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44 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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सवाल- मैं जयपुर से हूं। मेरा 11 साल का बेटा हर काम आखिरी समय के लिए टाल देता है। स्कूल प्रोजेक्ट हो, होमवर्क हो या टेस्ट की तैयारी, तब तक शुरू नहीं करता, जब तक डेडलाइन सिर पर न आ जाए। फिर जल्दी-जल्दी काम पूरा करने की कोशिश में तनाव लेने लगता है।
स्कूल से आकर मोबाइल देखता रहता है। ‘सिर्फ 10 मिनट’ कहकर एक घंटा बिता देता है। फिर होमवर्क करने के लिए पैनिक करता है। मैं उसे डांटना नहीं चाहती, बल्कि टाइम मैनेजमेंट सिखाना चाहती हूं। हम बच्चों को समय की अहमियत और अपने कामों को व्यवस्थित करना कैसे सिखा सकते हैं?
एक्सपर्ट: रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई
जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। 11-15 साल की उम्र में बच्चे धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई, खेल, दोस्तों और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना सीख रहे होते हैं। इसलिए इस उम्र में समय का सही इस्तेमाल करना हर बच्चे के लिए आसान नहीं होता।
अगर आपका बेटा होमवर्क या दूसरे जरूरी काम बार-बार टाल देता है, तो इसे सिर्फ लापरवाही या आलस न समझें। इसके पीछे कई व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि सही मार्गदर्शन और कुछ छोटी-छोटी आदतों की मदद से बच्चे धीरे-धीरे बेहतर टाइम मैनेजमेंट सीख सकते हैं।
टाइम मैनेजमेंट खराब होने के कारण
इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं-
- बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंटल फेज में होता है। इसलिए उन्हें समय का सही अंदाजा लगाने और पहले से योजना बनाकर काम करने में दिक्कत होती है।
- कुछ बच्चों को अगर कोई काम बहुत बड़ा या मुश्किल लगता है, इसलिए वे उसे शुरू करने से बचते हैं।
- कुछ बच्चों को लगता है कि अभी काफी समय है। इसलिए वे मोबाइल, गेम्स या दूसरे मनोरंजन में उलझ जाते हैं।
इसके पीछे कई और वजहें भी हो सकती हैं। ग्राफिक में देखिए-

खराब टाइम मैनेजमेंट के संकेत
छोटे बच्चों में कभी-कभार काम टालना या चीजें भूल जाना सामान्य है। लेकिन अगर यह बार-बार हो और इसकी वजह से पढ़ाई, होमवर्क या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो यह खराब टाइम मैनेजमेंट का संकेत है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

छोटी-छोटी आदतों से सिखाएं टाइम मैनेजमेंट
इसका सबसे अच्छा तरीका रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों के जरिए बच्चे को समय की अहमियत समझाना है। इसमें माता-पिता का धैर्य और निरंतर सहयोग जरूरी है। बच्चे को टाइम मैनेजमेंट सिखाने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखें-
1. साथ मिलकर रूटीन बनाएं
- पढ़ाई, खेल, आराम और स्क्रीन टाइम का समय तय करें।
- रूटीन बनाते समय बच्चे की भी राय लें।
- बहुत सख्त शेड्यूल न बनाएं।
- रोज लगभग एक जैसा रूटीन रखने की कोशिश करें।
2. काम को छोटे हिस्सों में बांटना सिखाएं
- प्रोजेक्ट या परीक्षा की तैयारी को छोटे-छोटे टास्क में बांटें।
- एक बार में एक लक्ष्य पूरा करने पर फोकस करें।
- हर छोटे लक्ष्य को पूरा करने पर बच्चे की तारीफ करें।
- इससे काम टालने की आदत कम होती है।
3. प्रिऑरिटी सेट करना सिखाएं
- बच्चे को जरूरी और गैर-जरूरी कामों में फर्क समझाएं।
- काम की प्रिऑरिटी तय करना सिखाएं।
- बच्चे को सिखाएं कि पहले जरूरी काम निपटाएं, फिर मनोरंजन करें।
4. स्क्रीन टाइम फिक्स करें
- मोबाइल और टीवी के लिए निश्चित समय तय करें।
- पढ़ाई के दौरान स्क्रीन से दूरी बनाने के लिए कहें।
- माता-पिता भी अपना स्क्रीन टाइम कम रखें।
5. कैलेंडर और प्लानर का यूज सिखाएं
- टेस्ट, प्रोजेक्ट और जरूरी डेट्स लिखने को कहें।
- वीक की शुरुआत में ही काम की चेकलिस्ट बनवाएं।
- काम पूरा होने पर उसे ‘टिक’ करने काे कहें।
- इससे कोई भी काम मिस नहीं होगा।
6. जिम्मेदारी लेना सिखाएं
- बच्चे को अपना काम याद रखने की आदत डलवाएं।
- छोटी गलतियों से सीखने का अवसर दें।
- इससे बच्चे में धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
7. खुद रोल मॉडल बनें
- बच्चे अक्सर वही सीखते हैं, जो घर में देखते हैं।
- इसलिए अपना काम समय पर पूरा करें।
- बच्चे के सामने अपना डे-प्लान बनाएं।
- समय की पाबंदी को घर का कल्चर बनाएं।

