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Rajasthan Influencer Fake AI Video Controversy


‘मैं सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूं…प्लीज, जिसने भी मेरी फर्जी वीडियो लगाई है, उसे हटा दें। यह मेरी इज्जत का सवाल है। मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान हूं। लोग कमेंट कर रहे हैं…मैं घर से बाहर निकलने लायक नहीं रही।’

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यह अपील है राजस्थान की एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर की, जिसका गंगा में डुबकी लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है।

इन्फ्लूएंसर ने पूरे कपड़ों में डुबकी लगाई थी, लेकिन AI के जरिए छेड़छाड़ कर जो वीडियो शेयर किया गया वो बेहद आपत्तिजनक है।

ये इस तरह का पहला मामला नहीं है। हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का एक AI वीडियो बनाकर ठगी को अंजाम दिया गया। इसका मास्टरमाइंड अलवर से पकड़ा गया है।

क्या है ‘डीपफेक वीडियो’, जिसका एक इन्फ्लूएंसर शिकार बनी? इस घटना ने कैसे सोशल मीडिया पर एक्टिव प्रदेशभर की महिलाओं-बच्चियों को चिंता में डाल दिया है? कैसे एक मुख्यमंत्री का वीडियो बनाकर ठगी हुई? पढ़िए संडे बिग स्टोरी में….

सबसे पहले- सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर की कहानी

पीड़ित जून में हरिद्वार अपने परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए गई थी। उसने 6 जून को अपने सोशल मीडिया पर सलवार सूट में गंगा स्नान करते हुए एक वीडियो भी अपलोड किया था। उस वीडियो को एडिट करके फर्जी वीडियो बनाया गया, जो बीते सप्ताह से सोशल मीडिय पर शेयर हो रहा है।। इसके बाद 16 सितंबर को पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस को शिकायत दी।

पीड़िता ने खुद के साथ हुई इस घटना के बारे में बताया- कि वह हरिद्वार में गंगा किनारे हर की पैड़ी पर स्नान कर रही थी, उस दौरान परिवार के लोगों ने ही एक छोटी सी वीडियो क्लिप शूट की थी।

उस दौरान उसने बेहद शालीन तरीके से सलवार सूट पहना हुआ था। उस वीडियो को उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किया था।

लगभग 2 महीने बाद अचानक पता चला कि असली वीडियो के साथ AI से छेड़छाड़ कर उसी हावभाव वाला एक आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर वायरल किया गया है। वीडियो में उनके चेहरे और शरीर को शर्मनाक तरीके से दिखाया गया है।

फर्जी वीडियो ने उसे मानसिक तौर पर बेहद परेशान किया है। लोग उस वीडियो पर आपत्तिजनक कमेंट कर रहे हैं। कई लोग उसे आगे शेयर भी कर रहे हैं।

मामले की जांच कर रही RPS अधिकारी पल्लवी गुप्ता ने बताया- हम जांच कर रहे हैं कि ये वीडियो किसने तैयार किया और किसने शेयर किया। फिलहाल इसे सोशल मीडिया से हटवाया भी जा रहा है।

मुख्यमंत्री का फर्जी वीडियो बनाकर लोगों से 10-10 हजार तक ठगे

तमिलनाडु की साइबर क्राइम टीम ने 12 सितंबर को अलवर जिले से 28 साल के सायबू खान को गिरफ्तार किया। आरोपी ने तमिलनाडु CM विजय का फर्जी एआई जनरेटिड वीडियो बनाया था। वीडियो में चेहरा तो CM विजय का ही था, लेकिन उसमें AI से फर्जी आवाज का इस्तेमाल किया गया था।

फर्जी मैसेज में विजय बोलते हुए दिख रहे हैं…

‘जो भी जरूरतमंद हैं, उनकी हमारी तरफ से मदद की जाती है, आप हमसे संपर्क करें अगर आप जरूरतमंद हैं। इस आवाज के मैसेज के साथ ही वीडियो में एक वॉट्सएप नंबर दिया हुआ था, जिसके नीचे लिखा था- जो मदद करना चाहते हैं वह सहायता राशि इस वॉट्सएप नंबर के जरिए पहुंचा सकते हैं।’

डीपफेक वीडियो के जरिए झांसे में आए कई लोगों ने आरोपियों द्वारा दिए गए खातों/नंबरों पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। कई लोगों से 2,000–2,500 से लेकर 10,000 तक की रकम ली गई।

तमिलनाडु CBCID अब सायबू के जब्त मोबाइल से पता लगा रही है कि कुल कितने लोगों से कितने की ठगी की गई। साथ ही गिरोह में गिरोह में कितने और किस किस राज्य के लोग शामिल हैं।

दोनों ही मामलों को DeepFake वीडियो के जरिए अंजाम दिया गया, क्या है तकनीक इस साइबर एक्सपर्ट केशव शर्मा से जानते हैं ऐसे सवालों के जवाब…

सवाल : क्या है Deepfake बनाने के पीछे पूरा खेल क्या है?

