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- Pt. Vijayshankar Mehta Column | Spiritual Guide For Successful Marriage
57 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
जीवनसाथी केवल शरीर का मामला नहीं है। यह रिश्ता आरंभ देह से होता है और समझदारी यह है कि इसका समापन आत्मा पर किया जाए। पूरी दुनिया में इस समय यह एक नया रूप लेता जा रहा है। पिछले दिनों जब मैं कनाडा की यात्रा पर था तो मेरा परिचय कुछ जोड़ों से हुआ और मैंने पाया जैसे वो दिख रहे हैं, वैसे हैं नहीं।
उनकी शांति, साथ रहना काफी हद तक अभिनय जैसा लग रहा था। परिवार, संतान, भविष्य, आर्थिक सुरक्षा का तालमेल बनाने के बाद भी अधिकांश जोड़े एक-दूसरे से कहीं ना कहीं असंतुष्ट थे। एक जोड़े ने मुझसे कहा कि जरा भी मतभेद हों तो इच्छा होती है कि हम अलग हो जाएं। लेकिन हमने अपने माता-पिता को बड़े से बड़े मतभेद के बाद भी साथ रहते देखा।
वो सही थे या हम? क्यों हम इस रिश्ते को ढोएं? हमने बच्चे पैदा कर दिए, बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो अब इस रिश्ते का क्या महत्व? तब मुझे याद आता है ऋषि-मुनियों ने वैवाहिक संस्कार में जो सप्तपदी रची है, उसका आंतरिक भाव यह है कि इस रिश्ते में एक-दूसरे की आत्मा को स्पर्श किया जाए। केवल देह पर टिकेंगे तो यह रिश्ता दम तोड़ देगा।

