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अबोहर के गांव में फैला पीलिया, 11 बच्चे बीमार:कई परिवारों में दो-दो बच्चे चपेट में, दूषित पानी से बिगड़े हालात; मेडिकल टीम भेजने की मांग




फाजिल्का के अबोहर उपमंडल के गांव बिशनपुरा और सीतो गुन्नो में पीलिया के मामलों ने अचानक गंभीर रूप धारण कर लिया है। इन दोनों गांवों में अब तक करीब 11 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह स्थिति पीने के लिए मिल रही दूषित पानी की आपूर्ति की वजह से पैदा हुई है। कई परिवारों के तो एक से अधिक बच्चे इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से दूषित पानी की समस्या है। करीब 10-12 दिन पहले पानी के सैंपल जांच के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए थे। सरपंच सुनील कुमार ने रिपोर्ट के बारे में पूछने पर संबंधित जेई से जानकारी लेने की बात कही। महंगे इलाज से परिजन परेशान बिशनपुरा निवासी सुखपाल की 9 साल की बेटी संध्या पिछले करीब 20 दिनों से पीलिया से पीड़ित है। परिजनों ने अबोहर के एक निजी अस्पताल में उसके इलाज पर अब तक करीब 60 हजार रुपए खर्च कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई है। उसकी हालिया लैब रिपोर्ट में कुल बिलीरुबिन का स्तर 19.83 एमजी/डीएल दर्ज हुआ है। कई परिवारों दो बच्चे बीमार इसी तरह 13 साल की पूजा की मेडिकल रिपोर्ट में बिलीरुबिन 5.7 एमजी/डीएल, एसजीओटी 95 और एसजीपीटी 897 दर्ज होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक सुखदेव, चरणजीत और बाबूराम के परिवारों में दो-दो बच्चे बीमार हैं। इसके अलावा 9 साल की संध्या, 13 साल की पूजा, 9 साल का रमनदीप, 5 साल की काजल, 3 साल की दिव्या, 14 साल की लक्ष्मी, 6 साल का लवदीप, 4 साल का नवदीप, 8 साल की जैसिका और अर्जुन शामिल हैं।
प्रशासन की लापरवाही, सैंपल जांच को भेजी पर कार्रवाई नहीं ग्रामीणों का कहना है कि उनके इलाके में लंबे समय से दूषित पानी की समस्या बनी हुई है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करीब 10-12 दिन पहले पानी के सैंपल जांच के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए थे। हालांकि, जब गांव के सरपंच सुनील कुमार से इस रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संबंधित जेई से जानकारी प्राप्त करने की बात कहकर टाल दिया। हालात को बेकाबू होते देख ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने गांवों में तुरंत प्रभाव से मेडिकल टीमों को भेजने, सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराने, पीने के पानी की गुणवत्ता की परख करने तथा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीमार बच्चों का सरकारी खर्चे पर मुफ्त इलाज करवाने की जोरदार मांग की है।



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