती है।
ध्यान रखें- आय और जरूरतों के हिसाब से इस अनुपात में बदलाव किया जा सकता है।
मिनिमम 10% इन्वेस्टमेंट रूल
- यह नियम कहता है कि इनकम का कम-से-कम 10% रेगुलर निवेश करें।
- कम रकम से भी शुरुआत की जा सकती है।
- अगर आपकी मासिक आय ₹40,000 है, तो हर महीने कम-से-कम ₹4,000 निवेश करने की कोशिश करें।
फायदा
- निवेश की आदत बनती है।
- छोटी रकम से वेल्थ क्रिएशन की शुरुआत होती है।
- हर महीने नियमित निवेश करना आसान होता है।
- समय के साथ कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।
ध्यान रखें- 10% न्यूनतम सिर्फ सुझाव है। आय बढ़ने पर निवेश की राशि भी बढ़ानी चाहिए।
100 माइनस एज रूल
- हर निवेश में रिस्क लेवल अलग होता है। आमतौर पर इक्विटी (शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड) में रिस्क ज्यादा होता है। जबकि FD, PPF या डेट फंड जैसे ऑप्शन्स तुलना में सुरक्षित माने जाते हैं।
- यह रूल बताता है कि उम्र के हिसाब से कुल निवेश का कितना हिस्सा इक्विटी में रखना चाहिए।
- इसके लिए 100 में से अपनी उम्र घटाई जाती है। जो संख्या आती है, उतने प्रतिशत तक इक्विटी में निवेश करने का सुझाव दिया जाता है। बाकी रकम अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश में रखने की सलाह दी जाती है।
जैसे-
अगर आपकी उम्र 30 साल है-
100-30= 70
यानी कुल निवेश का करीब 70% इक्विटी और 30% सेफ ऑप्शन्स में रखना चाहिए।
फायदे
- उम्र के हिसाब से इन्वेस्टमेंट बैलेंस बनाने में मदद मिलती है।
- जरूरत से ज्यादा या बहुत कम रिस्क लेने से बचा जा सकता है।
- एसेट एलोकेशन की शुरुआती योजना बनाना आसान होता है।
- लंबी अवधि के निवेश की रणनीति तय करने में मदद मिलती है।
इमरजेंसी फंड रूल
- निवेश का मकसद भविष्य के लिए पैसा बनाना है। लेकिन जिंदगी में कभी भी बीमारी या अचानक कोई बड़ा खर्च आ सकता है।
- ऐसी स्थिति में निवेश तोड़ने या कर्ज लेने की नौबत न आए, इसलिए इमरजेंसी पहले इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देता है।
- इसमें आमतौर पर 3-6 महीने के खर्च जितनी रकम अलग रखने की सलाह दी जाती है।
उदाहरण के लिए
अगर आपका मासिक खर्च ₹10,000 है तो इमरजेंसी फंड में ₹30,000 से ₹60,000 तक रखने की कोशिश करें।

सवाल- निवेश शुरू करने से पहले इमरजेंसी फंड बनाना क्यों जरूरी है?
जवाब- इमरजेंसी फंड अचानक आने वाली आर्थिक मुश्किलों में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसलिए निवेश शुरू करने से पहले इसे तैयार करने की सलाह दी जाती है। ग्राफिक में देखिए ये क्यों जरूरी है-

सवाल- नए निवेशक इन नियमों को अपनाते समय कौन-सी गलतियां करते हैं?
जवाब- नए निवेशक अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका फाइनेंशिल प्लान प्रभावित हो सकता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- निवेश के किसी रूल को फॉलो करने का सही तरीका क्या है?
जवाब- निवेश के नियम दिशा दिखाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की फाइनेंशियल कंडीशन अलग होती है। इसलिए किसी भी नियम को अपनाने से पहले अपनी आय, खर्च, फाइनेंशियल गोल और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें। साथ ही कुछ बाताें का ध्यान रखें-
- किसी एक नियम पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
- अपनी आय और खर्च के हिसाब से योजना बनाएं।
- पहले इमरजेंसी फंड तैयार करें।
- नियमित और लंबी अवधि तक निवेश करें।
- समय-समय पर निवेश की समीक्षा करें।
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