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US Senator Lindsey Graham Death Update; Poisoning Suspicion


राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। लिंडसे ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और

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ग्राहम की मौत पर एक तरफ ईरानी मीडिया जश्न मना रही है, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि कहीं जहर देकर तो नहीं मारा गया। मौत बीमारी से हुई या कोई बड़ी साजिश; इस कंट्रोवर्सी को डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: लिंडसे ग्राहम की मौत की आधिकारिक वजह क्या बताई गई?

जवाबः ग्राहम के ऑफिस ने आधिकारिक बयान में सिर्फ इतना बताया कि उनकी मौत ‘बीमारी की वजह’ से हुई। 12 जुलाई को वॉशिंगटन डीसी के मेडिकल एग्जामिनर ऑफिस ने प्रारंभिक ऑटोप्सी के आधार पर बताया- ‘Aortic Dissection due to Arteriosclerotic Cardiovascular Disease’

यानी धमनियों के सख्त होने की बीमारी की वजह से एओर्टा की अंदरूनी परत फट गई। दरअसल, एओर्टा इंसानी शरीर की सबसी बड़ी धमनी है। यह दिल से साफ खून लेकर पूरे शरीर में पहुंचाती है। एओर्टा की सबसे अंदरूनी परत में दरार की वजह से ग्राहम की मौत हुई।

हालांकि ग्राहम का डेथ सर्टिफिकेट अभी जारी नहीं हुआ है। जहर से जुड़ी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही कन्फर्म होगा कि मौत नेचुरल थी या किसी साजिश के तहत जहर दिया गया।

71 साल के ग्राहम यूक्रेन जाने से पहले स्वस्थ दिख रहे थे। उन्हें अगले हफ्ते एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करनी थी। ट्रम्प ने एनबीसी न्यूज से कहा, ‘मौत से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से बात हुई थी। ग्राहम की आवाज ठीक लग रही थी। हालांकि वह थोड़े थके हुए लग रहे थे।’

लिंडसे ग्राहम ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। रूस के साथ जंग शुरू होने के बाद से यह ग्राहम की 10वीं यूक्रेन यात्रा है।

लिंडसे ग्राहम ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। रूस के साथ जंग शुरू होने के बाद से यह ग्राहम की 10वीं यूक्रेन यात्रा है।

सवाल-2: ग्राहम की मौत से ईरान में जश्न क्यों मनाया जा रहा?

जवाबः लिंडसे ग्राहम की मौत को ईरानी मीडिया ने सबसे बड़े दुश्मन की मौत बताया। मेहर न्यूज एजेंसी ने लिखा- ‘ग्राहम ईरान को तबाह करने का अपना सपना कब्र तक ले गए।’ सरकारी न्यूज़ चैनल IRINN ने तो ग्राहम की मौत पर ईरानी जनता को बधाई तक दे दी।

ग्राहम का रवैया हमेशा इजराइल समर्थक और धुर ईरान विरोधी रहा है…

  • 2015 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ समझौता किया, तब ग्राहम ने खुलकर मिलिट्री एक्शन लेने की सलाह दी।
  • 14 फरवरी 2026 में एक रैली के दौरान ईरान का पुराना झंडा लहराते हुए ग्राहम ने कहा था, ‘अब अयातुल्लाह के जाने का समय आ गया है।’ उन्होंने ट्रम्प को सलाह दी थी कि ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि होनी चाहिए।
  • 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमला किया तब भी ग्राहम ने कहा था, ‘जब हम इस सत्ता को खत्म कर देंगे, तो पूरा मिडिल ईस्ट हमारा होगा। हम यहां से बहुत पैसा कमाएंगे।’ वो कहते थे कि अमेरिका को ईरान के खार्ग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल कर लेना चाहिए।
जर्मनी में 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान ईरान में मानवाधिकारों के लिए प्रदर्शन हुआ। इस दौरान ग्राहम ने लोगों का संबोधित करते हुए ईरान का पुराना झंडा लहराया, जिसमें बीच में एक शेर बना होता था।

जर्मनी में 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान ईरान में मानवाधिकारों के लिए प्रदर्शन हुआ। इस दौरान ग्राहम ने लोगों का संबोधित करते हुए ईरान का पुराना झंडा लहराया, जिसमें बीच में एक शेर बना होता था।

  • ग्राहम अमेरिका में इजराइल के सबसे करीबी नेताओं में से एक थे। उन्होंने इजराइल के गाजा पर हमलों का समर्थन किया था। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ‘ग्राहम, नेतन्याहू को सिखाते थे कि कैसे ट्रम्प से कार्रवाई कराने के लिए पैरवी की जाए।’

