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Relationship Advice | Should I Confess Love To My Best Friend?


24 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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सवाल- मेरी उम्र 27 साल है। मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है। हम कॉलेज के फर्स्ट ईयर से साथ हैं। अब जॉब के कारण अलग-अलग शहरों में रह रहे हैं, लेकिन हमारी दोस्ती बहुत मजबूत है। उसकी जिंदगी में कुछ भी होता है तो वो सबसे पहले मुझे फोन करता है। मेरे साथ भी ऐसा ही है। लेकिन मेरी एक प्रॉब्लम है। पिछले कुछ समय से ऐसा लग रहा है कि मुझे अपने बेस्ट फ्रेंड से प्यार हो गया है। मैं उसे उस नजर से देख रही हूं, जैसा पहले कभी नहीं देखा।

मैं नहीं जानती कि उसके मन में क्या है। वो तो शायद मुझे सिर्फ बेस्ट फ्रेंड की तरह ही देखता है। क्या मुझे उसे अपने दिल की बात बता देनी चाहिए। कहीं हमारी दोस्ती टूट गई तो। दिल में हर तरह के बुरे ख्याल आते हैं। प्लीज बताइए, क्या करूं?

सोर्स: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- आपको अपने बेस्ट फ्रेंड से प्यार हो गया है। इसमें कुछ भी अजीब या अस्वाभाविक नहीं है। जिसके साथ हम सबसे ज्यादा वक्त गुजारते हैं, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, जिसे अपने दिल की हर बात बताते हैं, उसके लिए मन में रोमांटिक भावनाएं भी विकसित हो जाना बहुत स्वाभाविक है।

दोस्त जब सिर्फ दोस्त नहीं लगता, वहीं से यह दुविधा शुरू होती है कि दिल की बात कह दें या दोस्ती खोने के डर से मन में ही रखें? ऐसे में सवाल ये है कि क्या करें कि न अपनी भावनाओं से भागना पड़े और न किसी रिश्ते को बिना वजह नुकसान पहुंचे।

क्या दोस्ती प्यार में बदल सकती है?

ऐसा नहीं है कि अगर दो लोगों के बीच गहरी दोस्ती है, तो प्यार नहीं हो सकता है? ऐसा भी नहीं होता कि अगर प्यार की शुरुआत हुई तो दोस्ती खत्म हो जाएगी। सच तो यह है कि दोस्ती और प्यार, दोनों अलग भी हो सकते हैं और साथ भी हो सकते हैं। दोनों एक–दूसरे के पूरक भी हो सकते हैं।

दोस्ती और प्यार के बीच सिर्फ इतना ही फर्क है कि दोस्ती में अभी तक ‘रोमांटिक जेस्चर’ नहीं है। यह सच है कि हर दोस्ती, मोहब्बत में बदल जाए, ये जरूरी नहीं। लेकिन हर सच्ची और लंबी चलने वाली मोहब्बत की बुनियाद में एक गहरी दोस्ती जरूर होती है। आप दोनों पहले से ही उस मजबूत बुनियाद पर खड़े हैं।

पहले से नेगेटिव क्यों सोचना?

जब आप दोनों एक-दूसरे के इतने करीब हैं कि जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात सबसे पहले आपस में शेयर करते हैं, तो सिर्फ नेगेटिव ही क्यों सोचना? जैसी भावनाएं, जैसा डर आपके मन में है, वैसा दूसरे व्यक्ति के मन में भी हो सकता है। संभावनाएं असीम हैं। हम जब तक बताएं नहीं, तब तक क्या पता चलेगा।

इसलिए डरें नहीं, खामख्याली न बुनें, पहले से नेगेटिव न सोचें। जो जितना दिख रहा है, बस उतने को ही सच मानें।

जो दोस्ती सच से टूट जाए, वो सच्ची दोस्ती है क्या?

आपका सबसे बड़ा डर ये है कि अपने दिल की बात बताने से कहीं दोस्ती न टूट जाए। लेकिन दोस्ती टूटेगी या नहीं, ये पहले से कैसे तय कर सकते हैं। वो तो उस जगह पहुंचकर, उसमें उतरकर ही समझ आएगा कि क्या होगा। मैं आपके सामने कुछ संभावनाएं रख रही हूं कि क्या–क्या हो सकता है–

  1. हो सकता है कि वो प्यार के प्रपोजल को एक्सेप्ट कर ले और कहे, ‘ऐसी ही फीलिंग्स उसके मन में भी थीं।’
  2. आपकी भावनाओं को समझे, उसकी रिस्पेक्ट करे, लेकिन कहे कि उसके मन में अभी ऐसी भावना नहीं है।
  3. प्यार के प्रपोजल को एक्सेप्ट भी न करे और इस बात पर असहज हो जाए, नाराज हो जाए और दोस्ती तोड़ ले।

