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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा बिना नाम लिए बीते दिन लखनऊ में ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान पर राष्ट्रीय लोकदल के सामाजिक न्याय मंच की प्रदेश अध्यक्ष संगीता दोहरे ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा की मर्यादा बेहद जरूरी है और अखिलेश यादव को अपने बयान में मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। संगीता दोहरे ने कहा कि अखिलेश यादव को इतनी जल्दी बौखलाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि चौधरी अजित सिंह के मुख्यमंत्री बनने की संभावना के समय तत्कालीन सपा नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केवल अजित सिंह को नहीं रोका गया था, बल्कि एक किसान और मजदूर के बेटे को आगे बढ़ने से रोका गया था। ऐसे में सपा नेताओं को किसान हित की बात करने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा को मिली राजनीतिक सफलता में गठबंधन की भूमिका रही है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ समेत पश्चिमी यूपी की सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन नहीं होता तो सपा के लिए इन क्षेत्रों में चुनावी प्रदर्शन करना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि RLD कार्यकर्ताओं ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर गठबंधन धर्म निभाया। संगीता दोहरे ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीटें जीतकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि जाट और किसान समाज अपने नेता के सम्मान का जवाब चुनाव में देगा। उन्होंने दावा किया कि दलित और अल्पसंख्यक समाज भी RLD के साथ खड़ा है। उन्होंने PDA को लेकर भी सपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सपा में PDA के नाम पर परिवार को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। संगीता ने कहा कि 2027 में जनता इसका जवाब देगी। RLD नेता ने कहा कि उनके नेताओं की तीन पीढ़ियों ने समाज के साथ खड़े होकर संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक वफादारी और सम्मान की बात वही करे जिसने इन्हें निभाया हो। उन्होंने कहा कि RLD कार्यकर्ता शब्दों से नहीं, बल्कि वोट के जरिए जवाब देंगे।
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अखिलेश के ‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर RLD का पलटवार:रालोद (सामाजिक न्याय मंच) की प्रदेश अध्यक्ष ने कहा – जनता वोट से देगी जवाब
