13 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र
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तमन्ना ने बताया- हर उतार के बाद एक नई उड़ान मिली।
मुंबई की एक स्कूल गर्ल ने 13-14 साल की उम्र में फिल्म साइन की थी। शायद उन्हें भी नहीं पता था कि कैमरे के सामने खड़े होने का यह फैसला उन्हें भारतीय सिनेमा की लंबे समय तक टिकने वाली अभिनेत्रियों में शामिल कर देगा। शुरुआत आसान नहीं थी। पहली फिल्म नहीं चली, साउथ में नई भाषा और माहौल से जूझना पड़ा। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें एक सीन करने में असहजता जताने पर फिल्म से रिप्लेस कर दिया गया। सेट पर उनके सामने कहा गया- ‘हीरोइन बदल दो।’
लेकिन तमन्ना पीछे नहीं हटीं। उन्होंने अपनी सीमा से समझौता नहीं किया और उस घटना को आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने दिया। हैप्पी डेज और कल्लूरी से पहचान मिली, अयान और ‘100 प्रतिशत लव’ ने उन्हें मजबूत अभिनेत्री के तौर पर स्थापित किया। 2015 की बाहुबली: द बिगिनिंग ने उन्हें देशभर के दर्शकों तक पहुंचा दिया। दो दशक से ज्यादा के करियर के बाद तमन्ना सफलता को अवॉर्ड या किसी एक ब्लॉकबस्टर से नहीं, बल्कि लगातार काम और नए किरदार निभाने के मौकों से जोड़ती हैं।
आज की सक्सेस स्टोरी में तमन्ना भाटिया के करियर से जुड़ी कुछ और खास बातें

13 साल की उम्र में साइन की पहली फिल्म
तमन्ना भाटिया का जन्म 21 दिसंबर 1989 को मुंबई में सिंधी मूल के पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता संतोष भाटिया डायमंड मर्चेंट हैं। उनकी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई मुंबई में हुई। तमन्ना 13 साल की उम्र से पृथ्वी थिएटर से जुड़ गई थीं और स्टेज परफॉर्म किया करती थीं। एक्टिंग के हुनर से उन्होंने कम उम्र में पहचान बना ली थी।
2005 में उन्होंने हिंदी फिल्म ‘चांद सा रोशन चेहरा’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। फिल्म साइन करते वक्त उनकी उम्र करीब 13.5 साल थी। प्रमोशन के दौरान वह 15 साल की थीं और दसवीं की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी। इसके बाद तमन्ना के लिए काम पाना मुश्किल हो रहा था। करियर में बड़े बदलाव के लिए उन्होंने साउथ सिनेमा का रुख किया।
डायरेक्टर-प्रोड्यूसर का कहना था- तुम लड़कों जैसे चलती हो। करियर के शुरुआती दिनों के बारे में तमन्ना ने कहा था कि उन्हें इंडस्ट्री में आए ज्यादा समय नहीं हुआ था। तब एक डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था- तुम एक्ट या डांस लड़कों से जैसे करती हो। अपने एक्ट में लड़कियों जैसी लचक लाओ।
तमन्ना ने आगे कहा था- मैं तब भी लड़कियों जैसी ही चलती थी, लेकिन उनके कहने के बाद मैंने और मेहनत की।
हिंदी फिल्म नहीं चली तो साउथ में शुरू हुआ असली संघर्ष
2005 में तमन्ना ने तेलुगु फिल्म श्री से साउथ सिनेमा में एंट्री की और 2006 में तमिल फिल्म केडी में नजर आईं। उस समय वह ऐसी इंडस्ट्री में काम कर रही थीं, जिसकी भाषा और संस्कृति उनके लिए नई थी। तमन्ना ने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्हें साउथ इंडियन सिनेमा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्हें बस एक्टिंग करनी थी। उन्होंने कहा था कि उस समय सफलता की गणना के बजाय उनका ध्यान काम करते रहने और सीखने पर था।
यहां उनका संघर्ष सिर्फ फिल्मों के ऑडिशन या रिजेक्शन तक सीमित नहीं था। उन्हें नई भाषाएं सीखनी थीं, नए निर्देशकों के साथ काम करना था और ऐसे माहौल में खुद को साबित करना था, जहां वह बाहर से आई कलाकार थीं।
तमन्ना के मुताबिक, साउथ सिनेमा में काम करने से उन्हें फिल्मों में मौके ही नहीं मिले, बल्कि अलग संस्कृति और भाषाओं को समझने का अनुभव भी मिला। बाद में वह तमिल और तेलुगु दोनों भाषाओं में काम करने लगीं।

