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इंदौर के डेली कॉलेज में सजा साहित्य का मंच:जी-लिट्राटी में लेखकों से रूबरू हुए विद्यार्थी; बोले-किताब पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत




इंदौर के डेली कॉलेज में मंगलवार को साहित्य और संवाद का रंग देखने को मिला। कॉलेज के वार्षिक साहित्यिक उत्सव जी-लिट्राटी 2026 के पांचवें संस्करण का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों ने शिरकत की। लेखकों ने अपनी किताबों, लेखन के अनुभवों और साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों से बातचीत की। वहीं विद्यार्थियों को लेखकों से सीधे संवाद करने और उनकी रचनात्मक यात्रा को करीब से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम में 1985 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और वैली ऑफ वर्ड्स अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक उत्सव के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ लेखिका विद्या नेसरीकर, हुतुका सुमी, नवनीत नीरव, अदिति कृष्णकुमार, शिवकुमार मोहंका और उपासना ने विभिन्न सत्रों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि किताब पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। साहित्य अलग-अलग भाषाओं और शैलियों के माध्यम से समाज, जीवन और मानवीय अनुभवों को समझने का अवसर देता है। किताबों पर चर्चा, लेखकों से सीधे सवाल
जी-लिट्राटी में किताबों को केंद्र में रखते हुए कई सत्र आयोजित किए गए। इनमें लेखकों के साथ साक्षात्कार, बातचीत और खुले मंच पर विचार-विमर्श हुआ। विद्यार्थियों ने लेखकों से उनके लेखन, पात्रों, विषयों और रचनात्मक प्रक्रिया को लेकर सवाल किए। साहित्यिक समीक्षा के लिए इस बार छह पुस्तकों का चयन किया गया था। इनमें विद्या नेसरीकर की ‘अ पैच ऑफ सन, अ पैच ऑफ शेड’, हुतुका सुमी की ‘जाइंट्स’, नवनीत नीरव की ‘नाच’, अदिति कृष्णकुमार की ‘द व्हाइट लोटस’, शिवकुमार मोहंका की ‘अबव एंड बियॉन्ड’ और उपासना की ‘उड़ने वाला फूल’ शामिल रहीं। विद्यार्थियों ने बनाए किताबों पर पोस्टर
आयोजन को सिर्फ लेखकों की बातचीत तक सीमित नहीं रखा गया। विद्यार्थियों ने चयनित पुस्तकों पर आकर्षक पोस्टर तैयार किए और किताबों को पढ़ने के बाद अपने विचार भी साझा किए। इससे साहित्य को लेकर विद्यार्थियों की समझ और उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति सामने आई। महिषासुर मर्दिनी पर नृत्य प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान डेली कॉलेज के विद्यार्थियों ने महिषासुर मर्दिनी के आख्यान पर आधारित नृत्य-रचना प्रस्तुत की। भारतीय पौराणिक कथा और नृत्य के सुंदर संयोजन वाली इस प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। डेली कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गुनमीत बिंद्रा ने लेखकों को प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।



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