‘पहले काम, फिर मनोरंजन’ का रूल
बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि हर काम का एक क्रम होता है। अगर होमवर्क बाकी है और पहले टीवी देखने बैठ जाएंगे, तो स्ट्रेस बढ़ना स्वाभाविक है। इसके लिए आप घर में एक सरल नियम बना सकती हैं- ‘पहले काम, फिर मनोरंजन।’
इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे खेल या टीवी बिल्कुल न देखें। इसका मतलब यह है कि जरूरी काम पूरे करने के बाद बिना स्ट्रेस के उसका आनंद ले सकें। यह आदत जीवन के हर क्षेत्र में काम आती है।

तारीफ से बढ़ता आत्मविश्वास
ज्यादातर माता-पिता सिर्फ तब ध्यान देते हैं, जब बच्चा गलती करता है। लेकिन अच्छी आदतों को मजबूत बनाने के लिए पॉजिटिव रिस्पॉन्स बहुत जरूरी है। अगर बच्चा समय पर होमवर्क पूरा करे या अपना रूटीन फॉलो करे, तो उसकी तारीफ करें। जैसे-
- “मुझे अच्छा लगा कि तुमने अपना काम समय पर पूरा किया।”
- “आज तुमने अपने समय को बहुत अच्छे से मैनेज किया।”
इस तरह की तारीफ से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है।
पेरेंट्स की कॉमन गलतियां
कई बार माता-पिता जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जो बच्चे का तनाव बढ़ा देती हैं। इसलिए पेरेंट्स को इनसे बचना चाहिए, जैसेकि-
- हर समय डांटना।
- बच्चे को आलसी कहना।
- ज्यादा स्ट्रिक्ट शेड्यूल बनाना।
- हर मिनट कंट्रोल करना।
- सिर्फ कमियां निकालना।
- दूसरों से तुलना करना।
- स्क्रीन पूरी तरह बंद कर देना।
- अनरियलिस्टिक उम्मीदें रखना।
प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी
इन स्थितियों में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से सलाह लेना बेहतर है-
- जब बच्चे को लगभग हर काम में ज्यादा समय लगे।
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो।
- निर्देश बार-बार भूल जाए।
- पढ़ाई और रोजमर्रा के काम भूलने लगे।
- लगातार तनाव में रहे।
अंत में यही कहूंगी टाइम मैनेजमेंट बच्चों को एक दिन में नहीं सिखाया जा सकता। यह धीरे-धीरे विकसित होने वाला स्किल है। आपका बेटा अभी ऐसी उम्र में है, जहां सही मार्गदर्शन से वह समय की कीमत और अपनी जिम्मेदारियों को मैनेज करना सीख सकता है।
याद रखिए, लक्ष्य उसे हर समय व्यस्त रखना नहीं, बल्कि यह सिखाना है कि वह अपने समय का संतुलित उपयोग कैसे करे।
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