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- Smokers Lung Vs Healthy; Lung Recovery After Quitting Smoking Tips | Lungs Day 2026
47 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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हमारे फेफड़े हर दिन करीब 20 हजार बार सांस लेकर शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। यही ऑक्सीजन हमें चलने, दौड़ने, सोचने और जिंदा रहने की ताकत देती है।
लेकिन सिगरेट का हरेक कश इन फेफड़ों पर नया हमला करता है। इसका असर तुरंत तो नजर नहीं आता, लेकिन सिगरेट धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता को कम करती है। लंबे समय तक धूम्रपान फेफड़ों को इतना नुकसान पहुंचा सकता है कि कई गंभीर बीमारियों और यहां तक कि लंग कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंग कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा डायग्नोज होने वाले कैंसर में से एक है। यह कैंसर से होने वाली मौतों में भी सबसे बड़ा कारण है।
वहीं, अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (CDC) के मुताबिक, लंग कैंसर से होने वाली लगभग 10 में से 9 मौतें सिगरेट पीने या पैसिव स्मोकिंग से जुड़ी होती हैं।
आज ‘वर्ल्ड लंग्स डे’ है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में फेफड़ों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- हेल्दी लंग्स और स्मोकर्स लंग्स में क्या फर्क है?
- धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़े किस हद तक खुद को रिपेयर कर सकते हैं?
एक्सपर्ट- डॉ. प्रीतपाल कौर, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- स्मोकर्स लंग्स क्या होते हैं?
जवाब- स्मोकर्स लंग्स कोई मेडिकल टर्म नहीं है। डॉक्टर इस शब्द का इस्तेमाल उन लंग्स के लिए करते हैं, जिन पर लंबे समय तक धूम्रपान का असर पड़ चुका होता है। सिगरेट का धुआं लंग्स के स्ट्रक्चर और उनकी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाता है। इसी वजह से ऐसे फेफड़ों को आमतौर पर ‘स्मोकर्स लंग्स’ कहा जाता है।
सवाल- हेल्दी और स्मोकर्स लंग्स में क्या फर्क है?
जवाब- हेल्दी लंग्स साफ, लचीले और ऑक्सीजन को शरीर तक पहुंचाने में अधिक सक्षम होते हैं। वहीं स्मोकर्स लंग्स पर तंबाकू के धुएं का असर दिखने लगता है। ग्राफिक से दोनों का फर्क समझिए-

सवाल- जब कोई सिगरेट का एक कश लेता है तो उसका धुंआ लंग्स में जाकर क्या करता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- जब कोई व्यक्ति सिगरेट का कश लेता है, तो धुआं कुछ ही सेकेंड में रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट से होते हुए लंग्स की सबसे छोटी वायु थैलियों (एल्वियोली) तक पहुंच जाता है।
- सिगरेट के धुएं में 7,000 से ज्यादा केमिकल होते हैं। इनमें कई जहरीले और कैंसर पैदा करने वाले तत्व शामिल होते हैं।
- धुएं में मौजूद टार लंग्स की सतह पर जमने लगता है।
- कार्बन मोनोऑक्साइड ब्लड में पहुंचकर ऑक्सीजन की जगह लेने लगती है। इससे शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है।
- धुएं के केमिकल्स फेफड़ों के अंदर जलन और सूजन पैदा करते हैं।
- समय के साथ फेफड़े खुद को ठीक से साफ नहीं कर पाते, जिससे उनका कामकाज प्रभावित होने लगता है।
सवाल- क्या स्मोकिंग से सिर्फ फेफड़ों को नुकसान होता है?
जवाब- नहीं, यह पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। सिगरेट के धुएं में मौजूद हार्मफुल केमिकल्स लंग्स के जरिए ब्लड में पहुंच जाते हैं और शरीर के अलग-अलग अंगों पर असर डालते हैं। इसके कई हेल्थ रिस्क होते हैं, जैसेकि-
- हार्ट डिजीज
- स्ट्रोक
- मुंह और गले का कैंसर
- आंखों की बीमारियां
- दांत और मसूड़ों से जुड़ी समस्याएं
- रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम्स
सवाल- सिगरेट पीने वाले लोगों को कौन-सी डिजीज का रिस्क ज्यादा होता है?
जवाब- सिगरेट पीने वाले लोगों में फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- 10 साल, 20 साल और 30 साल में स्मोकर्स लंग्स कैसे बदलते हैं?
जवाब- स्मोकिंग का असर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। आमतौर पर लंबे समय तक धूम्रपान करने पर फेफड़ों में ये बदलाव दिख सकते हैं-

