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अनशन के 10वें दिन अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ी:ICU में भर्ती, इलाज कराने से मना किया, 'चिता सत्याग्रह' 25वें दिन भी जारी




मझगाये बांध सहित अन्य विकास परियोजनाओं से विस्थापित और प्रभावित आदिवासियों के उचित मुआवजे, पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहा ‘चिता सत्याग्रह’ मंगलवार को 25वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर की तबीयत रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में लगातार बिगड़ रही है, लेकिन उन्होंने इलाज कराने से साफ मना कर दिया है। 27 सितंबर की रात सत्याग्रहियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में अमित भटनागर का आमरण अनशन मंगलवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। आईसीयू के डॉक्टरों ने तुरंत ड्रिप लगाने और इलाज शुरू न कराने पर जीवन को गंभीर खतरा होने की चेतावनी दी है। इसके बावजूद पुलिस अभिरक्षा में भर्ती अमित भटनागर ने इलाज लेने से इंकार करते हुए कहा, “देश के संविधान और किसानों-आदिवासियों के अधिकारों के सामने मेरी जान की कोई कीमत नहीं है।” आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन अस्पताल में किसी को भी अमित भटनागर से मिलने नहीं दे रहा है। दिव्या अहिरवार बिजावर जेल शिफ्ट दूसरी ओर, आंदोलन की प्रमुख दिव्या अहिरवार को पन्ना जेल से अचानक बिजावर जेल भेज दिया गया। जय किसान संघ के जारी प्रेस नोट के अनुसार, मंगलवार को जब दिव्या की मां पन्ना जेल पहुंचीं, तब उन्हें बेटी को बिजावर जेल भेजे जाने की जानकारी मिली। इसके बाद जब वे बिजावर जेल पहुंचीं, तब भी प्रशासन ने उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी। दिव्या की मां ने कहा कि उनकी बेटी बिना पिता की बच्ची है और किसानों व आदिवासियों के हक के लिए आवाज उठा रही थी। इसलिए उस पर गंभीर धाराएं लगाकर परेशान किया जा रहा है, जिसका जवाब जनता लोकतांत्रिक तरीके से देगी। गिरफ्तारियों के बीच आंदोलन जारी सत्याग्रह से जुड़े हिसाबी राजपूत, इंद्रपाल आदिवासी और कमलेश प्रजापति भी फिलहाल बिजावर जेल में बंद हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि पुलिस प्रशासन गिरफ्तारियां करके दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन गांवों में किसान, आदिवासी और महिलाएं लगातार सत्याग्रह पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें विस्थापित किसानों और आदिवासियों को पारदर्शी व उचित मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के जीवन-यापन के लिए सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। 27 सितंबर की रात सत्याग्रहियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच हो और दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।



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