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कचरा प्रबंधन के टेंडर पर निगम में घमासान:सीनियर डिप्टी मेयर-डिप्टी मेयर गैरहाजिर,यूनियन ने किया विरोध,कांग्रेस पार्षद बोले-निगम पर पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ




लुधियाना के नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कचरा उठाने और जमालपुर स्थित मुख्य डंप पर कचरे की प्रोसेसिंग व्यवस्था सुधारने के लिए तैयार किए गए इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को मेयर कैंप ऑफिस में फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी के लंबित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी। इनमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट भी शामिल था। हालांकि, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश प्रशार और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर बैठक में नहीं पहुंचे। प्रोजेक्ट का नगर निगम कर्मचारी यूनियन के नेता भी विरोध कर रहे हैं। बुधवार को यूनियन सदस्यों ने निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। यूनियन नेताओं ने अब इस प्रस्ताव के खिलाफ सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों से भी संपर्क करना शुरू कर दिया है। यूनियन बोली- निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश
यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार कर्मचारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए निगम पर भारी रकम का बोझ डालने की तैयारी है। यूनियन नेताओं ने प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले से कचरा उठाने और उससे जुड़े काम में लगे कर्मचारियों के भविष्य और रोजगार को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने टेंडर रद्द करने की मांग की
फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी के सदस्य कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने भी प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है। भट्टी ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित टेंडर से नगर निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। निगम की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि इतने बड़े स्तर पर लंबे समय तक होने वाले भुगतान के लिए पैसा कहां से जुटाया जाएगा। 15 हजार गरीब परिवारों की रोजी-रोटी का मुद्दा उठाया
गौरव भट्टी ने कहा कि वर्तमान में गरीब और मजदूर परिवारों के लोग भी डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। ऐसे परिवारों से रोजगार छीनकर इतना बड़ा और महंगा टेंडर लाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि करीब 15 हजार गरीब, दलित और मजदूर परिवारों की रोजी-रोटी को भी इस बड़े फैसले में ध्यान में रखा जाना चाहिए। पहले से दिए ठेकों के बावजूद नए टेंडर में वही काम शामिल करने पर सवाल
भट्टी ने यह भी दावा किया कि कचरे की ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग/डिस्पोजल से संबंधित काम पहले ही अलग-अलग मौजूदा ठेकों के तहत दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रस्तावित नए 8 साल के टेंडर में इसी तरह के कामों को दोबारा शामिल किया गया है। उन्होंने इस पर भी निगम से स्पष्टीकरण मांगा है। सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।



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