अमेरिकी लेखक रब्बी शमूएल ने लिखा है, ‘5 दिन पहले ईरान ने अमेरिका के महान सीनेटर को मारने की धमकी दी थी। अब उनकी मृत्यु हो गई, वो भी यूक्रेन से लौटने के अगले ही दिन।’

अमेरिकी दक्षिणपंथी पत्रकार लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ‘IRGC ने उन्हें मारने की धमकी दी थी। खामेनेई के अंतिम संस्कार में धमकी भरे पोस्टर लहराए जा रहे थे। रूस भी इस अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था। वो ईरान को परमाणु हथियार देने की बात कर रहा था। अब यूक्रेन से लौटने के बाद ग्राहम की मौत हो गई। यह सब महज एक संयोग तो नहीं लगता।’

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने ग्राहम के पोस्टर लगाए, जिसमें लिखा था- ‘आज नहीं तो कल तुम भी मारे जाओगे।’

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने ग्राहम के पोस्टर लगाए, जिसमें लिखा था- ‘आज नहीं तो कल तुम भी मारे जाओगे।’

सवाल 3: तो क्या ग्राहम की मौत के पीछे रूस की साजिश है?

जवाबः अभी तक किसी बड़ी एजेंसी या अधिकारी ने रूसी साजिश की बात नहीं की। सबकुछ कयासों में चल रहा है…

रूसी सोशियोलॉजिस्ट इगोर ईदमन के मुताबिक, ग्राहम की मौत में रूस खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। रूस के पास उन्हें मारने का कारण भी था।

ईदमन ने बेलारूस के मीडिया आउटलेट NEXTA को बताया, ‘ग्राहम यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक थे। उन्होंने 10 जुलाई को कीव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए मना लिया है। यूक्रेन से लौटकर ग्राहम की मौत होना सबसे बड़ा संकेत देती है कि इसमें रूस का हाथ हो सकता है।’

ग्राहम अमेरिका से प्लेन के जरिए पोलैंड पहुंचे। वहां से 10-12 घंटे की ट्रेन यात्रा करके यूक्रेन की राजधानी कीव गए। इसी रास्ते से वापस भी लौटे। ईदमन के मुताबिक, इसी दौरान किसी खुफिया रूसी एजेंट को जहर देने का मौका मिल गया होगा।

पूर्व CIA अधिकार माइकल सेलर्स के मुताबिक, ‘ग्राहम की हत्या के अभी कोई सबूत नहीं दिख रहे हैं। लेकिन जिन स्थितियों में उनकी मौत हुई है, उस हिसाब से इस एंगल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस दिशा में भी जांच होनी चाहिए।’

रूस का खुलकर विरोध करते थे ग्राहम, निशाने पर थे…

  • 2022 में जब रूस-यूक्रेन जंग शुरू हुई थी, तो उन्होंने लाइव टीवी पर कहा था कि यह जंग रोकने का एक ही तरीका है- रूस में कोई इस आदमी (पुतिन) को रास्ते से हटा दे। वो पुतिन को आधुनिक समय का हिटलर कहते थे।
  • 2023 में रूस ने ग्राहम का एक एडिटेड वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वे कह रहे थे, ‘रूसी लोग मर रहे हैं। यह हमारे द्वारा सबसे सही जगह खर्च किया पैसा है।’ पूरी क्लिप में पता चला कि उन्होंने पैसों वाली बात यूक्रेन को दी जा रही सैन्य मदद के लिए कही थी। रूसी मीडिया के मुताबिक इस घटना के बाद रूस ने ग्राहम को अपनी वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया था।
  • ग्राहम ने सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025 भी अमेरिकी सीनेट में पेश किया था। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। उनका कहना था कि तेल बेचकर कमाए पैसे रूस, यूक्रेन के खिलाफ जंग में खर्च कर रहा है। ग्राहम ने इन पैसों को ‘ब्लड मनी’ कहा।
रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए मार्च 2022 में बनी कमेटी की बैठक के दौरान लिंडसे ग्राहम।

रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए मार्च 2022 में बनी कमेटी की बैठक के दौरान लिंडसे ग्राहम।

सवाल-4: लिंडसे ग्राहम के निशाने पर भारत कैसे आ गया था?

