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अबान की मौत



13 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद के बेटा असद अहमद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। दो दिन बाद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की तीन लड़कों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अब करीब ढाई साल बाद अतीक के सबसे छोटे बेटे अबान की सड़क एक्सीडेंट में मौत हो गई। अतीक के दो बेटे

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एक समय अतीक अहमद के साथ उसके बच्चों की भी तूती बोलती थी। उनके लिए स्पेशल गाड़ियां थीं, जहां जाते साथ में 20 से ज्यादा लोग सुरक्षा में रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे पहले आर्थिक साम्राज्य खत्म हुआ और उसके बाद पूरा कुनबा ही खत्म होता चला गया।

अली से मिलने निकला, एक्सीडेंट में मौत हो गई

अतीक अहमद का पुश्तैनी घर प्रयागराज के चकिया में था। यह प्रयागराज जंक्शन से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद चकिया वाले घर को ध्वस्त कर दिया गया। वहां अब अतीक के नाम पर सिर्फ खंडहर दिखता है। अतीक के चौथे नंबर का बेटा अहजम और पांचवें नंबर का अबान चकिया से ही करीब 2 किलोमीटर दूर हटवा गांव में अपनी बुआ परवीन कुरैशी के घर रहते थे। 6 अगस्त की सुबह अबान अपने 4 अन्य साथियों के साथ झांसी की जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। झांसी में ही हादसा हुआ और उसकी मौत हो गई।

आज से 3 साल पहले सभी चकिया में ही रहते थे। वहीं से स्कूल जाते थे। अतीक ने अपने सभी बच्चों को शहर के सबसे टॉप स्कूल सेंट जोसेफ में एडमिशन करवाया था। इनके स्कूल जाने के लिए एक पजेरो गाड़ी खरीदी थी, ये सभी उसी से स्कूल जाते थे। स्कूल में सबसे बड़े बेटे उमर अहमद का स्वभाव सबसे नरम था। पढ़ाई में भी उसका मन लगता था, कहता था कि IAS बनना है, इसलिए पढ़ाई करनी है। लेकिन जब पढ़ाई पूरी की तो पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए धमकी और वसूली के काम में शामिल हो गया। इसी मामले में वह लखनऊ जेल में बंद है।

अबान का पढ़ाई में नहीं, क्रिकेट में मन लगता था

जिस अबान की सड़क दुर्घटना में मौत हुई, वह पढ़ाई में औसत था, लेकिन खेलकूद में सबसे आगे रहता था। अबान क्रिकेट का अच्छा खिलाड़ी था। आसपास के लड़कों के साथ वह अक्सर क्रिकेट खेलते दिखाई देता था। इसी वजह से उसकी मां शाइस्ता परवीन ने कई बार उसकी पिटाई भी की थी।

सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ाई के दौरान भी जब ये बच्चे शरारत करते थे, तो प्रिंसिपल अतीक अहमद को फोन करने के बजाय शाइस्ता परवीन को फोन करते थे। एक बार शाइस्ता परवीन स्कूल पहुंचीं और अपने बच्चों को खूब डांटा। चौथे और पांचवें नंबर के बेटे शाइस्ता परवीन से सबसे ज्यादा डरते थे।

जहां पांचों बेटे जाते, वहां 20 लोग सुरक्षा में जाते थे

2022 तक अतीक के तीन बेटों ने स्कूली पढ़ाई पूरी कर ली थी। बड़ा बेटा उमर कानून की पढ़ाई करने उत्तराखंड चला गया। दूसरा और तीसरा बेटा राजनीति और पिता के धंधों में लग गए। बाकी के दोनों बच्चे पढ़ाई में लगे रहे। चकिया, करेली, धूमनगंज जैसे इलाकों में जब भी अतीक के किसी करीबी के घर कोई कार्यक्रम होता था, तब ये पांचों बच्चे साथ जाते थे। लेकिन गाड़ी में एक साथ नहीं बैठते थे, अलग-अलग 4 गाड़ियां होती थी। साथ में करीब 20 लोग होते, उसमें 5-7 तो ऐसे होते थे जिनके पास असलहा होता था। अतीक ने ही कह रखा था कि किसी बेटे को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