सेट पर मिला सबसे बड़ा झटका- ‘हीरोइन बदल दो’
तमन्ना के शुरुआती करियर का सबसे चौंकाने वाला किस्सा वह है, जब कम उम्र में उन्हें एक फिल्म के सेट पर अपनी बात रखने की कीमत चुकानी पड़ी। तमन्ना ने द लल्लनटॉप के ‘न्यूजरूम’ में बताया था कि वह साउथ के एक बड़े स्टार के साथ फिल्म कर रही थीं। एक सीन को लेकर वह सहज नहीं थीं। उन्होंने साफ कहा कि वह सीन नहीं करना चाहतीं।
तमन्ना के मुताबिक, सीन इंटीमेट नहीं था, लेकिन उसमें कुछ ऐसा था जिसे करने में वह सहज महसूस नहीं कर रही थीं। उन्होंने अपनी बात रखी तो सामने से जवाब मिला- ‘हीरोइन बदल दो।’ एक नई और कम उम्र की अभिनेत्री के लिए यह बड़ा झटका हो सकता था। उस समय डर हो सकता था कि अगर एक फिल्म हाथ से निकल गई तो आगे क्या होगा। लेकिन तमन्ना ने इस घटना को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
तमन्ना ने बाद में कहा कि उन्हें उस समय के रिएक्शन पर गर्व है। उन्होंने न अपना आपा खोया और न यह सोचकर टूट गईं कि रिप्लेस किए जाने के बाद उनका करियर खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में वही लोग उनका सम्मान करते हैं, क्योंकि उन्होंने दबाव में समझौता नहीं किया।
तमन्ना ने सीखा- अपनी बात रखने के लिए शोर मचाना जरूरी नहीं
इस घटना से तमन्ना ने एक महत्वपूर्ण बात सीखी। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति आपके साथ गलत व्यवहार करता है तो जरूरी नहीं कि आप भी उसी तरह प्रतिक्रिया दें। उन्होंने कहा कि बिना चिल्लाए, बिना लड़ाई किए और बिना व्यवहार खराब किए भी अपनी बात पर कायम रहा जा सकता है। उनके शब्दों में, कई बार आक्रामकता से ज्यादा ताकत शांति में होती है।
‘हैप्पी डेज’ ने बदली तस्वीर, ‘कल्लूरी’ ने तमिल सिनेमा में पहचान दिलाई
2007 तमन्ना के करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसी साल तेलुगु में हैप्पी डेज और तमिल में कल्लूरी रिलीज हुईं। दोनों फिल्मों में उन्होंने कॉलेज स्टूडेंट के किरदार निभाए और युवा दर्शकों के बीच पहचान बनाई। हैप्पी डेज की सफलता ने तेलुगु सिनेमा में उनकी स्थिति मजबूत की, जबकि कल्लूरी ने तमिल दर्शकों के बीच पहचान दी।
तमन्ना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें आज भी कल्लूरी और हैप्पी डेज जैसे शुरुआती कामों को याद किया जाना वैलिडेटिंग लगता है। उनके लिए सिर्फ बॉक्स ऑफिस सफलता महत्वपूर्ण नहीं रही, बल्कि ज्यादा मायने रखता है कि दर्शक वर्षों बाद भी उनके किरदारों को याद करते हैं।

