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बिलौआ में अवैध खनन रोकने प्रशासन के इंतजामों की वीडियोग्राफी ने हाईकोर्ट में परतें खोल दीं। कोर्ट ने एरियल वीडियोग्राफी की एक फाइल देखी। इसे सरसरी तौर पर देखने और सवाल चिह्नित करने में ही करीब 45 मिनट लग गए। वीडियो में खनन क्षेत्र से निकलकर मुख्य सड़कों में मिलने वाले कई गैर-परंपरागत रास्ते दिखे। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर रुचिका चौहान से पूछा- इन रास्तों से ट्रक-डंपर निकल रहे हैं तो उनकी आवाजाही दर्ज करने चेक कहां हैं? खदान से कितना खनिज बाहर जा रहा, हिसाब कैसे रख रहे हैं? मौके पर तो खनिज की मात्रा मापने वे-ब्रिज तक नहीं है। कलेक्टर को पूरी एरियल वीडियोग्राफी देखने का जिम्मा कोर्ट ने कलेक्टर को पूरी एरियल वीडियोग्राफी देखने का जिम्मा दिया है। उन्हें एक-एक गैर-परंपरागत रास्ते की स्थिति देखनी होगी। फिर कोर्ट को बताना होगा कि इनमें से कौन से रास्ते मुख्य मार्गों से मिलते हैं और क्या इनसे खदान संचालकों के डंपरों को अवैध रूप से खनिज बाहर निकालने में मदद मिल रही है। क्रशरों पर भी सवाल: हाईकोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि इस मामले में ‘माइनिंग एरिया’ में वह क्षेत्र भी शामिल होगा, जहां क्रशर लगाए गए हैं। अब कलेक्टर को बताना है कि खदान संचालकों के क्रशर स्वीकृत लीज क्षेत्र में हैं या उसके बाहर। इसके लिए कोर्ट ने उन्हें जरूरी ‘होमवर्क’ करने का समय दिया है। बिलौआ के अवैध खनन पर सुनवाई, कलेक्टर मौजूद रहीं
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच में बिलौआ के अवैध खनन की याचिका पर सुनवाई के दौरान कलेक्टर मंगलवार सुबह 9:30 बजे मौजूद रहीं। वीडियो देखकर कोर्ट के सवाल उन स्थानों तक पहुंचे, जिन्हें खनन के लिए लीज पर दिया ही नहीं। कलेक्टर से ऐसे क्षेत्रों पर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। अवैध खनन और परिवहन पर अब पुलिस भी घेरे में…
बुधवार को हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में खनिज चोरी का सवाल शामिल है, इसलिए ग्वालियर एसपी और बिलौआ थाना प्रभारी आवश्यक पक्षकार हैं। खनिज एवं भू-विज्ञान संचालनालय के निदेशक को भी पक्षकार बनाया गया। कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर उसी समय आवश्यक संशोधन की अनुमति दे दी। इसी दौरान सामने आया कि जिन 16 निजी खदान संचालकों के संबंध में स्टे आदेश है, उनकी ओर से कोई कोर्ट नहीं पहुंचा। शासन ने बताया कि सभी 16 को नोटिस तामील हो चुके हैं।
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एक वीडियो देखने में 45 मिनट…:हाईकोर्ट ने कलेक्टर से पूछा- इतने रास्तों से खनिज निकल रहा, रोक कौन रहा?
