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अपहरण-हत्या मामले में उम्रकैद की सजा:11 साल पुराने मामले में कोर्ट ने की सुनवाई, किडनैपिंग के 3 महीने बाद मिली थी बॉडी




औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार की अदालत ने 11 साल पुराने अपहरण और हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने रिसियप थानाक्षेत्र के दोमुहान गौरा निवासी सुरेन्द्र मेहता को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी मानते हुए कुल साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले 10 जुलाई को अदालत ने अभियुक्त को नाबालिग के अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी करार देते हुए उसका बंधपत्र रद्द कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। तीन धाराओं में अलग-अलग सजा, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि अदालत ने अभियुक्त को भादंवि की धारा 364 (अपहरण) के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपए जुर्माना, धारा 302 (हत्या) के तहत उम्रकैद और दो लाख रुपए जुर्माना, धारा 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत 5 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
बारात से किया था मासूम का अपहरण, फिर मिला था शव लोक अभियोजक के अनुसार, मामले के प्राथमिकी सूचक महेन्द्र मेहता ने 17 जून 2011 को रिसियप थाना में मामला दर्ज कराया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि गांव में एक बारात आई थी। नाबालिग बेटा विवेक कुमार बरातियों के साथ सो गया था। इसी दौरान सुरेन्द्र मेहता ने उसका अपहरण कर लिया। घटना के करीब तीन महीने बाद सिंचाई नहर से एक बच्चे का शव बरामद हुआ। परिजनों ने शर्ट, बेल्ट और दांत के आधार पर शव की पहचान विवेक कुमार के रूप में की थी। अभियोजन के अनुसार, वादी और अभियुक्त के बीच पहले से जमीन संबंधी विवाद था, जिसे घटना का प्रमुख कारण माना गया। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए निर्णय पर संतोष व्यक्त किया। वहीं इस फैसले को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।



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