समझने वाली बात

मैक्सिमम ये तीन संभावनाएं ही हैं। इसलिए–

  • प्यार को स्वीकार कर लिया तो दोस्ती प्यार में बदल जाएगी।
  • प्यार को नहीं स्वीकारा तो भी दोस्ती तो बनी ही रहेगी।
  • दोस्ती तोड़ ली तो आपको पता चलेगा कि जिसे सच्चा दोस्त समझा था, वो तो दोस्त था ही नहीं। जीवन का एक जरूरी सबक मिलेगा।
  • इसलिए अंतिम निष्कर्ष यही है कि दिल में प्यार है तो कह दें, जता दें। डरें नहीं, संकोच भी न करें।

दिल की बात कब कहें?

अपनी फीलिंग्स के साथ थोड़ा ठहरें। कहना जरूरी है, लेकिन कहने की जल्दबाजी न करें। इस बीच अपनी फीलिंग्स को रोज एक डायरी में नोट करें। आप एक ‘इमोशंस जरनल’ बना सकती हैं। अपनी फीलिंग्स की बारीकियों को समझने की कोशिश करें। जैसेकि-

  • उसकी कौन सी बात आपको अच्छी लगती है।
  • उसकी उपस्थिति का ख्याल आपके दिन भर के रूटीन को कैसे प्रभावित करता है।
  • अगर उसका फोन या मैसेज न आए तो दिन कैसा गुजरता है।
  • अगर उससे बात न हो पाए तो क्या बेचैनी होती है।
  • अगर फोन, मैसेज आए तो क्या पेट में तितलियां उड़ने लगती हैं।

हर दिन के इमोशन को नोट करें। इस एक्सरसाइज का सिर्फ एक ही मकसद है- भावावेग में, जल्दबाजी में कोई कदम न उठाना। अपने इमोशन के साथ ठहरना, रुकना और खुद से थोड़ा दूर जाकर भी उसे देखना।

दिल की बात कैसे कहें?

अपने मन की बात को बिना किसी डर के सामने रखना ही इस उलझन का एकमात्र इलाज है। लेकिन इसके लिए आपको थोड़ा समझदारी से कदम बढ़ाना होगा ताकि सामने वाले को संभलने का मौका मिले।

दिल की बात कहने से पहले खुद से पूछें ये 5 सवाल

  1. क्या यह भावना कई हफ्तों/महीनों से बनी हुई है या कुछ दिनों की है?
  2. क्या मैं सच में उसके साथ रिश्ता चाहती हूं या सिर्फ उसके करीब रहना अच्छा लगता है?
  3. अगर वह मना कर दे तो क्या मैं उसके फैसले का सम्मान कर पाऊंगी?
  4. क्या मैं यह बात इसलिए कहना चाहती हूं कि मन हल्का हो जाए या इसलिए कि रिश्ता आगे बढ़ाना चाहती हूं?
  5. क्या मैं उसके जवाब के लिए मानसिक रूप से तैयार हूं, चाहे वह ‘हां’ हो या ‘ना’?

अगर जवाब ‘ना’ हो तो क्या करें?

दोस्ती में अपनी भावनाएं बताना आपका अधिकार है, लेकिन उन्हें स्वीकार करना या न करना सामने वाले का अधिकार है। अगर वह आपके प्यार को स्वीकार नहीं करता तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी भावनाएं गलत थीं या आपकी दोस्ती बेकार थी।

कुछ समय के लिए दोनों को थोड़ा असहज महसूस हो सकता है। ऐसे में सामने वाले को स्पेस दें, बार-बार इस विषय पर बात करने या अपना फैसला बदलने के लिए दबाव न डालें। अगर दोस्ती सच्ची और परिपक्व है तो थोड़े समय बाद फिर सबकुछ सहज हो जाएगा।

अंतिम बात

हर लव स्टोरी की शुरुआत पहली नजर के आकर्षण से नहीं होती। कुछ रिश्ते समय के साथ धीरे-धीरे आकार लेते हैं। वर्षों की दोस्ती, भरोसा, अपनापन और एक-दूसरे को गहराई से समझने के एहसास से भी प्यार पैदा हो जाता है। भावनाएं दोस्ती से आगे बढ़ जाती हैं।

इसलिए अगर आपको अपने किसी करीबी दोस्त के लिए नए भाव महसूस हो रहे हैं, तो उनसे घबराने या जल्दबाजी में कोई फैसला लेने की जरूरत नहीं है। अपने मन को समय दें, अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और यह जानें कि आप वास्तव में क्या चाहती हैं।

कई बार दिल के सवालों के जवाब तुरंत नहीं मिलते। इसलिए थोड़ा वक्त दें।

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