चंडीगढ़ | पलवल जिले के उटावड़ पुलिस थाने में हिरासत में बर्बरता के गंभीर आरोपों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने 18 और 19 अप्रैल 2026 की थाने की पूरी सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान फुटेज खराब होने या रखरखाव के कारण गायब पाई गई तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। पलवल निवासी आरिफ ने याचिका में आरोप लगाया कि 18 अप्रैल को कहासुनी के बाद पुलिस उसे उटावड़ थाने ले गई। वहां सीआईए प्रभारी दीपक गुलिया, हसन समेत चार अन्य पुलिसकर्मियों ने उसकी बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने जबरन मुंह में पेट्रोल डाला और शिकायत करने पर एनकाउंटर की धमकी दी। मामले में हाई कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और सरकार से जवाब मांगा है। हरियाणा के एडवोकेट जनरल (एजी) परविंदर सिंह चौहान को हाई कोर्ट जज नियुक्त करने की कोलेजियम की सिफारिश को चुनौती संबंधी याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने याची पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। हाई कोर्ट ने यह राशि पीजीआई चंडीगढ़ के पुअर पेशेंट रिलीफ फंड में जमा करवाने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता प्रदीप ने पहले परविंदर सिंह चौहान की हरियाणा के एजी के रूप में नियुक्ति को भी चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका का इस्तेमाल निजी विवाद को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता। मौजूदा जनहित याचिका में प्रदीप सिंह ने एजी की पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश पर रोक लगाने और उसे वापस लेने की मांग की थी। साथ ही नियुक्ति वारंट के आधार पर शपथ दिलाने की प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया गया था। सुनवाई में सामने आया कि याचिकाकर्ता पहले हरियाणा विद्युत नियामक आयोग में कर्मचारी था। चौहान उस समय आयोग के न्यायिक सदस्य थे। याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ कार्यवाही हुई थी, जिसके बाद उसे सेवा से हटा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि वास्तविक और ईमानदार जनहित याचिकाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जबकि निजी उद्देश्यों से दाखिल याचिकाओं को रोका जाना चाहिए।याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज बनाम केंद्र सरकार और स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम चौधरी भजन लाल मामलों का हवाला दिया गया था। हाई कोर्ट ने याची के तरीके पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने फैसले के किसी विशेष अंश का उल्लेख करने के बजाय एक कानूनी वेबसाइट पर प्रकाशित फैसले के शीर्षक में दिए सार पर भरोसा किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह फैसलों का उल्लेख स्वीकार्य नहीं है। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा जनहित याचिका वास्तविक जनहित में दायर नहीं की गई थी। अदालत ने इसे खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
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एजी को जज बनाने की सिफारिश को चुनौती देना महंगा पड़ा, हाईकोर्ट ने याची पर 1 लाख रुपए जुर्माना लगाया