‘अयान’ और ‘100 प्रतिशत लव’ ने बनाई मजबूत पहचान
2009 में तमन्ना को तमिल सिनेमा की अयान जैसी सफल फिल्म मिली। इसके बाद ‘100 प्रतिशत लव’ ने उनके करियर को और मजबूती दी। ‘100 प्रतिशत लव’ के बाद तमन्ना ने माना था कि वह फिल्म इंडस्ट्री को ज्यादा गंभीरता से देखने लगी थीं। इससे पहले वह लगातार काम कर रही थीं, लेकिन इस दौर में उन्हें करियर को लेकर चुनाव करने की जरूरत महसूस होने लगी।
यहीं से तमन्ना के करियर में बदलाव आया। उन्होंने एक ही तरह के किरदारों को दोहराने के बजाय अलग-अलग भूमिकाएं चुनने पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा था कि इस इंडस्ट्री में करियर को पूरी तरह प्लान नहीं किया जा सकता, क्योंकि यहां अनिश्चितता बहुत है। इसलिए रणनीति भी बदलती रहनी चाहिए और कोशिश होनी चाहिए कि वह खुद को दोहराएं नहीं।
असफल फिल्मों के दौर में भी तमन्ना ने जारी रखा कामयाबी का सिलसिला
तमन्ना की कहानी को सिर्फ हिट फिल्मों की कहानी कहना अधूरा होगा। उनके करियर में कई ऐसी फिल्में भी आईं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। अनंद तांडवम, एंडुकांटे प्रेमंता, हिम्मतवाला, हमशकल्स और आगाडु जैसी फिल्मों को वह सफलता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद थी।
खासकर हिंदी सिनेमा में हिम्मतवाला और हमशकल्स के बाद सवाल था कि क्या वह बॉलीवुड में अपनी जगह स्थायी तौर पर बना पाएंगी। लेकिन तमन्ना का जवाब किसी बयान से नहीं, बल्कि लगातार काम करने से आया। वह साउथ में काम करती रहीं, हिंदी फिल्मों में लौटती रहीं और धीरे-धीरे ऐसा करियर तैयार करती गईं, जिसमें एक इंडस्ट्री की सफलता दूसरी इंडस्ट्री के अवसरों का रास्ता खोलती रही।

तमन्ना बाहुबली को अपने करियर का गेम चेंजर मानती हैं।
2015- ‘बाहुबली’ बनी करियर की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट
फिर आया 2015
एसएस राजामौली की बाहुबली: द बिगिनिंग में तमन्ना ने अवंतिका का किरदार निभाया। फिल्म सिर्फ बड़ी हिट नहीं बनी, बल्कि भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई। इस फिल्म ने तमन्ना को उन दर्शकों तक पहुंचाया, जो शायद उनके पहले के तमिल और तेलुगु काम से परिचित नहीं थे।
तमन्ना बाहुबली को अपने करियर का गेम चेंजर मानती हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि बाहुबली ने उनके नजरिए को व्यापक किया और इसके बाद उनके करियर का बड़ा हिस्सा खुद को लगातार रीइन्वेंट करने की कोशिश रहा। बाहुबली के बाद 2017 में बाहुबली 2: द कन्क्लूजन ने उस पहचान को और बड़ा कर दिया। अब तमन्ना सिर्फ साउथ की अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि देशभर में पहचाना जाने वाला नाम बन चुकी थीं।
‘सफलता’ की तमन्ना की परिभाषा अलग है
आज जब तमन्ना अपने करियर को पीछे मुड़कर देखती हैं तो सफलता का पैमाना सिर्फ अवॉर्ड, बॉक्स ऑफिस या किसी एक सुपरहिट फिल्म को नहीं मानतीं। उनके लिए सबसे बड़ी सफलता है कि एक कलाकार को दोबारा मौका मिले।
तमन्ना का मानना है कि आज के दौर में अगर दर्शक किसी कलाकार को अलग-अलग किरदारों में बार-बार देखना चाहते हैं, तो यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यही वजह है कि वह खुद को किसी एक बॉक्स में बंद नहीं मानतीं।
उन्होंने कहा, “मैं आज खुद को किसी तरह के बॉक्स में बंधा हुआ महसूस नहीं करती। मुझे लगता है कि मैं किसी भी तरह का किरदार कर सकती हूं।” यह बात उनके करियर पर भी फिट बैठती है। कॉलेज गर्ल से लेकर कमर्शियल फिल्मों की हीरोइन, गंभीर किरदारों से लेकर डांस नंबर और ओटीटी प्रोजेक्ट्स तक- तमन्ना ने खुद को एक ही छवि में कैद नहीं होने दिया।
‘अभी पहली बार खुद को सबसे ज्यादा फ्री महसूस कर रही हूं’
तमन्ना के करियर के मौजूदा दौर की खासियत यही है कि अब उन्हें किसी एक तरह की भूमिका के साथ नहीं जोड़ा जाता। एक समय था जब किसी अभिनेत्री की खास इमेज बन जाती थी और उससे बाहर निकलना मुश्किल होता था। तमन्ना ने इस दबाव को धीरे-धीरे तोड़ा।
उन्होंने कहा कि आज वह अपने करियर में पहली बार खुद को ज्यादा फ्री महसूस कर रही हैं। अब उन पर किसी खास तरह के रोल करने की बाध्यता नहीं है। दर्शकों ने उन्हें अलग-अलग तरह के काम में स्वीकार किया है। यही स्वीकार्यता उन्हें नए किरदारों और प्रयोगों की आजादी देती है।

