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अयोध्या में आयोजित ‘जनमानस के राम’ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों कलाकारों ने हिस्सा लिया। सभी कलाकारों ने भगवान श्रीराम से जुड़ी अलग-अलग थीम पर आधारित पेंटिंग तैयार कीं। इनमें राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त वरिष्ठ चित्रकार रूपचंद की अनूठी कलाकृति को सबसे अधिक सराहा गया। रूपचंद की बनाई श्रीराम पर आधारित पेंटिंग श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस पेंटिंग में कलाकार ने साधु-संतों के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति और समर्पण को प्रदर्शित किया है। चित्रकार रूपचंद ने बताया कि साधु-संतों को चित्रित करना उनकी सिग्नेचर शैली है। इस पेंटिंग में उन्होंने कुल 24 साधु-संतों को दर्शाया है, जो दिन के 24 घंटों का प्रतीक हैं। वहीं पेंटिंग में भगवान श्रीराम का नाम सात पंक्तियों में लिखा गया है, जो सप्ताह के सात दिनों का प्रतिनिधित्व करता है। इस तरह पूरी कलाकृति का भाव है—24 घंटे और सातों दिन प्रभु श्रीराम का ही नाम। पेंटिंग में भगवान श्रीराम को स्वर्णिम तीर के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जबकि भगवान हनुमान को श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में चित्रित किया गया है। कलाकार के अनुसार यह कलाकृति एक्रेलिक ऑन कैनवास माध्यम से तैयार की गई है। रूपचंद ने बताया कि उन्हें भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा वर्ष 2007 में राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। कला के क्षेत्र में करीब 30 वर्षों का अनुभव रखने वाले रूपचंद ने फाइन आर्ट्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्हें अब तक 33 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं और भारत के अलावा अमेरिका, हंगरी, दुबई, जर्मनी, इटली सहित कई देशों में उनकी कला प्रदर्शित हो चुकी है। रूपचंद ने कहा कि श्रीराम की नगरी अयोध्या में अपनी कला प्रस्तुत करना उनके लिए अलग ही आनंद और आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है। कलाकार रूपचंद द्वारा बनाई गई यह कलाकृति और उनकी अन्य पेंटिंग अब अयोध्या के जानकी घाट स्थित वैदेही भवन में प्रदर्शनी के रूप में हमेशा के लिए संरक्षित की जा रही हैं, जिन्हें कोई भी जाकर देख सकता है।
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अयोध्या में सराही गई राम पेंटिंग:वरिष्ठ चित्रकार रूपचंद की अनूठी कलाकृति, वैदेही भवन में हमेशा रहेगी संरक्षित
