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Punjab Cyber Crime Helpline 1930 & Zero FIR Launch


पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम से निपटने की स्ट्रेटजी।

पंजाब में डिजिटल फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। इसके तहत पंजाब पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम विंग को अब स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) के रूप में पुनर्गठित किया गया है।

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नई व्यवस्था के तहत 1930 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर 24 घंटे काम करेगा, जहां लोग साइबर अपराधों से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा पीड़ितों को घटना के बाद ई-जीरो एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, साइबर हमलों और हैकिंग से निपटने के लिए ‘साइबर कमांडो’ तैयार किए जाएंगे, जो ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करेंगे।

अब 7 प्वाइंट्स में जानिए यह सेंटर कैसे लोगों की मदद करेगा

  • साइबर फ्रॉड पर रियल-टाइम रिस्पॉन्स: UPI, नेट बैंकिंग या ऑनलाइन पेमेंट में धोखाधड़ी होने पर 1930 हेल्पलाइन के जरिए शिकायत मिलते ही S4C की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम सक्रिय होगी। टीम बैंक, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट गेटवे से समन्वय कर ठगी की रकम को फ्रीज कराने का प्रयास करेगी।
  • तेज और वैज्ञानिक जांच: साइबर इन्वेस्टिगेशन डिवीजन डिजिटल सबूत जुटाएगा, जबकि S-DISC मोबाइल, लैपटॉप, सर्वर और हार्ड डिस्क की डिजिटल फोरेंसिक जांच कर तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेगा। इससे साइबर अपराधियों तक पहुंचने और मामलों की जांच में तेजी आएगी।
  • महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा: साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेल, बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों के लिए विशेष यूनिट त्वरित तकनीकी सहायता और जांच उपलब्ध कराएगी।
  • 24×7 साइबर मॉनिटरिंग: साइबर थ्रेट एंड सोशल मीडिया मॉनिटरिंग डिवीजन सोशल मीडिया पर अफवाहों, फेक न्यूज, संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों और संभावित साइबर खतरों पर लगातार नजर रखेगा, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
  • सरकारी नेटवर्क की सुरक्षा: साइबर सिक्योरिटी डिवीजन और साइबर कमांडो सरकारी वेबसाइट, डेटा सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को हैकिंग, रैनसमवेयर और बड़े साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए काम करेंगे।
  • पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी: स्टेट साइबर क्राइम ट्रेनिंग सेंटर में पुलिस अधिकारियों और जांच एजेंसियों को साइबर जांच, डिजिटल फोरेंसिक और नई साइबर तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • लोगों में साइबर जागरूकता बढ़ेगी: आउटरीच एंड इनोवेशन यूनिट स्कूल, कॉलेज, सरकारी विभागों और आम नागरिकों के लिए साइबर जागरूकता अभियान चलाएगी। इसका उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन ठगी और डिजिटल खतरों से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।

DGP की देखरेख में होगा काम

गृह विभाग के मुताबिक, S4C के गठन के लिए सरकार को अलग से बजट खर्च नहीं करना पड़ेगा और न ही कोई नया पद सृजित किया गया है। मौजूदा पुलिस स्टाफ और संसाधनों को नए तरीके से व्यवस्थित कर यह सेंटर बनाया गया है। S4C का कामकाज पंजाब के DGP की निगरानी में होगा, जबकि इसकी जिम्मेदारी स्पेशल DGP या ADGP (साइबर क्राइम) स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी।

पंजाब का मॉडल क्यों अलग है

पंजाब का साइबर सुरक्षा मॉडल दूसरे राज्यों से अलग है। यहां नई एजेंसी बनाने के बजाय पहले से काम कर रही सभी साइबर इकाइयों को एक ही कमांड और समन्वय ढांचे (S4C) के तहत एकीकृत किया गया है।

दूसरे राज्यों में साइबर जांच, डिजिटल फोरेंसिक, 1930 फ्रॉड रिस्पॉन्स, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी सेवाएं अलग-अलग विंग या एजेंसियों के जरिए संचालित होती हैं।

पंजाब में इन सभी यूनिटों के साथ साइबर कमांडो को भी एक ही राज्य स्तरीय सेंटर के तहत लाया गया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड, बेहतर समन्वय और तेज रिस्पॉन्स सुनिश्चित करना है।



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