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अच्छी बारिश से झारखंड के डैम लबालब:महज 3% कम बारिश, मैथन-पंचेत में तेजी से बढ़ा जलस्तर, मलय डैम से 105 गांवों को लाभ




शुरुआती मानसून में कमजोर बारिश से सूखे की चिंता झेल रहे झारखंड में अब तस्वीर बदल गई है। जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त में हुई लगातार अच्छी बारिश से राज्य के ज्यादातर बड़े जलाशय और डैम भर चुके हैं। राज्य में 818.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से महज 3% कम है। जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा होने से अब आने वाले महीनों में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी की किल्लत की आशंका काफी कम हो गई है। कई डैम में जलस्तर बढ़ने के बाद अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है। मैथन-पंचेत में तेजी से बढ़ा जलस्तर धनबाद और आसपास के इलाकों में पिछले दिनों हुई भारी बारिश का असर मैथन और पंचेत डैम पर पड़ा है। दोनों जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद डीवीसी ने करीब एक लाख क्यूसेक पानी पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों की ओर छोड़ा है। मैथन से 45 हजार और पंचेत से 54,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। मैथन का जलस्तर 487 फीट और पंचेत का 416 फीट पहुंच गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सूचना दी गई है। डैम से पानी छोड़ा जाना इस बात का संकेत है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंच चुका है। गरगा से तेनुघाट तक बढ़ा जल भंडार बोकारो में भी अच्छी बारिश का असर प्रमुख जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है। गरगा डैम में पर्याप्त पानी जमा होने के बाद अतिरिक्त पानी निकालने के लिए फाटक खोले गए। करीब 19.45 मिलियन घन मीटर पानी की क्षमता वाला यह जलाशय बोकारो की जल व्यवस्था का पुराना और महत्वपूर्ण स्रोत है। मानसून में जमा पानी का इस्तेमाल बारिश के बाद के महीनों में किया जाता है। ऐसे में गरगा का भरना गर्मी में जलापूर्ति पर दबाव कम कर सकता है। वहीं, दामोदर नदी पर बने तेनुघाट डैम में भी बड़ा जल भंडार मौजूद है। इसकी कुल भंडारण क्षमता 1,021 मिलियन घन मीटर यानी करीब 1,02,100 करोड़ लीटर है। यहां जमा पानी बोकारो स्टील प्लांट सहित औद्योगिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। करीब 29 किमी लंबी नहर से प्लांट तक पानी पहुंचाया जाता है। पर्याप्त जल भंडार से औद्योगिक गतिविधियों और आने वाले गर्मी के महीनों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है। तिलैया डैम में अधिकतम जलस्तर कोडरमा-हजारीबाग सीमा पर स्थित तिलैया डैम में भी लगातार बारिश से जलस्तर काफी बढ़ गया है। डीवीसी के प्रबंधक बिरसा मुर्मू के अनुसार शुरुआती दिनों में पानी की कमी थी, लेकिन पिछले दिनों की मूसलाधार बारिश से स्थिति बदल गई है। जलस्तर 1,205 फीट तक पहुंच गया है, जो अधिकतम स्तर से महज 8 फीट नीचे है। इससे केटीपीएस को पानी की आपूर्ति, 4 मेगावाट बिजली उत्पादन और आसपास के क्षेत्रों में खेती के लिए पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद है। जलस्तर बढ़ने से पर्यटन और नौका विहार से जुड़े लोगों को भी फायदा होगा। मलय डैम से 105 गांवों को मिलेगा खेती का पानी पलामू के सतबरवा स्थित मलय डैम की तस्वीर भी इस साल की अच्छी बारिश को दिखाती है। शुरुआती मानसून में पानी कम था, लेकिन अगस्त की बारिश के बाद डैम 90 फीट की अपनी क्षमता तक भर गया। स्पिलवे से पानी ओवरफ्लो होने लगा। इस डैम से नहरों के जरिए करीब 105 गांवों तक पानी पहुंचता है। इससे खरीफ के साथ रबी फसल के लिए भी पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद है। किसानों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि जरूरत के अनुसार धान की फसल के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। गुमला में जलाशयों में पानी, खरीफ के साथ रबी की उम्मीद गुमला में भी जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त में हुई अच्छी बारिश से कतरी जलाशय, मसूरिया और तपकरा डैम समेत अन्य जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा हुआ है। कतरी जलाशय से दो कैनाल के जरिए करीब 40 गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता है। प्रबंधक सहामूल अंसारी के अनुसार इस वर्ष पानी का अच्छा संचय हुआ है। करीब 570 क्यूसेक पानी उपलब्ध रहने की स्थिति है। इससे धान की खेती के साथ रबी फसल के लिए भी किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।



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