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Rajkumar Santoshi & Sunny Deol: Making Of Ghayal Movie Story


रूमी जाफरी23 मिनट पहले

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फिल्म ‘घायल’ के एक सीन में सनी देओल। - Dainik Bhaskar

फिल्म ‘घायल’ के एक सीन में सनी देओल।

अपने इस कॉलम में मैंने पिछली बार राजकुमार संतोषी जी की बात की थी। जब वे गोविंद निहलानी जी के असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे, तभी उनके जेहन में अपनी स्वयं की फिल्म डायरेक्ट करने का ख्याल आया था। इस फिल्म के लिए उन्होंने सनी देओल से संपर्क किया था। सनी देओल उसमें न केवल हीरो बनने को तैयार हो गए थे, बल्कि स्वयं प्रोड्यूस करने को भी। अब सुनते हैं आगे का किस्सा।

सनी ने जब राज जी की इस फिल्म के बारे में धर्मेंद्र जी को बताया तो उन्होंने सनी से कहा कि तुम राइटर और डायरेक्टर को लेकर जयपुर आ आओ, जहां मैं फिल्म ‘बंटवारा’ की शूटिंग कर रहा हूं। यहीं होटल में बैठकर मैं कहानी सुन लूंगा। सनी, राज जी को लेकर जयपुर पहुंचे। धर्मेंद्र जी ने कहानी सुनी, जो उन्हें बहुत पसंद आई। उन्होंने उसी वक्त सनी से कहा कि इसे मैं प्रोड्यूस करूंगा। फिर उन्होंने राज जी से पूछा, क्या तुम पीएल संतोषी जी के रिश्तेदार हो, क्योंकि तुम्हारे नाम के साथ भी ‘संतोषी’ लगा हुआ है? राज जी ने बताया, ‘हां, मैं उनका बेटा हूं।’ यह सुनते ही धर्मेंद्र जी खड़े हो गए और उन्होंने राज जी को गले लगा लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह तुमने कहानी सुनाई और जितना टैलेंट तुम्हारे अंदर दिखा, उससे ही मुझे लग गया था कि तुम संतोषी जी के परिवार से ही होगे, लेकिन यह नहीं पता था कि तुम उनके बेटे ही हो।

धर्मेंद्र जी ने फिर राज जी से पूछा, “तुम तो मेरे गुरु जी के बेटे हो, तुमने पहले क्यों नहीं बताया?’ इस पर राज जी ने कहा कि वे अपने स्वयं के टैलेंट और अपनी मेहनत से पहचान बनाना चाहते हैं, न कि अपने पिता के नाम का सहारा लेकर। अगर मेरा नाम होगा तो पिता का नाम तो अपने आप ही जुड़ जाएगा। यह सुनकर धर्मेंद्र जी और भी खुश हो गए। उन्होंने कहा कि आज तक मैंने किसी फिल्म में प्रोड्यूसर के तौर पर अपना नाम नहीं दिया था, लेकिन यह पहली फिल्म होगी जिसमें प्रोड्यूसर के रूप में मेरा नाम ‘धर्मेंद्र’ आएगा। इस तरह ‘घायल’ फिल्म की शुरुआत हुई और उसने इतिहास रच दिया। इसी बात पर मुझे एक शेर याद आ रहा है :

इधर फ़लक को है ज़िद बिजलियां गिराने की उधर हमें भी है धुन आशियां बनाने की

यह दो लोगों की जिद का नतीजा था। राज जी की जिद कि वे सनी के साथ ही फिल्म बनाएंगे और सनी की जिद कि वे खुद ही इसे प्रोड्यूस करेंगे (फिर सनी के लिए उनके पिता धर्मेंद्र जी ने फिल्म प्रोड्यूस की)। दरअसल, जब सनी ने इस फिल्म को प्रोड्यूस करने के लिए एक-दो लोगों से बात की और उन्होंने इससे मना कर दिया, तभी उन्होंने ठान लिया था कि अब तो यह काम करके ही रहेंगे।

यह सच है कि राज जी के पिता पीएल संतोषी को धर्मेंद्र जी अपना गुरु मानते थे। फिल्म जगत के बहुत से लोग उन्हें गुरु मानते थे। वे एक कुशल प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, लेखक और गीतकार थे। फिल्म ‘धुरंधर’ का सुपरहिट गीत ‘न तो कारवां की तलाश है’, दरअसल संतोषी जी फिल्म ‘बरसात की एक रात’ का ही गाना है।

दरअसल, जब राज जी बहुत छोटे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। राज जी बताते हैं कि जब उनके पिता बहुत बीमार थे, तब घर चलाने के लिए उन्होंने एक छोटी-सी फिल्म में असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। उस फिल्म के डायरेक्टर प्रताप पुरसवानी थे। बकौल राज जी, वे सांता क्रूज में शूटिंग कर रहे थे और उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे। शूटिंग पर अभिनेता मोहन चोटी काफी देर से पहुंचे। जब प्रताप जी ने उनसे देरी का कारण पूछा तो मोहन चोटी ने बताया कि वे अस्पताल गए थे, क्योंकि उनके गुरु जी पीएल संतोषी जी का निधन हो गया है।

जब मोहन चोटी ने पीएल संतोषी जी के निधन की खबर दी तो राज जी वहीं पीछे खड़े थे। यह सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रताप जी ने मोहन चोटी को बताया कि संतोषी जी का बेटा तो यहीं उनके साथ काम कर रहा है और उसे अपने पिता के निधन के बारे में पता ही नहीं है। मोहन चोटी ने राज जी को तुरंत अस्पताल जाने को कहा और प्रताप जी ने उनकी जेब में सौ-डेढ़ सौ रुपए रखकर उन्हें विदा किया। राज जी टैक्सी पकड़कर रोते हुए अस्पताल पहुंचे। उनके पिता के पार्थिव शरीर को श्री साउंड स्टूडियो ले जाया गया और वहीं पर सभी ने उनके अंतिम दर्शन किए। आज पीएल संतोषी जी की आत्मा बहुत खुश होती होगी कि राज जी ने उनका नाम रोशन किया और उनके काम को आगे बढ़ाया।

राज जी ने इसके बाद कई शानदार फिल्में बनाईं, चाहे वह कॉमेडी हो, ड्रामा हो या एक्शन। सनी के साथ उन्होंने 30 साल पहले एक और फिल्म ‘घातक’ बनाई थी। अब सनी के साथ ही ‘बंटवारा 1947′ बनाई है। ये दोनों 30 साल पहले सोना थे और अब कुंदन बन चुके हैं। राज जी ने अनेक नेशनल अवार्ड, फिल्मफेयर अवार्ड और स्क्रीन अवार्ड जीते हैं और खुद को देश के महान निर्देशकों में स्थापित किया है। आज ‘घायल’ फिल्म का यह गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए :

सोचना क्या, जो भी होगा देखा जाएगा….



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