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- Pt. Vijayshankar Mehta Column | Yoga Enhances Soul Beauty & Inner Tej
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
सुंदरता और कुरूपता के मामले में हम केवल देह पर टिकते हैं। कौन सुंदर है, कौन कुरूप है- मनुष्य के शरीर के मामले में यह हमारा दिया हुआ ही प्रमाण-पत्र है। और चूंकि हम देह पर टिकते हैं, इसीलिए एक जगह की सुंदरता दूसरे स्थान में कुरूपता बन जाती है।
गोरी चमड़ी, काली चमड़ी तो सबसे बड़ा मापदंड हो गया सुंदरता का। और पूरा जीवन इसी में बीत जाता है। कम ही लोग जान पाते हैं कि एक जन्मजात सौंदर्य भी होता है, और वह होता है आत्मा का। आज सभी लोग ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रहे हैं। सबका झुकाव बाहरी जीवन पर है।
मशीन इंसान को सुंदर भी बना रही है और कुरूप भी। लेकिन जिन्होंने आत्मा के सौंदर्य को जाना, उनके शरीर से एक अतिरिक्त बात प्रकट हुई और उसको तेज कहते हैं। जो सौंदर्य और कुरूपता दोनों से अलग है, बल्कि कहें कि ऊपर है।
आत्मा पर जाने के लिए योग एक साधन है। और जो भी योग करेंगे, उनके पास सौंदर्य हो या कुरूपता, लेकिन तेज बरकरार रहेगा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अष्टावक्र हैं, जिन्हें कुरूपता का प्रतीक माना गया पर उनके तेज के आगे सब फीके थे।

