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करनाल जिला के असंध में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर एक कंपनी को करीब 26.19 करोड़ रुपए की रकम विदेश भेजने में मदद करने का मामला सामने आया है। आयकर विभाग के जांच अधिकारियों ने बीती 18 अगस्त को सीए के कार्यालय में सर्वे किया था। जांच में संबंधित कंपनी अपने घोषित पते पर नहीं मिली। विभाग की शिकायत पर असंध थाना पुलिस ने बीती 21 अगस्त को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में फर्जी प्रमाणन, धोखाधड़ी और मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। आयकर विभाग ने 18 अगस्त को किया था सर्वे
आयकर विभाग के अनुसार, चंडीगढ़ की टीम ने 18 अगस्त को सीए संदीप के कार्यालय का सर्वे किया था। यह कार्रवाई विदेश में धन भेजने के लिए कथित तौर पर बिना जरूरी जांच-पड़ताल किए प्रमाण पत्र जारी करने के आरोपों को लेकर की गई। सर्वे के दौरान असंध स्थित सीए के कार्यालय से संबंधित दस्तावेज और जानकारी की जांच की गई। जांच में सामने आया कि सीए संदीप ने विदेश में रकम भेजने के लिए आयकर नियमों के तहत जरूरी फॉर्म प्रमाणित किए थे। विभाग का आरोप है कि इन प्रमाण पत्रों को जारी करने से पहले संबंधित समझौते, खाताबही और अन्य जरूरी दस्तावेजों की उचित जांच नहीं की गई। सीए संदीप पर 49 प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप
शिकायत के मुताबिक सीए संदीप करनाल के रिसालवा गांव का रहने वाला है। वह असंध में ‘संदीप सिंगरोहा एंड एसोसिएट्स’ नाम से पेशेवर फर्म चलाते हैं। शिकायत के मुताबिक, विभाग ने बताया कि एम/एस डिजीटेक आईटी सॉल्यूशंस नाम की संस्था के लिए वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 49 फॉर्म 15सीबी प्रमाणित किए गए। कंपनी का पता गुरुग्राम बताया गया था। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर कुल 26 करोड़ 19 लाख 9 हजार 471 रुपए विदेश भेजे गए। जांच में कंपनी बताए पते पर नहीं मिली
शिकायत के अनुसार, आयकर विभाग ने गुरुग्राम के कार्यालय की ओर से कंपनी के घोषित पते का वेरिफिकेशन कराया। वेरिफिकेशन के दौरान एम/एस डिजीटेक आईटी सॉल्यूशंस वहां नहीं मिली। इतनी बड़ी रकम विदेश भेजने के बावजूद संबंधित संस्था इनकम टेक्स रिटर्न भी दाखिल नहीं कर रही थी। इसी आधार पर विभाग ने इसे शेल यानी कागजी या फर्जी संस्था की प्रकृति का बताया है। सर्वे के दौरान सीए संदीप का बयान भी दर्ज किया गया। विभाग का आरोप है कि संदीप ने स्वीकार किया कि उन्होंने संबंधित खाताबही, समझौते और अन्य दस्तावेजों की आवश्यक जांच नहीं की थी। विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि सीए द्वारा फॉर्म 15सीबी पर प्रमाणन किए जाने के बाद ही संबंधित संस्थाओं के लिए विदेश में रकम भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। विभाग का आरोप है कि बिना उचित वेरिफिकेशन के प्रमाण पत्र जारी करने से 26.19 करोड़ रुपए की राशि विदेश भेजी गई। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा और वित्तीय व्यवस्था की अखंडता को नुकसान पहुंचने की बात शिकायत में कही गई है।
शिकायत के अनुसार, आरबीआई ने अधिकृत बैंकों के लिए विदेशी रकम भेजने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विदेश रकम भेजते समय फॉर्म 15सीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित किया जाता है। इसमें अकाउंटेंट को भुगतानकर्ता और रकम पाने वाले पक्ष के बीच समझौते, खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रकम की प्रकृति तथा टैक्स कटौती की दर निर्धारित करनी होती है। पुलिस ने 21 अगस्त को दर्ज किया मुकदमा
आयकर विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर मासूम राजा खान (आईआरएस) गुरुग्राम ने 20 अगस्त को शिकायत पुलिस को दी। शिकायत में सीए संदीप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। जिसके बाद असंध पुलिस ने तथ्यों की जांच की और 21 अगस्त को संदीप के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरे नेटवर्क तक पहुंचे पुलिस
आयकर विभाग ने शिकायत में कहा है कि मामले में केवल सीए संदीप की भूमिका तक सीमित न रहकर उन अन्य लोगों और बिचौलियों की भी जांच जरूरी है, जिन्होंने कथित तौर पर मिलकर विदेशी रकम भेजने की प्रक्रिया में मदद की। विभाग ने ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अब दस्तावेज, फॉर्म 15सीबी, कंपनी के पते, बैंक लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
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करनाल सीए ने करवाई करोड़ो विदेशी रेमिटेंस में कराई हेराफेरी:बिना दस्तावेज जांचे फॉर्म 15सीबी किए प्रमाणित,2023-24 में 49 बार विदेश भेजी रकम
