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हाल ही में मैंने एक इंटरव्यू में हिस्सा लिया, जहां मुझे दिन भर में 24 उम्मीदवारों को स्क्रीन करना था। लेकिन मुझे हैरानी इस पर हुई कि 2 हजार से ज्यादा आवेदनों में से कंपनी की एचआर टीम ने महज दो दर्जन उम्मीदवारों को छांट लिया था, वो भी सिर्फ आधे ही दिन में। मैंने छंटनी की इस प्रक्रिया के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने मुझे नौ एआई मॉडलों में करीब 13 हजार अलग-अलग ‘टेल्स’ दिखाए। सोच रहे हैं कि यह ‘टेल’ क्या है? ये किसी की राइटिंग में मौजूद ऐसे छोटे संकेत होते हैं, जिनसे पता चलता है कि ये कंटेंट कैसे प्रोड्यूस किया गया है। मसलन, जैसे किसी व्यक्ति के एक्सेंट, एक्सप्रेशंस या बनावटीपन से आपको उसे पहचानने में मदद मिलती है, वैसे ही जॉब एप्लीकेशन में बार-बार इस्तेमाल हुए कुछ शब्दों, वाक्यांशों और वाक्यों के पैटर्न बता सकते हैं कि कंटेंट एआई से तैयार किया है। आसान शब्दों में कहें तो ‘टेल्स’ ऐसे छोटे-छोटे संकेत हैं, जिनसे एआई-लिखित और इंसान के लिखे कंटेंट में फर्क किया जा सकता है। आम तौर पर किसी ‘टेल’- जो कि एक लिंग्विस्टिक फीचर है- का इस्तेमाल इंसानी लेखन की तुलना में एआई-जनरेटेड लेखन में कम से कम दोगुनी बार होता है। हाल ही में अमेरिका की रिसर्च आधारित एजेंसी ‘ग्रेफाइट’ के रिसर्चर्स ने एआई से तैयार 10 हजार लेखों की तुलना की और नौ एआई मॉडलों में करीब 13 हजार अलग-अलग ‘टेल्स’ की पहचान की। तो आखिर वे कैसे पहचानते हैं कि आपने एप्लीकेशन बनाने में एआई की मदद ली है? मान लीजिए, आप अपने सीवी में किसी बात को एक से ज्यादा बार यह कहते हुए अहम बताते हैं कि ‘व्हाय इट मैटर’, ‘मैटर्स मोस्ट’ या ‘जस्ट एज इम्पोर्टेंट’ तो यह संदेह पैदा कर सकता है। ऐसे ही, बहुत से एप्लीकेंट बोलते हुए तो कभी ऐसी कॉन्ट्रास्टिव फ्रेजिंग काम नहीं लेते, जैसे ‘नॉट ओनली अबाउट’, ‘इन्स्टीड इट’ या ‘रैदर देन सिंपली’, लेकिन एप्लीकेशन में इनका इस्तेमाल करते हैं तो इससे पता चल सकता है कि यह एआई-जनरेटेड है। हालांकि, मैं आगाह करना चाहूंगा कि ये महज वॉर्निंग साइन हैं, पुख्ता सबूत नहीं कि कोई पैसेज एआई-जनरेटेड है। इंसान भी इनका इस्तेमाल करते हैं। ग्रेफाइट के नतीजे लेखों के एक बड़े संग्रह में मिले सांख्यिकीय अंतरों को बताते हैं, न कि किसी एक वाक्य की जांच करने का भरोसेमंद तरीका। एचआर प्रोफेशनल्स जिन पांच बातों को अपनी नजर से परखते हैं, वो यहां पेश हैं। 1. बिना पर्सनल आइडेंटिटी वाली जेनरिक भाषा : एप्लीकेशन पेशेवर, किन्तु साथ ही ऐसी भी लग सकती है कि उसे किसी के भी द्वारा, किसी भी जॉब के आवेदन में लिखा जा सकता है। मसलन, ‘मैं एक हाइली-मोटिवेटेड, रिजल्ट-ड्रिवन प्रोफेशनल हूं, जिसे एक्सीलेंस हासिल करने का जुनून है।’ 2. ठोस सबूत के बिना बड़े-बड़े दावे : आवेदक खुद को इनोवेटिव, कॉलेबरेटिव, अडेप्टेबल, स्ट्रेटजिक और एक्सीलेंट कम्युनिकेटर बताता है, लेकिन किसी खास उपलब्धि या उदाहरण का जिक्र नहीं करता। उदाहरण के लिए, ‘मैं लगातार एक्सेप्शनल रिजल्ट देता हूं और ऑर्गेनाइजेशन की ग्रोथ में योगदान करता हूं।’ 3. जरूरत से ज्यादा पॉलिश्ड शैली : हर पैराग्राफ एक तय पैटर्न पर चलता है। आपस में सहज जुड़ाव होता है, वाक्य संतुलित होते हैं और उनमें कॉरपोरेट जगत के जाने-पहचाने एक्सप्रेशन होते हैं। एप्लीकेशन पर्सनल स्टेटमेंट के बजाय एक टेम्पलेट जैसी लगती है। मसलन, उसमें ऐसे शब्द होते हैं- ‘फर्दर-मोर, मोर-ओवर, इन-एडिशन, अल्टीमेटली।’ 4. जॉब डिस्क्रिप्शन से पूरी तरह मेल खाना : आवेदक जॉब वैकेन्सी में दिए गए की-वर्ड और योग्यताओं को बार-बार दोहराता है, लेकिन यह नहीं बताता कि उसका वास्तविक अनुभव उन योग्यताओं से कैसे मेल खाता है। जैसे, किसी जॉब डिस्क्रिप्शन में लीडरशिप, कम्युनिकेशन, प्रॉब्लम-सॉल्विंग और टीमवर्क जैसी योग्यता मांगी जाती हैं। एप्लीकेशन में इन चारों खूबियों का दावा तो किया जाता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि इनका प्रदर्शन कब और कैसे किया गया। 5. आवेदक की एप्लीकेशन और दूसरी लिखित सामग्री में अंतर : कवरिंग लेटर में भाषा बेहद प्रभावशाली और वाक्य बिना किसी गलती के होते हैं। जबकि सीवी, पहले हुए पत्राचारों या अन्य दूसरे लेखन नमूनों की शैली और अभिव्यक्ति में उल्लेखनीय अंतर होता है। आम तौर पर एचआर को तब शक होने लगता है, जब बिना किसी स्पष्ट कारण के आवेदक की शब्दावली, वाक्य निर्माण में अंतर दिखता है या वह अपने ही दावों को समझा नहीं पाता। आवेदकों को ऐसे घिसे-पिटे वाक्यों से बचना चाहिए कि ‘मैं एक हाइली-मोटिवेटेड और रिजल्ट ओरिएंटेड प्रोफेशनल हूं, जिसके पास प्रॉब्लम-सॉल्विंग और कम्युनिकेशन की बेहतरीन क्षमता है।’ फंडा यह है कि इंटरव्यूअर को प्रभावित करने के लिए न लिखें। रटे-रटाए और सटीक दिखने वाले जवाबों के बजाय अपने शब्दों में अपने अनुभव बताएं और उनके साथ ठोस उदाहरण दें। मौलिक जवाब परफेक्ट नहीं हो सकते और एचआर भी यह जानता है।
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एन. रघुरामन का कॉलम:किन चीजों से बचें कि इंटरव्यू में आप एआई जैसे न लगें?
