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कल के पंजाब बंद को सिख संगठनों ने कसी कमर:फरीदकोट में दुकानदारों और आम लोगों से सहयोग की अपील,जरूरी सेवाओं को रहेगी छूट




कौमी इंसाफ मोर्चे के आह्वान पर 21 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को बुलाए गए ‘पंजाब बंद’ को सफल बनाने के लिए फरीदकोट में विभिन्न सिख और पंथक संगठनों ने अपनी कमर कस ली है। संगठनों ने अपनी तैयारियां पूरी करते हुए आम जनता, व्यापारियों और समाज के सभी वर्गों से इस बंद को शांतिपूर्ण ढंग से सफल बनाने की पुरजोर अपील की है। नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह बंद कल दोपहर 2 बजे तक प्रभावी रहेगा और इस दौरान आम जनता की सहूलियत के लिए आपातकालीन व जरूरी सेवाओं को पूरी छूट दी गई है। इन मांगों को लेकर बुलाया गया है पंजाब बंद फरीदकोट में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिख संगठनों के प्रतिनिधियों—रणजीत सिंह, मनप्रीत सिंह खालसा सहित अन्य पंथक नेताओं ने बंद के मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कौमी इंसाफ मोर्चे द्वारा यह बंद मुख्य रूप से दो बड़ी मांगों को लेकर बुलाया गया है। जेलों में बंद नजरबंद सिख कैदी जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए कम से कम 10 दिन की पैरोल दी जाए। अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके सभी ‘बंदी सिंहों’ को तुरंत जेलों से रिहा किया जाए। हवारा ने ठुकराई एक दिन की पैरोल, संगठनों ने जताया रोष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंथक नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि जगतार सिंह हवारा की माता काफी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं। उनसे मुलाकात के लिए खुद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात कर पैरोल की पैरवी की थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कथित तौर पर हवारा को केवल एक दिन की ही पैरोल दी जा रही है। नेताओं के मुताबिक, जगतार सिंह हवारा ने इस एक दिन की पैरोल को नाकाफी बताते हुए इसे लेने से साफ इनकार कर दिया है। शहर में निकाला जाएगा रोष मार्च, समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील रणजीत सिंह और मनप्रीत सिंह खालसा ने कहा कि अमानवीय आधार पर हवारा को कम से कम 10 दिन की पैरोल मिलनी चाहिए ताकि वह अपनी मां की देखभाल कर सकें। उन्होंने घोषणा की कि बंद के दौरान कल 21 अगस्त को संगठनों की ओर से फरीदकोट शहर में एक विशाल रोष मार्च भी निकाला जाएगा। पंथक नेताओं ने फरीदकोट के समस्त दुकानदारों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे दोपहर 2 बजे तक अपने प्रतिष्ठान और कामकाज बंद रखकर इस संघर्ष में अपना योगदान दें, ताकि जेलों में बंद सिखों की रिहाई की आवाज को सरकार के कानों तक मजबूती से पहुंचाया जा सके।



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