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पिछले दिनों सरकार ने दो नियम बदले, जिनका सीधा असर करोड़ों मोबाइल यूजर्स पर पड़ेगा। पहला फैसला फोन के टेम्पर्ड ग्लास को लेकर है और दूसरा मंथली रिचार्ज से जुड़ा। क्या नए बदलाव हुए, क्यों करने पड़े, इससे आपका फायदा या घाटा और पीछे का पूरा खेल समझिए आज के एक्सप्लेनर में… 21 सितंबर को इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने स्मार्ट फोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर’, यानी टेम्पर्ड ग्लास को BIS स्टैंडर्ड मार्क के दायरे में शामिल कर लिया है। ‘कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑर्डर’ की लिस्ट में स्मार्टफोन, लैपटॉप, चार्जर, LED टीवी, माइक्रोवेव ओवन, प्रिंटर और सेट-टॉप बॉक्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट पहले से हैं। इसी लिस्ट में 66वें आइटम के बतौर टेम्पर्ड ग्लास को जोड़ा गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक… ये बदलाव क्यों हुआ? सरकार ने इस बदलाव की वजह नहीं बताई। मीडिया रिपोर्ट्स और उद्योग संगठन कुछ तर्क जरूर दे रहे हैं… इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के मुताबिक, ‘भारत में हर साल 5 करोड़ टेम्पर्ड ग्लास की खपत है, जिनमें से 90% से ज्यादा विदेशों से इम्पोर्ट होते हैं। कांच के ग्लास को ‘टेम्पर्ड ग्लास’ कह कर बेचा जाता है। जबकि इनकी सही से टेम्परिंग नहीं की जाती।’ दरअसल, टेम्परिंग एक ऐसी खास थर्मल और केमिकल प्रोसेस है, जिससे साधारण कांच भी मजबूत और टिकाऊ बन जाता है। नए नियम से क्या फायदा होगा? BIS वाले टेम्पर्ड ग्लास मजबूती के सरकारी मानकों को पूरा करेंगे। इससे उनके मोबाइल का डिस्प्ले सुरक्षित रहेगा। साथ ही टेम्पर्ड ग्लास की ड्यूरेबिलिटी भी बढ़ेगी। रेगुलेशन के मुताबिक, टेम्पर्ड ग्लास ऐसे हों, जो फोन गिरने पर झटके का असर फोन पर न आने दें और टूटने पर ग्लास से किसी को चोट न लगे। ग्लास में ब्लू-लाइट फिल्टर और ग्लेयरिंग, यानी आंख पर पड़ने वाली चमक भी नहीं होनी चाहिए। अमेरिका की कंसल्टिंग फर्म GMA लैब्स के मुताबिक, नए रेगुलेशन से 12 से 16 हजार करोड़ रुपए की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ सकती है। करीब 2000 करोड़ का GST कलेक्शन होगा और लगभग 60 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। कोई नुकसान भी है? 2 चिंताएं हैं… 1. टेम्पर्ड ग्लास की कीमतें बढ़ सकती हैं 2. एक कंपनी की मोनोपॉली का खतरा टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने 22 सितंबर को नया रेगुलेशन जारी किया है। इसके तहत सिर्फ वॉइस कॉल और SMS Only वाले टैरिफ वाउचर से जुड़े 3 नियम लागू करने को कहा है… ये बदलाव क्यों हुए? TRAI के मुताबिक, कंपनियों के पास बिना डेटा वाले सिर्फ वॉइस-SMS रिचार्ज प्लान बेहद कम हैं। जो हैं भी, वो लंबी वैलिडिटी वाले हैं। इससे कम आय वाले यूजर्स, या जो बिना डेटा वाले, कम टाइम पीरियड के प्लान लेना चाहते हैं, उनके पास ज्यादा ऑप्शन नहीं बचे थे। नए नियमों का मकसद मोबाइल यूजर्स को ‘कॉलिंग और SMS ओनली’ और ‘कम पीरियड’ के विकल्प देना है। किसे फायदा होगा? इसमें भी एक बात ध्यान रखने वाली है कि वॉइस-SMS-only प्लान में TRAI ने ‘उचित कटौती’ की बात कही है, लेकिन ‘उचित’ का मतलब क्या है, ये TRAI ने साफ नहीं किया है। किसे फायदा नहीं होगा? बीजेपी नेता राघव चड्ढा ने 27 सितंबर को कहा है, ‘मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने आपकी सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है। अब 28 दिन के बजाय, 30 दिन का रिचार्ज प्लान भी दिया जाएगा, यानी अब आपको साल में 13 बार नहीं, सिर्फ 12 बार मंथली रिचार्ज कराना होगा।’ राघव चड्ढा का ये दावा पूरी तरह सही नहीं है, कि सरकार ने सभी की 30 दिनों के प्लान की मांग स्वीकार कर ली है… —— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:16% तक महंगा हुआ मोबाइल रिचार्ज, क्या अगले 3 महीने में और बढ़ेंगे दाम; लगातार कीमतें क्यों बढ़ा रहीं कंपनियां प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज 16% तक महंगा हो गया और आपको पता भी नहीं चला। एयरटेल ने अपने रिचार्ज के दाम बढ़ाने के बजाय, सीधे कई प्लान ही खत्म कर दिए। जियो प्राइम मेंबरशिप ले आई है। इस ‘साइलेंट हाइक’ के बाद भी अगले 3-4 महीनों में दाम और बढ़ने के आसार हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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आज का एक्सप्लेनर:50-100 रुपए वाले टेम्पर्ड ग्लास नहीं बिकेंगे, साल में 13 की जगह 12 रिचार्ज; आपसे जुड़े 2 बदलावों के पीछे का खेल