चौथे नंबर के बेटे अली अपने पिता के नक्शेकदम पर चलता था। इसलिए लोग उसे छोटे सांसद जी कहते थे। वह चुनावी सभाओं में खुलकर बोलता था। वहीं असद अक्खड़ मिजाज का था। अक्सर अपने चाचा अशरफ के साथ रहता और मारपीट करता था। शाइस्ता परवीन को यह सब ठीक नहीं लगता था लेकिन अतीक अक्सर इन चीजों पर चुप रहता था। उसकी मूक सहमति ने असद के अंदर डॉन बनने की सनक पैदा कर दी और वही पूरे परिवार के खात्मे की वजह बन गई।

उमेश पाल की हत्या की और फिर उल्टी गिनती शुरू हो गई

24 फरवरी 2023, यह दिन अतीक अहमद के कुनबे के खात्मे की सबसे बड़ी वजह बन गया। 2005 में मारे गए विधायक राजू पाल केस में उमेश पाल मुख्य गवाह थे। उनकी गवाही होनी थी, अतीक के परिवार को यह सब मंजूर नहीं था। कई बार धमकी के बाद भी नहीं माने तो हत्या करने का प्लान बना लिया। इस प्लान में अतीक अहमद का बेटा असद भी शामिल हुआ और उसने 24 फरवरी को उमेश पाल के घर जाकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में उमेश पाल के साथ उनके दो गनर की भी मौत हो गई।

घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया। गोली चलाते हुए असद नजर आया। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। 27 फरवरी को अरबाज नाम के शूटर को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। 1 से 3 मार्च तक अतीक और उसके सहयोगियों के घरों को जमींदोज कर दिया गया। घटना से करीब डेढ़ महीने बाद 13 अप्रैल को यूपी एसटीएफ को इनपुट मिला कि असद अहमद और गुलाम झांसी में हैं। एसटीएफ ने घेराबंदी शुरू की तो दोनों ने गोलियां चला दी। जवाबी फायरिंग में दोनों की मौत हो गई।

पहली बार अतीक अहमद रोते हुए दिखा

13 अप्रैल को अतीक अहमद अपने भाई अशरफ के साथ प्रयागराज की ही कचेहरी में था। दोनों के हाथों में हथकड़ी लगी थी। जैसे ही बेटे के एनकाउंटर की खबर पता चली वह रो पड़ा। मीडिया ने बात करनी चाही लेकिन उसने कोई बात नहीं की। 15 अप्रैल को पुलिस अतीक अहमद और अशरफ को कसारी मसारी लेकर गई थी, वहां से कुछ हथियार बरामद किए गए। इसके बाद रात करीब साढ़े 10 बजे दोनों का मेडिकल करवाने के लिए कॉल्विन हॉस्पिटल लेकर आया गया।

उसी वक्त तीन लड़के लवलेश तिवारी, शनी सिंह और अरुण मौर्य ने जिगना पिस्टल से अतीक और अशरफ पर ताबड़तोड़ फायरिंग झोंक दी। 20 सेकण्ड बाद प्रयागराज में कभी हुकूमत चलाने वाले दोनों बाहुबली भाई जमीन पर औंधे मुंह मृत हालत में पड़े थे। पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरे शहर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात कर दिए। पूरी स्थिति कंट्रोल में रही।

शाइस्ता परवीन बेटे के बाद पति के जनाजे में भी नहीं आई

15 अप्रैल को जब असद का अंतिम संस्कार हुआ था तब उम्मीद थी कि अपने बेटे को आखिरी बार देखने शाइस्ता परवीन जरूर आएगी लेकिन वह नहीं आई। फिर जब 16 अप्रैल को कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अतीक और उसके भाई अशरफ को दफ्न किया गया तो चर्चा चली कि शाइस्ता आई है। हालांकि ये सिर्फ अफवाह थी। वह अपने पति के भी अंतिम संस्कार में नहीं आई। पुलिस ने शाइस्ता को उमेश पाल मर्डर केस में आरोपी बनाया है, उसके ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम है।

शाइस्ता अपने इस सबसे छोटे बेटे अबान को सबसे ज्यादा प्यार करती थी। लेकिन पिछले ढाई सालों से जो स्थिति दिख रही है, उससे नजर आता है कि वह अपने इस बेटे के अंतिम संस्कार में भी नहीं आएगी। अबान के अंतिम संस्कार में खून के रिश्तों में सिर्फ उसका भाई अहजम ही रहेगा। बाकी उसके कुछ रिश्तेदार रहेंगे। बड़ा बेटा उमर लखनऊ और उससे छोटा अली झांसी जेल में बंद है। दोनों को पहले भी किसी मौत पर मौके पर नहीं ले जाया गया है। पुलिस इसे सुरक्षा का मामला मानती है।



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