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आज का एक्सप्लेनर:अजीब आवाजें सुनीं, फिर अपने 3 बच्चों की हत्या कर दी, क्या ये डिलीवरी के बाद हुआ पागलपन या सोची-समझी साजिश




36 साल की एक मां एक नोट लिखती है- ‘मुझे डर है कहीं मेरे बच्चों को कुछ हो न जाए या मैं कुछ ऐसा न कर दूं जिससे उनका डेवेलपमेंट रुक जाए। 5 सालों से मैंने अपना दिमाग पालन-पोषण की बातों से भर रखा है, ये पागलपन है।’ पति कहता है- ‘लिंडसे, तुम एक अच्छी मां हो।’ फिर लिंडसे अपने तीनों बच्चों को मार डालती है। उसके वकीलों का कहना है कि तीसरे बच्चे के बाद उसे कुछ आवाजें सुनाई देती थीं, जो उसे बच्चों की जान लेने का आदेश देती थीं। आखिर लिंडसे ने बच्चों की हत्या क्यों की, कोई मानसिक बीमारी या साजिश; क्या सजा से बच भी सकती है, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लिंडसे क्लैंसी ने अपने 3 बच्चों को कैसे मारा? जवाब: पेशे से नर्स लिंडसे क्लैंसी अमेरिका के मैसाचुसेट्स के डक्सबरी इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी। पति पैट्रिक के अलावा 3 बच्चे थे- 5 साल की बेटी कोरा, 3 साल का बेटा डॉसन और 8 महीने का नवजात कैलन। 24 जनवरी, 2023 को लिंडसे ने पैट्रिक को दवाएं और डिनर लाने थ्री-वी रेस्टोरेंट भेजा। उसके जाते ही लिंडसे अपने तीनों बच्चों को घर के बेसमेंट में ले गई। एक्सरसाइज करने वाला पट्टा उठाया और एक-एक करके तीनों बच्चों का गला घोंट दिया। कोरा और डॉसन ने कुछ ही मिनटों में दम तोड़ दिया। 3 दिन बाद कैलन की भी मौत हो गई। इधर तीनों बच्चों को मारने के बाद लिंडसे दूसरी मंजिल की खिड़की से नीचे कूद गई, जिससे उसका शरीर पैरालाइज हो गया। वो अभी भी व्हीलचेयर पर है। उसने अपनी कलाई और गर्दन पर भी चाकू से कुछ वार किए, लेकिन ये बहुत हल्के थे। खून तक नहीं निकल रहा था। पैट्रिक वापिस लौटा तो इतना शांत घर देखकर चौक गया। दौड़कर अपने बेडरूम की तरफ गया। खिड़की से बाहर देखा, तो लिंडसे जमीन पर पड़ी हुई मिली। लिंडसे ने बताया कि उसने अपनी जान देने की कोशिश की थी और उनके बच्चे बेसमेंट में हैं। सवाल-2: हत्या का कारण क्या था? जवाब: मैसाचुसेट्स कोर्ट में इस महीने की शुरूआत से ही लिंडसे के मामले की सुनवाई चल रही है। इस दौरान 2 पक्ष सामने आए… पहला: लिंडसे मानसिक रूप से बीमार थीं लिंडसे के वकील केविन रेडिंगटन ने कोर्ट में बताया कि अपने तीसरे बच्चे के जन्म के बाद से लिंडसे मानसिक तनाव में थी। वे पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रही थी, जोकि प्रसव के बाद कुछ मांओं में होने वाली एक मानसिक बीमारी है। वकील ने तर्क दिए… लिंडसे साइकेट्रिक अस्पताल में भर्ती रही: कैलन के जन्म के बाद से ही लिंडसे का मानसिक इलाज चल रहा था। वो सो नहीं पाती थी, डिप्रेस्ड रहती थी, वजन भी घट गया था। 1 से 5 जनवरी 2023 के मैकलीन अस्पताल में लिंडसे भर्ती भी रही। यहां से आने के 19 दिन बाद ही उसने बच्चों की हत्या कर दी। 30 प्रिस्क्रिप्शन, 13 तरह की दवाएं ले चुकी थी: हत्या से पहले के 5 महीनों में लिंडसे ने 13 तरह की साइकैट्रिक दवाएं ली थीं। 30 तरह के प्रिस्क्रिप्शन पेश किए गए। लिंडसे के वकील के मुताबिक, अलग-अलग तरह की दवाओं के कॉम्बिनेशन से लिंडसे की हालत और बिगड़ी। लिंडसे की गिरफ्तारी के बाद उनकी मानसिक जांच करने वाले डॉक्टर ने भी बताया था कि वो बाइपोलर डिसऑर्डर और पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रही हैं। पैट्रिक का भी मानना है कि लिंडसे ने अपनी मानसिक हालत की वजह से बच्चों की जान ली और वो लिंडसे को इसके लिए माफ करते हैं। दूसरा: लिंडसे ने हत्या की साजिश रची प्रोसेक्यूशन, यानी सरकारी वकील के मुताबिक लिंडसे ने ही अपने बच्चों को मारने की साजिश रची थी। लिंडसे अपने बच्चों की दिनचर्या, खाना-पीना सब अपने कंट्रोल में रखती थी। जब यह उसके कंट्रोल से बाहर जाने लगा, तो वो इतनी हताश हो गई कि उसने बच्चों की जान ही ले ली। वकील ने तर्क दिए… सवाल-3: पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है और क्यों होता है? जवाब: पोस्टपार्टम, यानी बच्चे की डिलीवरी के बाद आम तौर पर दो चीजें होती हैं… 1. बेबी ब्लूज 2. पोस्टपार्टम डिप्रेशन वहीं साइकोसिस कहीं गंभीर मानसिक स्थिति है… पोस्टपार्टम साइकोसिस की कोई एक तय वजह अभी तक साबित नहीं हो पाई है… सवाल-4: इस केस में आगे क्या होगा, क्या लिंडसे को सजा नहीं होगी? जवाब: अभी इस मामले पर सुनवाई जारी है। आगे 2 सिनैरियो हो सकते हैं… 1. इनसैनिटी (पागलपन) साबित हो, तो सजा नहीं होगी 2. पागलपन साबित न हो, तो सजा सवाल-5: भारत में ऐसे मामलों को लेकर क्या कानून है? जवाब: भारत में BNS की धारा 22 के मुताबिक, ‘कोई व्यक्ति मानसिक तौर पर इतना बीमार हो कि वह ये न समझ सके, कि वो जो कर रहा है, वो कानूनी तौर पर गलत है, वह अपने काम का नतीजा भी न समझे, तो वो काम अपराध नहीं माना जाएगा। हालांकि भारत में इनसैनिटी डिफेंस के मामले में दो तरह की सख्ती हैं…. बर्डन ऑफ प्रूफ सरकारी वकील पर नहीं है, बल्कि आरोपी को प्रूफ करना होता है कि वह अपराध के समय मानसिक तौर पर बीमार था। आरोपी को अपने बचाव में मेडिकल इनसैनिटी के बजाय लीगल इनसैनिटी साबित करनी होती है, यानी सिर्फ ये काफी नहीं होता कि आरोपी किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित था, बल्कि ये साबित करना जरूरी है कि उसी बीमारी के चलते अपराध के समय वो सही-गलत में फर्क करने की क्षमता खो चुका था। ———— ये खबर भी पढ़िए…



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