जवाब : ये ऐसा नकली या बदला हुआ वीडियो होता है, जिसे AI और दूसरी डिजिटल तकनीकों की मदद से ऐसे तैयार करते हैं कि ये हूबहू असली जैसा लगता है।

इसमें किसी व्यक्ति की असली फोटो, वीडियो या आवाज को आधार बनाकर उसके चेहरे की अदला-बदली (Face Swap), चेहरे की हरकतों में बदलाव, या आवाज की नकल (Voice Cloning) से वीडियो तैयार करते हैं।

इस तरह के वीडियो बनाने के पीछे साइबर ठगी या फिर वीडियो हटाने के नाम पर पैसे ऐंठने जैसे मकसद छिपे होते हैं।

सवाल : कैसे पहचानें वीडियो असली है या डीपफेक?

जवाब : साइबर एक्सपर्ट केशव शर्मा के अनुसार किसी वीडियो को देखकर तुरंत यह बता पाना मुश्किल है कि वो Deepfake है या अससली। लेकिन कुछ संकेतों से अंतर समझा जा सकता है।

अगर आवाज और होंठों का तालमेल असामान्य लगे, चेहरे की गतिविधियां अजीब दिखें या आंखों, बालों और चेहरे के किनारों में अचानक बदलाव नजर आए तो सतर्क हो जाएं।

इसी तरह व्यक्ति की आवाज सामान्य बोलने की शैली से अलग लगे तो वह भी डीपफेक हो सकता है।

वीडियो किसी अनजान और संदिग्ध अकाउंट से आया हो तो उसकी पुष्टि किए बिना भरोसा न करें।

सवाल : सबसे ज्यादा खतरा कहां है?

जवाब : धार्मिक यात्राओं के दौरान सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट करना आपकी निजी जानकारी को अनजाने में सार्वजनिक कर सकता है। मंदिर, तीर्थस्थल या धार्मिक यात्रा पर परिवार के साथ बनाए गए वीडियो में चेहरा, आवाज, साथ मौजूद लोग, लोकेशन, होटल और यात्रा का समय जैसी कई जानकारियां एक साथ सामने आ जाती हैं।

खासकर लाइव लोकेशन, लगातार Face-to-Camera वीडियो और बच्चों के वीडियो से यह पता लगाना आसान हो सकता है कि आप इस समय कहां हैं और आगे कहां जाने वाले हैं। इसलिए धार्मिक यात्रा पर जाते समय सोशल मीडिया पर क्या साझा कर रहे हैं, इसकी सावधानी से जांच करना जरूरी है।

सवाल : अगर Deepfake बन जाए तो सबसे पहले क्या करें?

जवाब : अगर आपका फर्जी या आपत्तिजनक Deepfake सामने आता है तो घबराकर आरोपी को पैसे देने या तुरंत सब कुछ डिलीट करवाने की कोशिश न करें। सबसे पहले उसके डिजिटल सबूत सुरक्षित करें। वीडियो के Screenshot लें, उसका लिंक सेव करें, जिस अकाउंट से वीडियो पोस्ट हुआ है उसका नाम नोट करें और तारीख-समय दर्ज करें।

साथ ही अपना Original Video भी सुरक्षित रखें, ताकि बाद में दोनों की तुलना की जा सके। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो और अकाउंट को Report करें और पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दें।

अगर आपसे ठगी हो चुकी है तो 1930 पर तुरंत संपर्क करना जरूरी है। इससे ठगी का पैसा फ्रीज करने और वापिस मिलने की संभावना ज्यादा रहती है।

एक गलती बिल्कुल न करें- फर्जी वीडियो को खुद वायरल करके उसका जवाब देने की कोशिश न करें। शिकायत या खंडन के नाम पर उसे बार-बार Forward करने से उसकी पहुंच और बढ़ सकती है।



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