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हाल ही में जब एक मशहूर हॉलीवुड सेलिब्रिटी से इंटरव्यू में पूछा गया कि शूटिंग के बाद वे तनाव दूर करने के लिए कौन सी हॉबी फॉलो करते हैं, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने सादगी से कहा,‘मेरी कोई हॉबी नहीं है। मुझे फुर्सत के पलों में कुछ न करना पसंद है, क्योंकि हॉबी का मतलब भी मेरे लिए एक और काम का बोझ है।’ ग्लैमर की दुनिया के हिसाब से जवाब अजीब लगे, पर सच कहें तो यह बेहद सुकून देने वाला विचार है। अमेरिकी लेखिका मीहिका बरुआ कहती हैं, आजकल हमने अपनी फुर्सत के समय यानी ‘लीजर टाइम’ को भी इस तरह व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है, मानो हमारी जिंदगी इसी पर टिकी हो। स्कीइंग, रनिंग क्लब, डांस, टेनिस, एक्टिंग, हाइकिंग, सर्फिंग से लेकर रॉक क्लाइम्बिंग तक… सूची खत्म ही नहीं होती। धीरे-धीरे ढेरों हॉबी रखना ‘स्टेटस सिंबल’ बन जाता है। यह समाज को यह दिखाने का जरिया बन चुका है कि आपके पास पैसा, वक्त और ऊर्जा सब भरपूर है। पर सवाल यह है कि क्या हम सच में इनका आनंद ले पाते हैं?हाल में स्लोवेनिया की ट्रिप से लौटी मीहिका बताती हैं, ‘पैडलबोर्डिंग, हाइकिंग, पैराग्लाइडिंग से भरी इस यात्रा का नतीजा यह रहा कि तीसरे दिन पेनकिलर्स लेनी पड़ी। थकान के चलते ब्रेक मांगने पर उत्साहहीनता का ताना मिला। तब अहसास हुआ कि मैंने यह इसलिए नहीं किया क्योंकि मुझे दिलचस्पी थी, बल्कि इसलिए कि समाज में दिखने के लिए यह ‘जरूरी’ लगता था।’ फिटनेस एक्सपर्ट पॉलीन अलोंसो कहती हैं, सोशल मीडिया और वेलनेस कल्चर के दौर में शौक व फिटनेस भी प्रतिस्पर्धा बन गए हैं। अब लोग यह सोचते हैं कि कौन-सी गतिविधि उन्हें सबसे सफल दिखाएगी। मैराथन से लेकर फिटनेस ट्रैकर्स से हर कदम गिनने तक, सब कुछ उपलब्धि साबित करने का जरिया बन गया है। कसरत का उद्देश्य सिर्फ आनंद नहीं रहा, बल्कि खुद को लगातार बेहतर दिखाने का दबाव भी उससे जुड़ गया है। ‘ब्रेक’ का मकसद तनाव से राहत होना चाहिए, न कि थकावट लग्जरी एडवेंचर टूर्स कराने वाली फर्म एएलएस प्राइवेट की बेला साइम का मानना है कि छुट्टियों व खेलों का असली उद्देश्य शहर की भागदौड़ से मानसिक ब्रेक लेना होना चाहिए, न कि वहां भी परफॉर्म करना। जब हम फुर्सत के पलों में भी ‘नंबर वन’ बनने या दूसरों से बेहतर दिखने की होड़ में लग जाते हैं, तो आराम के बजाय तनाव मिलता है। नतीजतन, शरीर और मन थक जाते हैं। पॉलीन कहती हैं,‘अपनी गतिविधियों या फिटनेस रिकॉर्ड को हर बार सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें। इससे प्रदर्शन का दबाव कम होगा। कभी-कभी बिना लक्ष्य के टहलने या खाली समय बिताने का आनंद भी लें। ऐसे काम चुनें जिनमें जीत, नंबर या उपलब्धि की चिंता न हो, बल्कि अनुभव और खुशी का महत्व हो।’
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एक्सपर्ट्स की सलाह; बिना लक्ष्य खाली वक्त का आनंद लें:बोझ बने शौक – सुकून छोड़कर प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा की होड़ में फुर्सत के पल
