![]()
भारत का धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पर्यटक ऐसी यात्रा चाहते हैं जिसमें आध्यात्म के साथ संस्कृति, वेलनेस, लोककथाएं, स्थानीय भोजन, त्योहार और डिजिटल सुविधाएं भी शामिल हों। हाल ही में आई प्रोफेशनल सर्विस फर्म केपीएमजी और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स की रिपोर्ट में इसे ‘इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ का नाम दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक स्थल अब ऐसे अनुभव केंद्र बन रहे हैं जहां हेरिटेज वॉक, गाइडेड स्टोरीटेलिंग, योग, मेडिटेशन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नदी किनारे गतिविधियां और रात्रिकालीन आयोजन पर्यटकों को अधिक समय तक रोक रहे हैं। वाराणसी इसका बड़ा उदाहरण है, जहां 2025 में रिकॉर्ड 7.26 करोड़ पर्यटक पहुंचे। ये सालाना आधार पर करीब 17% बढ़ोतरी है। नमो घाट, गंगा आरती, रिवर क्रूज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने में मदद की है। धार्मिक पर्यटन का नया चेहरा युवा, और उनमें भी पुरुष आगे आध्यात्मिक यात्रा अब पारिवारिक बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। रेडबस के वित्त वर्ष 2026 के विश्लेषण के अनुसार आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करने वालों में 53% हिस्सेदारी जेन-जी और युवा वयस्कों की है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें 69% पुरुष और 31% महिलाएं हैं। मेकमाई ट्रिप की रिपोर्ट के अनुसार ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों में 59% हिस्सेदारी जेन-जी की है। यहां गंगा आरती जितनी आकर्षित करती है, उतना ही योग, ध्यान, रिवर राफ्टिंग और हिमालयी ट्रेक भी। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस ट्रेंड को ‘श्राइनकेशन’कह रहे हैं, यानी तीर्थ और वेकेशन का मेल। धार्मिक शहरों में 34%, पहाड़ों, समुद्र में औसतन 15% वृद्धि पहले पर्यटन की पहचान गोवा, शिमला और मनाली जैसे अवकाश स्थलों से होती थी। अब अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज और उज्जैन जैसे धार्मिक शहर सबसे तेजी से बढ़ते पर्यटन केंद्र बन रहे हैं। पर्यटन मंत्रालय, राज्यों के पर्यटन विभाग के डेटा का आकलन करने से पता चलता है कि जहां धार्मिक शहरों की औसत पर्यटक वृद्धि लगभग 34% सालाना है, वहीं प्रमुख समुद्र तटीय शहरों और पहाड़ों की वृद्धि लगभग 15% के आसपास है। मथुरा-वृंदावन में 2024 से 2025 के बीच 50% सैलानी बढ़े, अयोध्या में 87% से ज्यादा वृद्धि रही। गोवा में ये आंकड़ा 8%, शिमला में 21% के करीब रहा। अयोध्या में 2020 से 24 तक 27 गुना पर्यटक बढ़े। घरेलू पर्यटन: 60% हिस्सा धार्मिक पर्यटन का 53% आध्यात्मिक यात्राओं में जेन-जी और युवा वयस्कों की हिस्सेदारी 69% आध्यात्मिक यात्रा करने वाले युवाओं में पुरुष, 31% महिलाएं 59% ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों में जेन-जी 60% भारत के घरेलू पर्यटन में धार्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी 23% आध्यात्मिक यात्रा की बुकिंग यात्रा से चार घंटे पहले हो रही, 2022 में यह 16% थी 71% युवा (18 से 24 वर्ष) ट्रैवल प्लान के लिए एआई उपयोग करते हैं। पर्यटक विशेष रूप से इन अनुभवों में अधिक रुचि धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समझना। स्थानीय समुदायों, उनकी परंपराओं, जीवनशैली से जुड़ना। त्योहारों, लोककथाओं, अनुभव-आधारित गतिविधियों के माध्यम से उस स्थान को करीब से महसूस करना
डिजिटल और एआई की क्रांति से आ रहा है बड़ा बदलाव केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल क्रांति ने धार्मिक यात्रा को उतना ही सहज बना दिया है, जितना किसी वीकेंड ट्रिप को। यात्रा की योजना बनाने में एआई का उपयोग 2024 में 26% था, जो 2025 में बढ़कर 41% हो गया। 18–24 वर्ष के 71% युवा यात्रा की योजना के लिए एआई का नियमित उपयोग करते हैं। रेडबस के अनुसार युवा यात्रियों में 23% बुकिंग यात्रा से सिर्फ चार घंटे पहले होती हैं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 16% था। इस क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ सेगमेंट ‘फेथ-टेक है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप और एआई के उपयोग से धार्मिक और आध्यात्मिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
Source link