जवाबः लिंडसे ग्राहम ने अपने करियर में कई मौकों पर भारत को निशाना बनाया है। रूस-यूक्रेन जंग के बाद यह और बढ़ गया…

  • 2009 में ग्राहम ने अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स में क्लाइमेट चेंज से जुड़ा कानून पारित करने को लेकर एक ओपिनियन लिखा था। इसमें उन्होंने कहा- भारत और चीन जैसे देशों पर बॉर्डर टैक्स लगना चाहिए, क्योंकि उनकी फैक्ट्रियां पर्यावरण मानकों का पालन नहीं करती हैं। इससे होने वाली कमाई अमेरिका के घरेलू व्यापारियों के काम आएगी।
  • 2019 में जब भारत ने अनुच्छेद-370 हटाया था, तब ग्राहम ने कुछ और सांसदों के साथ मिलकर राष्ट्रपति ट्रम्प को एक चिट्ठी लिखी थी- ‘कश्मीर में हालात हर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। राष्ट्रपति से अपील है कि वे भारत के पीएम नरेंद्र मोदी से बात कर कश्मीर में इंटरनेट शुरू करने, कर्फ्यू हटाने और हिरासत में लिए लोगों को रिहा करने के लिए कहें।
  • जुलाई 2025 में ग्राहम ने चेतावनी दी थी, ‘मैं चीन, भारत और ब्राजील से कहूंगा कि अगर आपने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, तो हम आपको तबाह कर देंगे। आपकी अर्थव्यवस्था को कुचल देंगे। आप जो कर रहे हैं वो खून का पैसा है।’

ग्राहम ने भारत को रूस या अमेरिका में से किसी एक को चुनने का विकल्प भी दिया था। साथ ही कहा था, ‘मुझे विश्वास है कि वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चुनेंगे।’

इसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 25% पेनल्टी टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर लगने वाला कुल टैरिफ बढ़कर 50% तक हो गया था।

अगस्त 2025 में ग्रहाम ने फिर दावा किया कि भारत ने टैरिफ के दबाव के चलते रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। भारत पर दबाव की वजह से पुतिन जंग में समझौते के लिए तैयार हो गए हैं।

सवाल-5: ग्राहम की मौत ट्रम्प के लिए कितना बड़ा झटका है, असर क्या होगा?

जवाबः ग्राहम ट्रम्प के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे, खासकर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर। मिडिल ईस्ट में उनकी खासी दिलचस्पी थी। ग्राहम को श्रद्धांजलि देते हुए ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘वो हमेशा काम करते रहते थे। वो सच्चे अमेरिकी राष्ट्रभक्त थे। उन्हें बहुत याद किया जाएगा। उनकी अचानक मौत मौजूदा हालातों में कई चुनौतियां पैदा करती हैं।’

ग्राहम का अचानक निधन ट्रम्प के लिए 3 वजहों से बड़ा झटका है…

1. चुनाव के लिए महीने भर में नया उम्मीदवार चुनना होगा: नवंबर 2025 में अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन होने हैं। इसमें ग्राहमी 5वीं बार साउथ कैरोलिना सीट से चुनाव लड़ने वाले थे। उनकी मौत के बाद अब 11 अगस्त तक रिपब्लिकन पार्टी को नए उम्मीदवार का चुनाव करना होगा। कई नेता अपनी दावेदारी पेश भी करने लगे हैं। यह सीट रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्राहम के अलावा जो भी इस सीट से चुनाव लड़ेगा, उसे हराना मुश्किल होगा। हालांकि लंबे समय बाद कोई नया कैंडिडेट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मौका भी हो सकता है।

2. लोगों को ट्रम्प के पक्ष में करने वाला हुनरमंद साथी खोया: ट्रम्प ने खुद एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि ग्राहम कोई भी चीज अप्रूव करवा सकते थे। उन्हें लोगों से अपनी बात मनवानी आती थी। अगर मुझे डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों से भी कोई समस्या होती थी, तो वो उनसे बात कर सुलझा लेते थे।

ग्राहमी ट्रम्प के इनर सर्कल का हिस्सा थे। दोनों अक्सर साथ में गोल्फ खेला करते थे।

ग्राहमी ट्रम्प के इनर सर्कल का हिस्सा थे। दोनों अक्सर साथ में गोल्फ खेला करते थे।

3. सीनेट में रिपब्लिकन की बढ़त कम हुई: 100 सीटों वाली अमेरिकी सीनेट में अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक के पास 47 सीटें थीं। ग्राहम की मौत से एक सीट कम हो गई। वहीं एक अन्य सीनेटर मिच मैककोनेल अस्पताल में भर्ती हैं और सदन में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ऐसे में पहली बार ट्रम्प के पास सदन में 4 वोटों से कम की मार्जिन होगी। क्रॉस वोटिंग होने से ट्रम्प को जरूरी बिल पास कराने में मुश्किल होगी।

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