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Porn Apps Scam Explained; Adult Content Cyber Fraud Prevention


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38 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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साइबर ठग लोगों को चूना लगाने के लिए रोज नए हथकंडे अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर एडल्ट पोर्न कंटेंट का विज्ञापन दिखाकर लोगों को निशाना बनाना ठगों का नया हथियार है।

स्कैमर यूजर्स को एडल्ट एप्स का विज्ञापन दिखाते हैं। वे जानते हैं कि लोग ऐसे विज्ञापनों के झांसे में आ सकते हैं और एप डाउनलोड कर सकते हैं। एक बार एप डाउनलोड हो जाए तो वे बहुत से एक्सेस और परमिशन मांगते हैं और यूजर का फोन हैक कर लेते हैं। एक बार फोन कंट्रोल में आ जाए तो ठग इससे कई तरह के फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं।

हाल ही में गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ऐसे एडल्ट कंटेंट एप्स को लेकर एडवाइजरी जारी की है। साथ ही खतरनाक एप्स की एक लिस्ट भी जारी की है। ऐसे में इस नए स्कैम के बारे में समझना बेहद जरूरी है।

इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘एडल्ट एप्स स्कैम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • स्कैमर्स लोगों को कैसे अपने जाल में फंसाते हैं?
  • इस स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

एक्सपर्ट– राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- एडल्ट एप्स क्या हैं?

जवाब- ये ऐसे एंड्रॉयड एप हैं, जिनमें फोटो-वीडियो या दूसरी तरह के एडल्ट पोर्न कंटेंट होते हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए ये कंटेंट देखने के लिए लाेगों से संदिग्ध एप्स डाउनलोड कराते हैं। बाद में इन एप्स का इस्तेमाल फ्रॉड के लिए करते हैं।

सवाल- सरकार ने एडल्ट कंटेंट वाले एंड्राॅयड एप्स को लेकर क्या एडवाइजरी जारी की है?

जवाब- I4C के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एडल्ट कंटेंट के नाम से प्रचारित एंड्रॉयड एप्स खतरनाक हैं। इन्हें डाउनलोड करने से फोन का कंट्रोल साइबर अपराधियों के हाथ में जा सकता है और फाइनेंशियल फ्रॉड का रिस्क हो सकता है।

सवाल- स्कैमर्स लोगों को अपने जाल में कैसे फंसा रहे हैं?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • साइबर अपराधी फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडल्ट कंटेंट के विज्ञापन दिखाते हैं।
  • इस पर क्लिक करने के बाद यूजर को एक फर्जी वेबसाइट पर री-डायरेक्ट किया जाता है।
  • यहां कंटेंट देखने के लिए APK फाइल इंस्टॉल करने को कहा जाता है।
  • इंस्टॉल होने के बाद यह एप सेंसिटिव परमिशन मांगता है।
  • इससे ठग फोन का कंट्रोल हासिल कर फ्रॉड को अंजाम देते हैं।
  • स्कैम का पूरा खेल ग्राफिक में देखिए-

सवाल- साइबर एजेंसियों ने किन एप्स को लेकर चेतावनी दी है?

जवाब- I4C ने अपनी एडवाइजरी में ऐसे कई खतरनाक एडल्ट एप्स के नाम बताए हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- APK फाइल क्या होती है?

जवाब- APK यानी एंड्रॉयड पैकेज किट। यह एंड्रॉयड फोन में एप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। आमतौर पर एप्स गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल होते हैं। लेकिन APK फाइल के जरिए इन्हें सीधे फोन में भी इंस्टॉल किया जा सकता है। साइबर ठग इसका गलत इस्तेमाल करते हैं।

सवाल- संदिग्ध APK फाइल फोन में इंस्टॉल होने के क्या रिस्क हैं?

जवाब- इससे साइबर अपराधियों को फोन और उसमें मौजूद संवेदनशील डिटेल्स तक पहुंच मिल सकती है। इससे बैंकिंग और UPI से जुड़े फ्रॉड का रिस्क बढ़ जाता है। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कैसे पता चलेगा कि फोन में कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल हो चुका है?

जवाब- फोन की एक्टिविटी में अचानक बदलाव और कोई अनजान एप दिखना इसका प्रमुख संकेत है। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- एक्सेसबिलिटी परमिशन क्या है? संदिग्ध एप को एक्सेस देने के क्या रिस्क हो सकते हैं?

जवाब- यह एक सेंसिटिव परमिशन है, जो किसी एप को फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली चीजों को पढ़ने, यूजर इंटरफेस (UI) को समझने और टच या क्लिक जैसे काम करने की परमिशन देती है। किसी संदिग्ध एप को ये परमिशन देने से फ्रॉड का रिस्क हो सकता है।

सवाल- किसी भी एप को एक्सेसबिलिटी परमिशन देते हुए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

  • सबसे पहले देखें कि एप को इस परमिशन की वास्तव में जरूरत है या नहीं।
  • एप हमेशा आधिकारिक एप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
  • एप के डेवलपर, डाउनलोड और यूजर रिव्यू की जांच करें।
  • किसी अनजान एप को एक्सेसबिलिटी, SMS, फोन या बैंकिंग से जुड़ी सेंसिटिव परमिशन न दें।
  • एप के काम से संबंधित न होने वाली सभी परमिशन तुरंत बंद करें।
  • अगर एप परमिशन के बिना काम न करे तो उसे तुरंत अनइंस्टॉल कर दें।

सवाल- क्या सिर्फ एप को अनइंस्टॉल कर देने से खतरा खत्म हो जाता है?

जवाब- नहीं, अगर एप को पहले से सेंसिटिव परमिशन मिली है तो उसे अनइंस्टॉल कर देने मात्र से रिस्क कम नहीं होता है। इसके लिए तुरंत कुछ कदम उठाएं-

फोन की सेटिंग्स में जाकर एप की सभी परमिशन बंद करें।

  • बैंकिंग एप, UPI और दूसरे अकाउंट की एक्टिविटी देखें।
  • अगर कोई संदिग्ध एक्टिविटी दिखे तो बैंक से संपर्क करें।
  • ईमेल, बैंकिंग और दूसरे अकाउंट के पासवर्ड बदलें।

2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन करें।

फ्रॉड की शंका हो तो साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

सवाल- क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन खतरनाक है?

जवाब- नहीं, सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन खतरनाक नहीं होता। लेकिन किसी विज्ञापन को देखकर तुरंत उस पर क्लिक करना या एप डाउनलोड करना सुरक्षित नहीं है। खासकर ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहें, जो डर, लालच या उत्सुकता पैदा करके तुरंत एक्शन के लिए उकसाएं।

सवाल- संदिग्ध एप से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- इसके लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ध्यान रखें-

सवाल- अगर गलती से कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • संदिग्ध एप की परमिशन बंद करें।
  • एक्सेसबिलिटी एक्सेस ऑफ करें।
  • संदिग्ध एप तुरंत अनइंस्टॉल करें।
  • बैंकिंग/UPI ट्रांजैक्शन देखें।
  • बैंक खाता अस्थाई ब्लॉक कराएं।

सवाल- अगर ऐसे एप की वजह से ठगी का शिकार हो जाएं तो कहां शिकायत करें?

जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अगर बैंक या UPI से जुड़ी ठगी हुई है, तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचना दें।

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ग्राफिक- अजीत सिंह

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