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आयुष्मान में बड़ा खेल:शिविर लगाकर बीपी-शुगर के मरीज ढूंढे, क्लेम के लिए 7 दिन भर्ती भी रखा




भोपाल के आसपास के गांवों से अस्पतालों में फर्जी मरीज भर्ती कर आयुष्मान में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद ऐसा ही मामला रायसेन में भी सामने आया है। ब्लड प्रेशर, घुटनों में दर्द, शुगर, बहरापन आदि छोटी-मोटी बीमारी वाले मरीजों को एक ही दिन ले जाकर मंडीदीप स्थित सार्थक मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में भर्ती किया और क्लेम लेने के लिए सभी को 7 दिन रखा। फिर सभी को छुट्‌टी देकर घर भी छोड़ गए। ये सभी 17 मरीज सांचेत गांव के हैं। इन्हें ले जाने से पहले गांव के पंचायत भवन में अस्पताल द्वारा बाकायदा स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया था। इसके बाद सभी को वाहन में भरकर मंडीदीप ले गए। 15 जुलाई को सांचेत, अगले दिन विशनखेड़ी में लगा शिविर : ग्रामीणों के अनुसार 15 जुलाई को सांचेत पंचायत भवन में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। टीम ने मरीजों की जांच के साथ आयुष्मान कार्ड का सत्यापन किया। इसके अगले दिन टीम विशनखेड़ी भी पहुंची, जहां शिविर लगाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक विशनखेड़ी से करीब 12 लोगों को ले जाने की बात सामने आई। कुल 17 मरीजों में 15 सांचेत के और दो डंडेरा के बताए गए हैं। अस्पताल का प्रबंधन देखने वाले सौरभ शर्मा से भास्कर ने बात की तो उनका कहना था कि मैं इस बारे में पता करता हूं। इसके बाद उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। फर्जीवाडे़ में सात दिन भर्ती रखने का सच पैकेज और निगरानी नियम: आयुष्मान योजना में अधिकांश सामान्य सर्जरी, इलाज या मेडिकल मैनेजमेंट पैकेज में अस्पताल को क्लेम क्लीयर करने के लिए मरीज की दैनिक निगरानी, वाइटल्स और न्यूनतम भर्ती का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करना होता है। संदेह से बचने का तरीका: अस्पताल को लगता है कि 1-2 दिनमें छुट्टी देने पर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी या एंटी-फ्रॉड टीम क्लेम को रीजेक्ट कर सकती है। इसलिए वे फर्जी मरीज या मामूली बीमारी वाले मरीजों को भी जबरन 5 से 7 दिन तक रोककर रखते हैं ताकि कागजों पर “गंभीर इलाज” दिखाया जा सके। फर्जी क्लेम का क्लीयरेंस: 7 दिन का समय दिखाने से अस्पताल पैकेज की पूरी राशि (उदा. 10,000 से 50,000 तक) आसानी से क्लेम कर लेते हैं। भगवती बाई को घुटनों में दर्द, 8 दिन भर्ती रखा भगवती श्रीवास्तव (85) ने बताया कि उन्हें घुटनों और हाथ-पैर में दर्द के साथ बीपी की शिकायत थी। उन्हें अस्पताल में आठ दिन रखा गया। सांस की बीमारी, बढ़ी मुश्किल से छुट्‌टी दी मातादीन राजपूत (70) को सांस की बीमारी थी। सुबह चाय और खाने में एक समय सामान्य भोजन दिया जाता था। काफी मुश्किल से छुट्टी मिली। अस्पताल में इलाज के बाद भी फायदा नहीं जशोदाबाई केवट को घुटने में दर्द और कम सुनाई देने की शिकायत है। उनका कहना है कि इलाज के बाद भी उन्हें लाभ नहीं मिला। जांच करवाई जाएगी, गड़बड़ी पर कार्रवाई होगी एक साथ इतने मरीजों को ले जाना और छोड़कर जाना कई सवाल पैदा करता है। इसकी जांच कराएंगे। यदि गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश खत्री, सीएमएचओ, रायसेन



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