सवाल- क्या पैसिव स्मोकिंग भी खतरनाक है? उससे क्या नुकसान होता है?
जवाब- हां, पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरे व्यक्ति की सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू के धुएं के संपर्क में आना भी सेहत के लिए खतरनाक है। धुएं में मौजूद जहरीले केमिकल्स आसपास मौजूद लोगों के शरीर में भी पहुंच जाते हैं। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, जैसेकि-
- रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन
- बच्चों में अस्थमा
- लंग कैंसर
- हार्ट डिजीज
- स्ट्रोक
- आंखों, नाक और गले में जलन
- प्रेग्नेंसी में मां और शिशु पर बुरा असर
- बच्चों के फेफड़ों के विकास पर असर पड़ता है।
सवाल- क्या रोज सिर्फ 1-2 सिगरेट पीना सेफ है?
जवाब- नहीं, सिगरेट के हर कश के साथ शरीर हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आता है। इसलिए धूम्रपान की मात्रा कम करना नुकसान को पूरी तरह नहीं रोकता। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, धूम्रपान से बचने का सबसे अच्छा तरीका इसे पूरी तरह छोड़ना ही है।
सवाल- स्मोकिंग छोड़ने पर लंग्स में क्या बदलाव होते हैं?
जवाब- स्मोकिंग छोड़ने पर शरीर और फेफड़े खुद को रिपेयर करना शुरू कर देते हैं। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चलती है और समय के साथ सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है। बदलावों की टाइमलाइन कुछ इस तरह है-
12 घंटे बाद
- ब्लड में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने लगता है।
- इससे शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलने लगती है।
48 घंटे बाद
- शरीर से निकोटिन लगभग निकल जाता है।
- स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता बेहतर होने लगती है।
3 दिन बाद
- सांस लेना आसान लग सकता है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार शुरू हो जाता है।
3 महीने बाद
- फेफड़े बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं।
- खांसी और सांस फूलने की समस्या कम हो सकती है।
1 साल बाद
- धूम्रपान जारी रखने वालों की तुलना में हार्ट डिजीज का रिस्क लगभग आधा रह जाता है।
- स्वास्थ्य में बड़ा सुधार दिखाई देता है।
ध्यान दें- रिकवरी की रफ्तार हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। यह धूम्रपान की अवधि, मात्रा और व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करता है।
सवाल- क्या सिगरेट छोड़ने के बाद लंग्स पूरी तरह ठीक हो सकते हैं?
जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि धूम्रपान ने लंग्स को कितना नुकसान पहुंचाया है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- सिगरेट छोड़ने के बाद लंग्स की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।
- खांसी, बलगम और सांस लेने से जुड़ी कुछ समस्याएं समय के साथ कम हो सकती हैं।
- लंबे समय तक धूम्रपान से लंग्स में हुए कुछ बदलाव और डैमेज स्थायी भी हो सकते हैं।
- इसलिए जितनी जल्दी धूम्रपान छोड़ा जाए, फेफड़ों के स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है।
सवाल- स्मोकिंग छोड़ने के बाद लंग्स को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
जवाब- स्मोकिंग छोड़ने के बाद फेफड़े धीरे-धीरे रिकवर होने लगते हैं। इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखें, जैसेकि–

फेफड़े शरीर की ऑक्सीजन सप्लाई बनाए रखते हैं। अगर यह सप्लाई रुक जाए, तो कुछ ही मिनटों में जीवन पर संकट आ सकता है। इसलिए फेफड़ों की सुरक्षा के लिए धूम्रपान से दूरी बनाना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है।
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ग्राफिक- अजीत सिंह
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