‘करियर की सबसे मुश्किल चीज थी- टिके रहना’
दो दशक से ज्यादा लंबे करियर के बारे में जब तमन्ना से पूछा गया कि सबसे मुश्किल क्या रहा, तो उनका जवाब सीधा था- ‘स्टेइंग पुट’ यानी टिके रहना। किसी फिल्म का चलना मुश्किल नहीं, बल्कि हर उतार-चढ़ाव के बाद अगली सुबह फिर सेट पर पहुंचना मुश्किल होता है।
किसी अभिनेता को एक हिट मिल सकती है, लेकिन उसके बाद लगातार काम मिलना, खुद को दोहराने से बचना, असफलताओं से निकलना और दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाए रखना कहीं ज्यादा कठिन है। तमन्ना के करियर में यही लगातार बने रहने की क्षमता सबसे बड़ा फैक्टर रही है।
उन्होंने यह भी माना कि हर दिन अच्छा नहीं होता। लेकिन अगर किसी कलाकार को लंबे समय तक इस इंडस्ट्री में रहना है तो उसे टिके रहना सीखना होगा। तमन्ना के लिए यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि उन्हें अपने काम से प्यार है। एक्टिंग और परफॉर्म करने का जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा।

‘आज की रात’ गाने को यूट्यूब पर 100 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।
‘आज की रात’ से फिर दिखा डांस का जलवा
तमन्ना की पैन-इंडिया लोकप्रियता का एक और बड़ा अध्याय स्त्री 2 के गाने आज की रात से जुड़ा है। यह गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया। तमन्ना के डांस और स्क्रीन प्रेजेंस की खूब चर्चा हुई। इस गाने के पीछे उनकी मेहनत भी कम नहीं थी। तमन्ना ने बताया कि उन्होंने लगभग 15 से 20 दिन इसकी रिहर्सल की थी। कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने उनके शरीर और क्षमता के हिसाब से स्टेप्स तैयार किए थे, ताकि मूवमेंट उनके लिए नैचुरल और प्रभावी लगे।
खास बात यह है कि तमन्ना खुद मानती हैं कि वह पारंपरिक अर्थों में ट्रेंड डांसर नहीं हैं। इसलिए कोरियोग्राफर का कलाकार की क्षमता समझकर काम करना महत्वपूर्ण था। गाने की शूटिंग भी आसान नहीं थी। आज की रात की शूटिंग लगभग 5 डिग्री तापमान में हुई थी और तमन्ना ने इसे अपने जन्मदिन पर शूट किया था। उन्होंने इसे खास अनुभव बताया और कहा था कि किसी कलाकार के लिए काम करते हुए जन्मदिन मनाना बड़ी खुशी की बात है।
विजय गांगुली को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर तमन्ना ने जताई खुशी
2026 में आज की रात के कोरियोग्राफर विजय गांगुली को इस गाने के लिए बेस्ट कोरियोग्राफी का नेशनल अवॉर्ड मिला। गांगुली ने अवॉर्ड के बाद तमन्ना की तारीफ करते हुए कहा कि अगर उन्होंने इतनी शानदार परफॉर्मेंस नहीं दी होती तो कोरियोग्राफी वैसी नहीं दिखती। उन्होंने इसे पूरी टीम की मेहनत बताया।
तमन्ना ने भी गांगुली के काम की तारीफ की है। उनका मानना है कि क्रिएटिव काम में ईगो को अलग रखना जरूरी है। असली बात यह है कि कलाकार अपने काम के सामने कितना सरेंडर और कितनी ईमानदारी से अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकता है। यह सोच तमन्ना के करियर पर भी लागू होती है। उन्होंने हर दौर में खुद को बदलने की कोशिश की है।

तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
‘अभी मेरा सफर खत्म नहीं हुआ’
20 साल से ज्यादा समय तक फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी तमन्ना को लगता है कि उनके सफर को कुछ मिनटों में सेलिब्रेट करके खत्म नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, अभी बहुत काम बाकी है। तमन्ना की फिल्म ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ हाल में रिलीज हुई है। तमन्ना ने बताया कि सिनेमाघरों में दर्शक इस फिल्म को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि एक पर्व की तरह देख रहे हैं। लोग थिएटर में पॉपकॉर्न छोड़कर ठेकुआ बांट रहे हैं और जूते-चप्पल बाहर उतारकर हॉल में जा रहे हैं।
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