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वर्तमान वर्षा ऋतु में पिछोला और फतहसागर झील में पानी की आवक नगण्य रहने के कारण उदयपुर शहर की पेयजल व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए देवास प्रथम और देवास द्वितीय से दोनों झीलों में पानी पहुंचाया जाएगा। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए अकोदड़ा और मादड़ी बांध में उपलब्ध पानी का अपवर्तन करने का निर्णय लिया गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता की ओर से 13 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में निर्णय लिया। इसके तहत देवास प्रथम व द्वितीय के आकोदड़ा और मादड़ी बांध में उपलब्ध पानी को पिछोला और फतहसागर झील में अपवर्तित करने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से वार्ता के बाद आज की तारीख तय की गई है। पानी को छोड़ने के दौरान सीसारमा नदी और नांदेश्वर टैंक के बहाव क्षेत्र में जल प्रवाह बढ़ सकता है। इसे देखते हुए संबंधित क्षेत्र के लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन की ओर से उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों से कहा गया है कि वे जल प्रवाह के दौरान नदी-नालों में नहीं जाएं और अपने मवेशियों को भी बहाव क्षेत्र से दूर रखें, ताकि किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हो। दरअसल, झीलों का जलस्तर नहीं बढ़ने से जलापूर्ति के लिए पानी का संकट होने की स्थिति होने लगी है इससे पहले ही पीएचईडी और जल संसाधन विभाग ने मिलकर यह तकनीकी प्लान तैयार किया है। देवास परियोजना के बांधों में अभी पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिसे टनल के जरिए झीलों की ओर मोड़ा जाएगा। उदयपुर की झीलें यहां के पर्यटन जगत और आम जनता में खुशी की लहर है। खाली होती झीलों को देखकर होटल व्यवसायी और बोटिंग संचालक चिंतित थे, क्योंकि पर्यटन पूरी तरह झीलों की खूबसूरती पर टिका है। अब लबालब झीलें देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगी, जिससे स्थानीय बाजार और रोजगार को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा। अब दीपावली पर टूरिज्म सीजन की भी तैयारियां है। दीपावली के बाद से गुजराती टूरिस्ट बड़ी संख्या में यहां रहते है।
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आज देवास प्रथम-द्वितीय से पिछोला-फतहसागर में छोड़ा जाएगा पानी:सीसारमा नदी के पास रहने वालों को जारी किया अलर्ट
